Indian parliament and its Structure in Hindi | भारतीय संसद

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क्या है संसद?

संसद किसी भी लोकतांत्रिक देश का विधायी अंग अथवा देश के अलग अलग हिस्सों से चुने हुए जनप्रतिनिधियों की एक सभा होती है जिसके द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के लिए कानून बनाकर देश का संचालन किया जाता है। गौरतलब है कि अलग अलग देशों में इस सभा का नाम अलग हो सकता है उदाहरण के लिए अमेरिका में इसे कांग्रेस के नाम से जाना जाता है वहीं भारत में संसद के नाम से।

भारतीय संसद के घटक

भारतीय संसद मुख्यतः तीन घटकों से मिलकर बानी होती है।

  • राष्ट्रपति
  • राज्यसभा या उच्च सदन
  • लोकसभा या निम्न सदन

संसद के घटकों की संरचना

राष्ट्रपति

राष्ट्रपति दोनों सदनों (लोकसभा तथा राज्यसभा) में से किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता किन्तु यह संसद का अभिन्न अंग है। संसद के दोनों सदनों से पारित कोई विधेयक केवल राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही कानून बन पाता है। हमने एक अन्य लेख में राष्ट्रपति पद के बारे में जिसमें राष्ट्रपति के निर्वाचन से लेकर उसकी शक्तियों तथा महाभियोग की चर्चा शामिल है को विस्तार से समझाया है जिसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

राज्य सभा

राज्यसभा की संरचना की बात करें तो राज्यसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित की गई है जिसमें 238 सदस्य राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्रों तथा 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य शामिल हैं। वर्तमान में राज्यसभा सदस्यों की कुल संख्या 245 है जिसमें 229 सदस्य राज्यों का एवं 4 केंद्र शासित क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। तथा 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है।

लोकसभा

वर्तमान में लोकसभा 545 सदस्यों की एक सभा है जिनमें 530 सदस्य राज्यों से, 13 केंद्र शासित प्रदेशों से तथा 2 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा एंग्लो इंडियन समुदाय से नामित किये जाते हैं। हाँलाकि लोकसभा के अधिकतम सदस्यों की संख्या 552 संभव है जिनमें 530 राज्यों के तथा 20 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हैं तथा शेष दो राष्ट्रपति द्वारा एंग्लो इंडियन समुदाय से नामित सदस्य हैं।

संसद के सदस्यों का चुनाव

लोकसभा सदस्यों का चुनाव

लोकसभा सदस्यों का चुनाव राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से प्रत्येक पाँच वर्ष में एक बार किया जाता है, तथा इन सदस्यों को प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के आधार पर भारत के नागरिकों द्वारा जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक है तथा जिन्हें कानून के तहत मतदान करने के लिए अयोग्य नहीं ठहराया गया है मतदान कर चुना जाता है।।इसके अलावा एंग्लो इंडियन समुदाय के दो सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है।

राज्यसभा सदस्यों का चुनाव

लोकसभा के विपरीत राज्यसभा सदस्यों का चुनाव राज्यों तथा संघ शासित प्रदेशों जिनमें केवल दिल्ली तथा पांडुचेरी शामिल हैं से अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के आधार पर होता है अतः राज्यसभा के सदस्यों के निर्वाचन में नागरिकों द्वारा सीधे मतदान नहीं किया जाता बल्कि राज्यों की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य या विधायक गण इन सदस्यों का चुनाव करते हैं। इसके अतिरिक्त 12 सदस्यों को जो कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यवहारिक अनुभव रखते हैं उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा सदस्य के रूप में नामित किया जाता है।

सदन के सदस्यों के लिए योग्यता एवं अयोग्यताएँ

संविधान में राज्यसभा एवं लोकसभा में सदस्य के रूप में चुने जाने के लिए किसी व्यक्ति की अर्हताओं अर्थात आवश्यक योग्यता तथा निरर्हताओं अर्थात किस आधार पर किसी व्यक्ति को अयोग्य ठहराया जा सकता है के बारे में बताया गया है। इन्हें आप जनप्रतिनिधि अधिनियम (1951) को पढ़कर जान सकते हैं किंतु कुछ महत्वपूर्ण योग्यताओं एव अयोग्यताओं की चर्चा हम यहाँ भी करेंगे।

योग्यताएँ

  • ऐसा व्यक्ति भारत का नागरिक होने चाहिए
  • उसे सदस्य बनने हेतु चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित व्यक्ति के समक्ष भारत की संप्रभुता, अखंडता एवं संविधान के प्रति निष्ठावान होने की शपथ लेनी होगी।
  • उसकी न्यूनतम आयु लोकसभा सदस्य के लिए 25 वर्ष तथा राज्यसभा सदस्य के लिए 30 वर्ष होनी आवश्यक है।

अयोग्यताएँ

अयोग्यताएँ अर्थात किसी व्यक्ति को सदन (लोकसभा एवं राज्यसभा) का सदस्य होने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा यदि

  • वह व्यक्ति भारत सरकार अथवा किसी राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद को धारण करता हो।
  • वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो यह केवल किसी न्यायालय के घोषित किये जाने के उपरांत ही मान्य होगा।
  • यदि वह घोषित दिवालिया हो।
  • वह चुनाव में भृष्ट आचरण का दोषी पाया जाए
  • यदि उसे किसी सरकारी सेवा से भ्रष्टाचार एवं निष्ठाहीन होने के कारण बर्खास्त किया हो।

सदनों की अवधि

राज्यसभा

राज्यसभा निरंतर चलने वाली सभा है अर्थात राज्यसभा का कभी विघटन नहीं होता है। इसके एक तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं तथा उनका स्थान नए सदस्य लेते हैं। इस प्रकार राज्यसभा सदस्यों की पदावधि छः वर्ष की होती है।

लोकसभा

राज्यसभा के विपरीत लोकसभा निरंतर चलने वाला सदन नहीं है यह प्रत्येक पांच वर्ष बाद स्वतः विघटित हो जाता है। किंतु सरकार के बहुमत खो देने की स्थिति में यह राष्ट्रपति के आदेश द्वारा पाचँ वर्ष से पूर्व भी विघटित हो सकता है। इसके अतिरिक्त आपातकाल की स्थिति में लोकसभा की अवधि बढ़ाई जा सकती है जिसे एक बार मे 1 वर्ष की अवधि तक बढ़ाया जा सकता है, किन्तु आपातकाल समाप्त होने की स्थिति में इसे 6 माह से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।

 

उम्मीद है दोस्तो आपको ये लेख (Indian parliament and its Structure in Hindi) पसंद आया होगा टिप्पणी कर अपने सुझाव अवश्य दें। अगर आप भविष्य में ऐसे ही रोचक तथ्यों के बारे में पढ़ते रहना चाहते हैं तो हमें सोशियल मीडिया में फॉलो करें तथा हमारा न्यूज़लैटर सब्सक्राइब करें। तथा इस लेख को सोशियल मीडिया मंचों पर अपने मित्रों, सम्बन्धियों के साथ साझा करना न भूलें।

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