Article 371 of Indian Constitution | क्या है अनुच्छेद 371?

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क्या है अनुच्छेद 371?

हमने अपने एक लेख में अनुच्छेद 370 के बारे में विस्तार से समझाया था, जिसके अनुसार जम्मू कश्मीर राज्य को कुछ विशेषाधिकार प्रदान किये गए थे। उसी की तर्ज़ पर संविधान में एक अन्य अनुच्छेद उल्लिखित है जो जम्मू कश्मीर की तरह कई अन्य राज्यों को कुछ विशेषाधिकार प्रदान करता है।

जैसा कि हमने अनुच्छेद 370 वाले लेख में समझाया था आज़ादी के समय भारत आज के भारत जैसा एक राष्ट्र नहीं था बल्कि छोटी छोटी रियासतों से मिलकर बना भारत था जिन रियासतों पर देशी राजे राजवाड़े राज करते थे अतः भारत में विलय करने की एवज में हर प्रान्त के राजाओं ने कुछ न कुछ विशेषाधिकारों या संसद द्वारा इन राज्यों के संबंध में विशेष कानून बनाने की माँग की।

अधिक चर्चाओं में रहने के कारण अधिकतर लोग केवल जम्मू कश्मीर को दिए जाने वाले विशेषाधिकार के विषय में ही जानते हैं, परंतु जम्मू कश्मीर के अलावा भी अन्य कई राज्य इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं हाँलाकि यह जम्मू कश्मीर की तुलना में उतने अधिक नहीं हैं फिर भी इन्हें जानना आवश्यक है। आज इस लेख में हम जानेंगे कौन कौन से राज्य हैं एवं किस राज्य को क्या विशेषाधिकार प्राप्त हैं।

विशेषाधिकार प्राप्त करने वाले राज्य

वर्तमान में भारत संघ के 11 राज्य इसका लाभ ले रहे हैं इस अनुच्छेद का मुख्य उद्देश्य राज्य को उनके पारंपरिक मामलों में सरकार के हस्तक्षेप से दूर रखना तथा केंद्र सरकार को इन राज्यों में कुछ विषयों पर अलग से कानून बनाकर उन क्षेत्र विशेषों का विकास करना है।

  • महाराष्ट्र एवं गुजरात
  • नागालैंड
  • असम एवं मणिपुर
  • आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना
  • सिक्किम
  • मिज़ोरम
  • अरुणांचल प्रदेश एवं गोआ
  • कर्नाटक

महत्वपूर्ण विशेषाधिकार

महाराष्ट्र एवं गुजरात

  • अनुच्छेद 371 के अनुसार महाराष्ट्र एवं गुजरात के राज्यपालों को कुछ विशेषाधिकार प्रदान किये गए हैं। जिसके अनुसार वे इन राज्यों के लिए अलग विकास बोर्डों का गठन कर सकते हैं।
  • उक्त क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करने के लिए उचित व्यवस्था करना तथा तथा युवाओं के लिए राज्य की सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की व्यवस्था करना। 

नागालैंड

अनुच्छेद 371क के तहत नागालैंड के लिए निम्न प्रावधान हैं

  • संसद द्वारा निम्न विषयों पर बनाई गई कोई भी विधि या कानून तब तक मान्य नहीं होगा जब तक राज्य विधानसभा उस पर सहमति न दे। ऐसे विषय हैं
    • नागाओं की धार्मिक या सामाजिक प्रथाएं
    • नागा रुडीजन्य विधि और प्रक्रिया अर्थात नागा समाज की सांस्कृतिक रीति के अनुसार कोई प्रक्रिया
    • सिविल और दाण्डिक न्याय प्रशासन जहाँ फैसले नागा रुडीजन्य विधियों द्वारा होते हैं।
    • भू एवं भू-संसाधन का अधिग्रहण और अंतरण। अतः राज्य में भूमि एवं उससे जुड़े संसाधनों पर सरकार का नहीं लोगों का अधिकार होगा।

असम

अनुच्छेद 371ख के तहत असम राज्य के लिए निम्न प्रावधान किए गए हैं।

  • असम के राज्यपाल राज्य विधानसभा के जनजातीय क्षेत्रों से चुने हुए सदस्यों से एक समिति का गठन कर सकता है।

मणिपुर

अनुच्छेद 371ग के तहत मणिपुर राज्य के लिए निम्न प्रावधान किए गए हैं।

  • राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह चाहे तो राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में मणिपुर विधानसभा के लिए चुने गए सदस्यों से एक समिति का गठन कर सकता है।
  • राष्ट्रपति इस समिति का उचित कार्य संचालन सुनिश्चित करने हेतु राज्यपाल को विशेष उत्तरदायित्व भी सौप सकता है।

आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना

अनुच्छेद 371घ के तहत आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना राज्य के लिए निम्न प्रावधान किए गए हैं।

  • राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह राज्य के अलग अलग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए शिक्षा एवं रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर सकता है।
  • राष्ट्रपति राज्य के किसी विशेष क्षेत्र के लोगों के लिए शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था कर सकता है।
  • राष्ट्रपति राज्य सिविल सेवा के पदों में कार्यरत अधिकारियों की शिकायतों एवं विवादों के निपटारे के लिए एक प्रशासनिक अधिकरण की स्थापना कर सकता है। जो राज्य के उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार से बाहर होगा। यह अधिकरण केवल सर्वोच्च न्यायालय के प्रति जवाबदेह होगा।

अनुच्छेद 371 ड़ संसद को आंध्रप्रदेश राज्य में केंद्रित विश्वविद्यालय खोलने का अधिकार प्रदान करता है।

सिक्किम

अनुच्छेद 371च के तहत सिक्किम राज्य के लिए निम्न प्रावधान किए गए हैं।

  • सिक्किम विधानसभा का गठन कम से कम 30 सदस्यों द्वारा होगा।
  • पूरे सिक्किम को एक संसदीय क्षेत्र मानते हुए केवल एक लोकसभा सीट दी जाएगी।
  • सिक्किम जनसंख्या के विभिन्न अनुभागों के अधिकारों की रक्षा करने हेतु संसद को यह अधिकार है कि वह राज्य की अधिकांश सीटें इन समुदायों द्वारा भरने के संबंध में प्रावधान करे।
  • राज्यपाल को यह दायित्व सौंपा गया है कि वह राज्य में शांति स्थापित करने की दिशा में कार्य करे। अपने इस दायित्व को पूरा करने के लिए राज्यपाल राष्ट्रपति द्वारा दी गयी शक्तियों का अपने विवेक से प्रयोग कर सकता है।
  • राष्ट्रपति देश के लिए बने किसी कानून को सिक्कम के संदर्भ में प्रतिषेध या संशोधित कर सकते हैं।

मिज़ोरम

अनुच्छेद 371छ के तहत मिज़ोरम राज्य के लिए निम्न प्रावधान किए गए हैं।

  • संसद द्वारा निम्न विषयों पर बनाई गई कोई भी विधि या कानून तब तक मान्य नहीं होगा जब तक राज्य विधानसभा उस पर सहमति न दे। ऐसे विषय हैं
    • मिज़ो लोगों की धार्मिक या सामाजिक प्रथाएं
    • मिज़ो समाज की सांस्कृतिक रीति के अनुसार कोई प्रक्रिया
    • सिविल और दाण्डिक न्याय प्रशासन जहाँ फैसले मिज़ो रुडीजन्य विधियों द्वारा होते हैं।
    • भूमि का स्वामित्व और अंतरण
  • मिजोरम विधानसभा में कम से कम 40 सदस्य होंगे।

अरुणांचल प्रदेश

अनुच्छेद 371ज के तहत अरुणांचल प्रदेश राज्य के लिए निम्न प्रावधान किए गए हैं।

  • अरुणांचल प्रदेश के राज्यपाल को राज्य में कानून व्यवस्था की स्थापना करने का विशेष दायित्व दिया गया है। अपने इस दायित्व का निर्वहन करने के लिए राज्यपाल राज्य की मंत्रिपरिषद से सलाह ले सकता है किंतु राज्यपाल द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होगा। किन्तु राष्ट्रपति राज्यपाल के इस विशेषाधिकार पर रोक लगा सकते हैं।
  • अरुणांचल प्रदेश विधानसभा में कम से कम 40 सदस्य होंगे।

गोवा

अनुच्छेद 371झ के तहत गोवा राज्य के लिए निम्न प्रावधान किए गए हैं।

  • गोवा राज्य की विधानसभा में कम से कम 30 सदस्य होंगे।

कर्नाटक

अनुच्छेद 371ञ के तहत कर्नाटक राज्य के लिए निम्न प्रावधान किए गए हैं।

  • राज्यपाल को यह दायित्व दिया गया है कि वह हैदराबाद कर्नाटक क्षेत्रों के लिए विकास बोर्डों की स्थापना।
  • क्षेत्र में विकासात्मक खर्चों के लिए निधि का समत्वपूर्ण आवंटन
  • क्षेत्र के लोगों के लिए राज्य सरकार के पदों में आरक्षण
  • क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों में सीटों का आवंटन।

 

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