क्या हैं मनी लॉन्ड्रिंग एवं काला धन?(Money Laundering in Hindi)

एक दौर था जब वस्तुओं के बदले वस्तुओं का विनिमय किया जाता था, जैसे गेहूँ के बदले धान का विनिमय इत्यादि। विनिमय की यह प्रणाली बार्टर व्यवस्था कहलाती थी। धीरे-धीरे धातुओं के साथ वस्तुओं का विनिमय शुरू हुआ तथा औद्योगीकरण के बाद से कागजी मुद्रा या सांकेतिक मुद्रा प्रचनल में आई और आज भी इस्तेमाल की जा रही है। हालाँकि आज प्लास्टिक मुद्रा (क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड) तथा मुद्रा का डिजिटल रूप भी हमारे सामने है।

मनुष्य को उसके जीवन काल में अनेक वस्तुओं तथा सेवाओं की आवश्यकता होती है, जिन्हें वह स्वयं उत्पादित नहीं कर सकता। किसी भी वस्तु या सेवा को खरीदने के लिए मुद्रा की आवश्यकता होती है, अतः इसमें कोई दो राय नहीं है कि मुद्रा हमारे जीवन में बेहद महत्वपूर्ण है। धन या मुद्रा किसी भी अर्थव्यवस्था का केंद्र है। इसका इस्तेमाल ऋण चुकाने या अर्थव्यवस्था में विनिमय के साधन के तौर पर किया जाता है।

मुद्रा का इंसान की जीवन शैली से सीधा संबंध है। यह जितनी अधिक होगी किसी व्यक्ति की जीवन शैली भी उतनी बेहतर होगी। यही कारण है कि कई लोग मुद्रा अर्जित करने के गैर-कानूनी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में, आज इस लेख के माध्यम से हम चर्चा करेंगे मुद्रा शोधन अथवा मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering in Hindi) के बारे में, जानेंगे इसकी आवश्यकता क्यों पड़ती है? यह किस प्रकार किया जाता है? एवं अंत मे देखेंगे भारत तथा वैश्विक स्तर पर इस समस्या के निवारण हेतु किस प्रकार के कदम उठाए गए हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग क्या है? (Money Laundering in Hindi)

जैसा कि, हमने ऊपर चर्चा की कुछ लोग धन अर्जित करने के लिए गैर-कानूनी प्रक्रिया को अपनाते हैं अर्थात ऐसे कार्यों से धन अर्जित करते हैं, जिनकी सरकार अनुमति नहीं देती। इसमें अवैध ड्रग्स अथवा नारकोटिक्स का व्यापार, भ्रष्टाचार, अवैध हथियारों की खरीद फ़रोख्त, तस्करी, वेश्यावृत्ति, धोखाधड़ी आदि से कमाया गया धन शामिल है। इस प्रकार कमाया गया धन ही काला-धन (Black Money) कहलाता है। ये धन नकद (Cash) रूप में होता है ताकि इसके लेन-देन को ट्रेस न किया जा सके। गैर-कानूनी तरीके से कमाए गए इस धन अर्थात काले धन को वैध बनाने की प्रक्रिया ही मनी लॉन्ड्रिंग कहलाती है।

United Nations Office on Drugs and Crime (UNODC) के अनुसार एक वर्ष में विश्व स्तर पर धन शोधन को देखा जाए तो इसकी अनुमानित राशि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 2 से 5% या अमेरिकी डॉलर में लगभग $800 बिलियन से $2 ट्रिलियन है। कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का मानना है कि धन शोधन चक्र से गुजरने वाली असल राशि इससे कहीं अधिक है, जिसका धन शोधन की गोपनीयता के कारण अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। इतनी अधिक मात्रा में अवैध धन का वित्तीय संस्थानों तथा अर्थव्यवस्था में प्रवेश सरकारों के लिए एक महत्वपूर्ण नीति संबंधी चिंता का विषय है।

मनी लॉन्ड्रिंग की आवश्यकता

चूँकि काले धन को सरकार की नज़र से बचाने के लिए कोई व्यक्ति न ही इसे सीधे बैंक या किसी वित्तीय संस्थान में जमा करवा सकता है और न ही नकद रूप में उस राशि का उपयोग कर सकता है। हालाँकि एक बार में एक निश्चित राशि तक नकद का इस्तेमाल किया भी जा सकता है, किंतु ऐसे धन को व्यक्ति इच्छानुसार खर्च नहीं कर सकता। अपनी इच्छानुसार धन खर्च करने के लिए उस व्यक्ति को इस धन का शोधन या लॉन्ड्रिंग (Money Laundering in Hindi) करनी होती है, शोधित होने के पश्चात इस धन को व्हाइट या लीगल मनी कहा जाता है।

कैसे होता है धन शोधन या मनी लॉन्ड्रिंग?

