डार्क वेब क्या है (What is Dark Web) कैसे कार्य करता है तथा इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

इंटरनेट वर्तमान दौर में मानव जीवन के लिए किसी प्राणवायु से कम नहीं है, हम अपने रोजमर्रा के न जाने कितने कार्यों के लिए इंटरनेट पर पूर्णतः निर्भर हो चुके हैं। इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि, इंटरनेट ने मानव जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है, एक स्मार्टफोन के माध्यम से आज हम पूरी दुनियाँ से जुड़ चुके हैं, किन्तु जैसा कि, हर तकनीकी के साथ कुछ न कुछ खामियाँ होती हैं इंटरनेट भी इससे अछूता नहीं है।

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इंटरनेट का एक रूप ऐसा भी है, जिसके बारे में सामान्य इंटरनेट उपयोगकर्ता को जानकारी नहीं होती है। नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में जहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था जैसे अनेक क्षेत्रों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं। आज इस लेख में हम इंटरनेट के विभिन्न प्रकारों की बात करेंगे तथा विस्तार में समझेंगे इंटरनेट के उस रूप को, जिसका इस्तेमाल गैर-कानूनी कार्यों को अंजाम देने के लिए किया जाता है।

इंटरनेट क्या है?

इंटरनेट अथवा इन्टरकनेक्टेड नेटवर्क विश्वभर के कम्प्यूटरों का एक जाल है, जिसमें सभी कम्प्यूटर एक दूसरे के साथ IP एड्रेस की मदद से सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं। इसकी शुरुआत 1969 में हुई तथा आम जनता के लिए इसकी शुरुआत 1990 के शुरुआती दशक में हुई। आज दुनियाँभर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या तकरीबन 4.5 अरब है, जबकि अकेले भारत में 82 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। आइये अब देखते हैं इंटरनेट के कितने प्रकार हैं?

  • सरफेस वेब
  • डीप वेब
  • डार्क वेब

सरफेस वेब

यह इंटरनेट का वह भाग है, जिसे बिना किसी विशेष अनुमति के किसी सर्च इंजन की मदद से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह साधारणतः इस्तेमाल किया जाने वाले इंटरनेट है, जिसका आप दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं। जब आप किसी सर्च इंजन जैसे गूगल में किसी विषय के बारे में खोजते हैं तो आपको दिखाए जाने वाले सभी परिणाम इसी के अंतर्गत आते हैं। आपको बता दें यह पूरे इंटरनेट का केवल लगभग 5% है।

डीप वेब

यह इंटरनेट का वह भाग है, जिसमें आप किसी जानकारी को केवल सर्च इंजन की सहायता से हासिल नहीं कर सकते। यह जानकारी सर्च इंजन में मौजूद नहीं होती इस जानकारी को हासिल करनें के लिए आपको विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है, जिसके बाद आप अपने सामान्य ब्राउज़र में ऐसी जानकारी ऐक्सेस कर सकते हैं। इसके अंतर्गत ऐसी सभी जानकारियाँ आती हैं, जो किसी पासवर्ड द्वारा सुरक्षित होती हैं। जैसे आपके ई-मेल खाते, सोशियल मीडिया एकाउंट, क्लाउड स्टोरेज, कोई ऐसी सामग्री, जिसकी आपने सदस्यता ली हो, कंपनियों, सरकारों, संस्थाओं आदि का निजी डेटा आदि।

डार्क वेब

इंटरनेट का अंतिम प्रकार है डार्क वेब (Dark Web), अक्सर लोगों को यह वहम होता है कि, डार्क वेब इंटरनेट का गैर-कानूनी रूप है किंतु यह पूर्ण रूप से सत्य नहीं है। आइये विस्तार से समझते हैं डार्क वेब क्या है। जैसा कि, हमने अपने VPN वाले लेख में समझाया था कि, किस प्रकार आपके द्वारा उपयोग किये जाने वाले इंटरनेट की पूरी जानकारी आपके इंटरनेट सेवा प्रदान करने वाली कंपनी (सामान्यतः टेलिकॉम कंपनियाँ) के पास होती है, जिस कारण आपकी निजता सुरक्षित नहीं रह जाती।

इसी को ध्यान में रखते हुए मध्य 1990 में अमरीकी नेवल रिसर्च लेबोरेटरी द्वारा एक प्रोजेक्ट TOR “द अनियन राउटर” की शुरुआत की गयी, जिसका उस समय मुख्य उद्देश्य अमेरिकी खुफिया संचार को सुरक्षित करना था। साल 2002 में इस प्रोजेक्ट को पूरा कर शुरू कर दिया गया तथा सन 2004 में इसे आम लोगों के उपयोग के लिए शुरू कर दिया गया।

