Chinese Smartphone Ban: 12,000 से कम कीमत वाले चाइनीस स्मार्टफोन बैन करने की तैयारी में सरकार

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देश में 345 से अधिक चाइनीस एप्लीकेशन प्रतिबंधित करने के बाद अब सरकार चाइनीस स्मार्टफोन कंपनियों पर भी कुछ हद तक सख्ती बरतने की तैयारी में है, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार आने वाले समय में 12,000 रुपये या 150 डॉलर से कम कीमत वाले चाइनीज स्मार्टफोन्स की बिक्री पर बैन लगा सकती है।

ऐसा करने के पीछे सरकार का एकमात्र उद्देश्य घरेलू निर्माताओं जैसे लावा, माइक्रोमैक्स आदि को प्रोत्साहित करना है। हालाँकि इस मामले में अभी सरकार या चीनी कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। गौरतलब है कि, चीनी स्मार्टफोन कंपनियाँ जैसे शाओमी, वीवो, ओप्पो आदि लो बजट सेगमेंट में स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों में सबसे आगे हैं वहीं भारत, जो कि स्मार्टफोन के मामले में चीन के बाद दुनियाँ का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है इन कंपनियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

भारत की अर्थव्यवस्था को देखते हुए इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि, लो बजट सेगमेंट के स्मार्टफोन की भारत में कितनी माँग है और इसी माँग के चलते इन चाइनीज कंपनियों का भारत में दबदबा बना हुआ है तथा घरेलू कंपनियों के लिए इनसे प्रतिस्पर्धा करना सामान्यतः संभव नहीं है। आंकड़ों की बात करें तो इस साल की पहली तिमाही में 12,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बिक्री कुल स्मार्टफोन का एक तिहाई रही तथा इनमें 80 फीसदी उत्पाद इन्हीं चाइनीस कंपनियों के थे।

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फैसले से किन कंपनियों पर होगा असर

150 डॉलर या तकरीबन 12,000 रुपये तक स्मार्टफोन बेचने वाली कंपनियों में शाओमी पहले स्थान पर है, लिहाज़ा सबसे बड़ा झटका शाओमी को ही लगने जा रहा है। शाओमी के बाद बजट स्मार्टफोन बेचने वाली कंपनियों में वीवो, ओप्पो तथा रियालमी शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार साल 2021 में शाओमी ने 25.1% मार्केट शेयर के साथ तकरीबन 4 करोड़ स्मार्टफोन बेचे, जिनमें बहुत बड़ा हिस्सा Redmi 9A, Redmi 9 Power तथा Redmi 9 का था, ये तीनों 150 डॉलर से कम कीमत वाले स्मार्टफोन हैं।

शाओमी के अलावा वीवो ने 2021 में 15.6% के मार्केट शेयर के साथ 2.51 करोड़, रियलमी ने 15% मार्केट शेयर के साथ 2.42 करोड़ ओप्पो ने 11.1% के मार्केट शेयर के साथ कुल 1.78 करोड़ स्मार्टफोन भारतीय बाजार में बेचे। अतः इन चीनी कंपनियों का मार्केट शेयर देखते हुए यह साफ हो जाता है कि, यदि सरकार घरेलू कंपनियों को प्रोमोट करने के उद्देश्य से यह फैसला लागू करती है तो इन कंपनियों को जोरदार झटका लग सकता है।

इन कंपनियों को हो सकता है फायदा

सैमसंग पिछले कुछ समय से मिडरेंज तथा लो बजट स्मार्टफोन के बाजार में अपने पाँव जमाने की कोशिश में है और यह आंकड़ों में भी स्पष्ट दिखाई देता है। पिछले साल की बात करें तो सैमसंग, शाओमी के बाद भारतीय बाजार में 17.4% मार्केट शेयर के साथ दूसरी सबसे अधिक स्मार्टफोन बेचने वाली कंपनी रही। ऐसे में यदि चाइनीज कंपनियों के बजट स्मार्टफोन प्रतिबंधित किये जाते हैं, तो इसका सीधा फायदा सैमसंग को मिल सकता है।

इसके अतिरिक्त एप्पल पर भी सरकार के इस फैसले का सकारात्मक प्रभाव दिख सकता है, चाइनीज कंपनियाँ अपने लो बजट स्मार्टफोन्स के चलते उपभोक्ताओं द्वारा पसंद की जाती हैं, ऐसे में जब तक घरेलू कंपनियाँ ग्राहकों को बजट रेंज में पर्याप्त विकल्प नहीं दे देती तब तक ग्राहक मिड रेंज में चाइनीज कंपनियों का चुनाव करने के बजाए सैमसंग या एप्पल जैसी कंपनियों की तरफ रुख कर सकते हैं।

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रडार में चाइनीज कंपनियाँ

साल 2020 में चीनी सेना से हुई हिंसक झड़प के बाद से ही चाइनीज कंपनियाँ भारत सरकार के रडार में हैं, तब से अभी तक सरकार तकरीबन 340 से अधिक चाइनीज मोबाइल एप्लीकेशन भी प्रतिबंधित कर चुकी है। हाल ही में सरकार ने BGMI ऐप को भी बैन कर दिया है।

इसके अलावा स्मार्टफोन निर्माता शाओमी, वीवो और ओप्पो पर भी कर चोरी तथा मनी लांड्रिंग जैसे आरोप लग चुके हैं। पिछले महीने पहले वीवो और फिर ओप्पो पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी करी। सरकार का आरोप है कि, चीनी कंपनी ओप्पो मोबाइल टेलीकम्युनिकेशंस कॉर्प लिमिटेड की सब्सिडिएरी कंपनी ओप्पो इंडिया ने आयात कर में लगभग 43.9 अरब डॉलर का फ्रॉड किया है।

प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि, ओप्पो इंडिया ने ऐसी कर छूट का लाभ उठाया है, जिसकी वह वास्तव में हकदार नहीं थी और वित्तीय गड़बड़ी के चलते बचाए गए इस धन का बहुत बड़ा हिस्सा चीन भेज दिया गया। इसके अतिरिक्त अप्रैल में शाओमी पर भी कार्यवाही करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने कंपनी के स्थानीय बैंक एकाउंट से रॉयल्टी भुगतान के रूप में विदेश में अवैध तरीके से धन भेजने के चलते 725 मिलियन डॉलर फ्रीज़ कर दिए थे।

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