मनी लॉन्ड्रिंग के कई तरीके हैं, किंतु सबका उद्देश्य समान है। इस प्रक्रिया में काले धन को किसी अन्य वैध स्रोत की आय दिखाया जाता है तथा उस आय पर कर का भुगतान करने के पश्चात व्यक्ति बिना किसी रोक टोक के उस धन का इस्तेमाल कर पाता है। काले धन को वैध बनाने की प्रक्रिया (Money Laundering in Hindi) अक्सर तीन चरणों में पूरी होती है जिनमें Placement (काले धन को वित्तीय संस्थानों तक पहुँचाना), Layering (फर्जी लेन-देन के एक नेटवर्क के माध्यम से धन को आय के मूल स्थान से अलग करना) तथा Integration (शोधित धन को किसी बिजनेस आदि में निवेश करना) शामिल हैं। आइए मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी प्रक्रिया को एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं।

(Money Laundering in Hindi)
क्रेडिट : UNODC

माना कोई व्यक्ति स्टीव किसी आपराधिक गतिविधि के माध्यम से 1 करोड़ रुपये कमाता है। यदि वे इन्हें सीधे बैंक में जमा कराए, तो उसे इन रुपयों पर कर देने के साथ साथ सरकार को यह भी बताना होगा कि ये 1 करोड़ रुपये किस प्रकार अर्जित किये गए हैं। ऐसे में स्टीव एक अन्य तरकीब खोजता है, वह बैंक से लोन लेकर कार धुलाई का व्यवसाय शुरू करता है। स्टीव की दुकान में प्रतिदिन लगभग 50 ग्राहक अपनी कार की धुलाई के लिए आते हैं। माना एक कार धुलाई की कीमत 500 रुपये है, जिसमें स्टीव 200 रुपयों का शुद्ध लाभ अर्जित करता है। इस प्रकार स्टीव दिन में 10,000 रुपयों का लाभ कमाता है।

शाम को दुकान बंद होने के पश्चात स्टीव रजिस्टर में 50 के बजाए 100 ग्राहकों को दिखाता है, जिनमें 50 ग्राहक असल में कार धुलाई के लिए नहीं आए। इस प्रकार उसके दिन का लाभ 10,000 से बढ़कर 20,000 रुपये हो जाता है। इसके पश्चात स्टीव उसके पास मौजूद काले धन से 10,000 रुपये निकाल कर दुकान में रख देता है तथा प्रतिदिन 10,000 रुपयों के काले धन को वैध बनाने में कामयाब हो जाता है।

यह प्रक्रिया साल भर चलती रहती है, जब तक स्टीव गैरकानूनी तरीके से कमाए गए 1 करोड़ रुपयों को दुकान के लाभ के रूप में न दिखा दे। अंत में वह 1 करोड़ के लाभ पर (जो सरकार की नज़रों में कार धुलाई से कमाया गया पैसा है) आयकर (माना 30%) चुकाता है। अब स्टीव बाकी बचे 70 लाख रुपयों को अपनी इच्छानुसार कहीं भी खर्च कर सकता है।

मनी लॉन्ड्रिंग के कुछ अन्य तरीके

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य तरीकों का भी मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering in Hindi) के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें विदेशों में शैल कंपनियों के माध्यम से धन शोधन, वित्तीय संस्थानों पर नियंत्रण प्राप्त करना आदि मुख्य हैं।

शैल कंपनियों के द्वारा : मनी लॉन्ड्रिंग के लिए शैल कंपनियों का इस्तेमाल प्रमुखता से किया जाता रहा है। शैल कंपनियाँ ऐसी कंपनियाँ होती हैं, जिनका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता अर्थात ये कंपनियाँ केवल कागजों में होती हैं। टैक्स हेवन कहे जाने वाले कई देशों जैसे बरमूडा, पनामा आदि में ऐसी कंपनियाँ बहुत आसानी से खोली जाती है। ये सरकारें इन नकली कंपनियों की जानकारी बहुत गोपनीय रखती हैं तथा किसी अन्य देश की सरकारों के साथ इसे साझा भी नहीं करती। इन कंपनियों के माध्यम से काला धन किसी अन्य देश की किसी कंपनी में निवेश, कर्ज आदि के तौर पर भेजा जाता है।