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इसका मुख्य उद्देश्य सरकारों या संस्थाओं से आपकी निजता या आप इंटरनेट पर क्या कर रहे हैं उसे सुरक्षित करना है। चूँकि यहाँ उपयोगकर्ता की पहचान पूर्णतः गुप्त होती है अतः डार्क वेब गैर-कानूनी कार्यों जैसे तस्करी, नकली करेंसी का व्यापार, ड्रग डीलिंग, गैर-कानूनी हथियारों की खरीद बिक्री, किसी का निजी डेटा चुराकर उसे किसी किसी अन्य व्यक्ति को बेचना आदि के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

डार्क वेब कैसे काम करता है?

आइये समझते हैं डार्क वेब की कार्यप्रणाली क्या है? जैसा कि, आप जानते हैं कोई भी उपकरण जो इंटरनेट का उपयोग कर पाने में संभव है उसे एक पहचान IP एड्रेस के रूप में दी गयी है। इसी IP एड्रेस की मदद से आपका ISP, कोई सरकारी एजेंसी या कोई हैकर आपकी गतिविधियों पर नज़र रख सकता है। अतः अप्रत्यक्ष रूप से यह IP एड्रेस आपके उपकरण की पहचान न होकर आपकी पहचान बन जाती है।

हमने VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) वाले लेख में समझाया था किस प्रकार आप VPN से जुड़कर अपना IP एड्रेस तथा उसकी भौगोलिक स्थिति बदल सकते हैं तथा अपनी निजता की सुरक्षा कर सकते हैं। यहाँ संक्षेप में आपको बता दें VPN या वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क एक सर्वर होता है।

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इससे जुड़नें के बाद आपके द्वारा इंटरनेट पर भेजा जाने वाला कोई भी निवेदन इस सर्वर द्वारा आप तक पहुँचाया जाता है और IP एड्रेस तथा भौगोलिक स्थिति भी इसी सर्वर की इस्तेमाल होती है। ऐसे में आप अपने ISP या किसी अन्य संस्था, जो आप अपर नज़र रख रही हो से बच जाते हैं। डार्क वेब भी इसी कार्यप्रणाली पर काम करता है। जहाँ VPN में आप एक समय में केवल एक सर्वर से जुड़े होते हैं वहीं डार्क वेब में आप बहुत से VPN सर्वरों से जुड़ जाते हैं।

अब आपके द्वारा इंटरनेट पर किसी विषय को खोजने का निवेदन (Request) इन्हीं अलग-अलग सर्वरों द्वारा पूरा किया जाता है। इस प्रकार सर्वरों का एक जाल बन जाता है और उस निवेदन को बैक ट्रेस कर पाना असंभव हो जाता है, जिस कारण यह पता नहीं लगाया जा सकता की उस निवेदन की शुरुआत किस IP एड्रेस या किस उपकरण से हुई थी।

कैसे इस्तेमाल करें डार्क वेब?

गौरतलब है कि, डार्क वेब का इस्तेमाल करना गैर-कानूनी नहीं है, जब तक कि आप इसका इस्तेमाल किसी गैर-कानूनी कार्य के लिए नहीं करते। डार्क वेब को किसी सामान्य ब्राउज़र से चला पाना संभव नहीं है, इसके लिए आपको TOR” ब्राउज़र का इस्तेमाल करना होता है।

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इस ब्राऊज़र को आप TOR की ऑफिशियल वेबसाइट या यहाँ दी गई लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं। जैसा कि, हमने बताया डार्क वेब (Dark Web) में आपका निवेदन कई अन्य सर्वरों से होता हुआ जाता है अतः हो सकता है किसी सर्वर से आपका निजी डेटा चुरा लिया जाए अतः “TOR ब्राउज़र” इस्तेमाल करने के दौरान अपना ई-मेल, इंटरनेट बैंकिंग, सोशियल मीडिया एकाउंट्स आदि का इस्तेमाल न करें।

हमारे द्वारा दैनिक जीवन मे विजिट की जाने वाली वेबसाइट्स का अंत .com .in .net .gov .edu आदि से होता है। वहीं डार्क वेब से जुड़ी वेबसाइटों का अंत .onion से होता है ऐसी वेबसाइट होस्ट करने वाले लोग अपने निजी सर्वर का इस्तेमाल करते हैं। अपनी सुरक्षा के लिहाज़ से आप ऐसी वेबसाइट्स को न खोंले, जिनका अंत .onion से होता हो ऐसी वेबसाइट के गैर-कानूनी गतिविधियों में संलग्न होने की अधिक संभावनाएं होती हैं।

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