यह भी पढे : जानें क्या हैं टैक्स हेवन देश जिनकी सहायता से टैक्स चोरी तथा मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है।

वित्तीय संस्थानों पर कब्जा: मुद्रा शोधन या उसे वैध बनाने का एक अन्य तरीका किसी बैंक या वित्तीय संस्थान के प्रबंधन पर कब्जा कर लेना है, जो सामान्यतः इन संस्थानों के शेयर या वोटिंग राइट प्राप्त कर किया जाता है। ऐसे संस्थानों का पूर्ण नियंत्रण किसी व्यक्ति को उसके काले धन को शोधित करने में सहायता करता है।

अचल संपत्ति या रियल एस्टेट : काले धन का इस्तेमाल अचल संपत्ति को खरीदने या बेचने में भी अधिकता से किया जाता है। सामान्यतः विक्रेता कागजी तौर पर संपत्ति को सस्ते दामों में बेचता है तथा बची कीमत क्रेता से नकद के रूप में प्राप्त करता है, जो कि काला धन होता है। इसके अतिरिक्त कई लोग अपनी किसी संपत्ति को किराए पर देते हैं तथा काले धन को प्रॉपर्टी से आने वाले किराए के रूप में दिखा कर उसे वैध धन में परिवर्तित करते हैं।

लोगों के माध्यम से : कई परिस्थितियों में किसी बड़ी धनराशि को विभाजित कर कई लोगों में बाँट दिया जाता है, तत्पश्चात उन्हें किसी खास कंपनी से कोई सेवा लेने के लिए कहा जाता है। इस प्रकार विभाजित किया अवैध धन पुनः कंपनी के माध्यम से जमा कर वैध में परिवर्तित हो जाता है।

क्यों स्विस बैंकों में ही जमा होता है कालाधन?

आपने अक्सर कालेधन की चर्चाओं में स्विस बैंक का नाम सुना होगा। दुनियाँ भर के भ्रष्टाचारी, तस्कर आदि इन बैंकों का इस्तेमाल काले धन को छुपाने के लिए करते हैं। आइए समझते हैं क्यों स्विस बैंकों का इस्तेमाल ऐसे धन को छुपाने में किया जाता है। गौरतलब है कि स्विस बैंक कोई अकेला बैंक नहीं है, बल्कि स्विट्ज़रलैंड आधारित बैंकों को स्विस बैंक कहा जाता है। स्विट्ज़रलैंड में तकरीबन 300 से अधिक बैंक हैं, जिनमें UBS तथा Credit Suisse सबसे बड़े बैंकों में शामिल हैं।

स्विस बैंक में खाता खोलने के कुछ विशेष फायदे हैं, जो काला धन रखने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते है। इन बैंकों में धन जमा करने का सबसे पहला और मुख्य फायदा यह है कि ये बैंक अपने ग्राहकों की किसी भी प्रकार की जानकारी को साझा करने में अत्यधिक गोपनीयता बरतते हैं। इन बैंकों की गोपनीयता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि, किसी बैंकर द्वारा अपने ग्राहक से जुड़ी जानकारी साझा करना यहाँ अपराध की श्रेणी में आता है।

ये बैंक अपने ग्राहकों की जानकारी किसी देश या एजेंसी से भी आसानी से साझा नहीं करते, जब तक कि ऐसा कोई व्यक्ति किसी आपराधिक गतिविधि से संबंधित न हो। हालांकि वैश्विक स्तर पर बढ़ते आतंकवाद, भ्रष्टाचार तथा टैक्स चोरी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए अब स्विस बैंक ऐसे लोगों के खाते खोलने के आवेदनों को अस्वीकार करने लगे हैं, जिनका गैर-कानूनी कार्यों में लिप्त होने का संदेह हो किन्तु इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि स्विस बैंकिंग प्रणाली का इस्तेमाल काले धन को छुपाने के लिए आज भी किया जा रहा है।

स्विस बैंकों में भारतीयों का पैसा

हाल ही में स्विस केन्द्रीय बैंक द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2020 में भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में जमा धन 13 साल में सबसे अधिक 2.55 अरब स्विस फ्रैंक या 20,700 करोड़ रुपए के उच्चतम स्तर पर पहुँच चुका है। काले धन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए 2014 में सत्ता में आई मोदी सरकार के लिए यह एक बहुत बड़ी चुनौती है। साल 2019 के अंत में स्विस बैंकों में भारतीयों का पैसा 6,625 करोड़ रुपए था। पिछले दो सालों में इसमें गिरावट देखी गई थी, जबकि साल 2020 में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी हुई है।

हालाँकि सरकार ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि इन आँकड़ों से इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकती कि स्विस बैंकों में जमा भारतीयों का पैसा कालाधन है। इसके अतिरिक्त आँकड़ों में उन भारतीयों, एनआरआई या फिर फ़र्म का उल्लेख भी नहीं है, जिन्होंने किसी तीसरे देश के नाम पर धन जमा किया है। वित्त मंत्रालय ने स्विस बैंकों में भारतीयों के बढ़ते धन के पीछे का मुख्य कारण इन बैंकों द्वारा, भारतीय कंपनियों के व्यापारिक लेन देन को बताया है।

मनी लॉन्ड्रिंग के सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव

यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि मनी लॉन्ड्रिंग देश तथा वैश्विक स्तर पर कितना खतरनाक है। इसे अनियंत्रित छोड़ना अथवा इससे अप्रभावी रूप से निपटना समाज के लिए गंभीर है। मनी लॉन्ड्रिंग से संगठित अपराधों जैसे मानव तस्करी, आतंकवाद, अवैध ड्रग तस्करी, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी आदि को प्रोत्साहन मिलता है। इसके अतिरिक्त वित्तीय संस्थानों में घुसपैठ, निवेश के माध्यम से अर्थव्यवस्था के बड़े क्षेत्रों पर नियंत्रण हासिल करना आदि इसके आर्थिक नुकसान हैं।

आपराधिक संगठनों का आर्थिक और राजनीतिक तंत्र में प्रवेश सामाजिक ताने-बाने, नैतिक मानकों और अंततः समाज की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को भी कमजोर करता है। सरकारी अधिकारियों तथा सरकारों को रिश्वत देकर सत्ता का दुरुपयोग एक अन्य खतरनाक स्थिति है। मैक्सिको, कोलंबिया, वेनेजुएला तथा कैरेबियन समेत कई अफ्रीकी देशों में ड्रग माफियाओं, भ्रष्टाचारियों का सरकारों में बढ़ता दखल इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।

सरल शब्दों में मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering in Hindi) अनेक ऐसी आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है, जिनसे अवैध धन उत्पन्न किया जा रहा है अतः यह आपराधिक गतिविधि को जारी रखने तथा ऐसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वैश्विक स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए कानून

वैश्विक स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के उद्देश्य से 1989 में फ्रांस के पेरिस शहर में G-7 देशों की बैठक हुई, जिसके परिणामस्वरूप एक अंतर-सरकरी निकाय फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की स्थापना की गई। पेरिस आधारित यह संस्था आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering in Hindi) तथा आपराधिक कार्यों के वित्तपोषण को रोकने के लिए विभिन्न सरकारों को आवश्यक दिशानिर्देश जारी करती है। भारत साल 2010 से इसका सदस्य है तथा इसकी नीतियों एवं निर्देशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह भी पढे : क्या है फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) तथा किस प्रकार यह आतंकवाद एवं आपराधिक गतिविधियों के वित्तपोषण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है?

इसके अतिरक्त क्षेत्रीय स्तर पर भी मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए अनेक संस्थाएं हैं। जिनमें Asia/Pacific Group on Money Laundering (APG), Council of Europe Committee of Experts on the Evaluation of Anti-Money Laundering Measures and the Financing of Terrorism (MONEYVAL), Eurasian Group (EAG), Eastern and Southern Africa Anti-Money Laundering Group (ESAAMLG) आदि प्रमुख हैं।

भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के संबंध में कानून

भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के निवारण हेतु धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 लाया गया है, जिसे PML या Prevention of Money Laundering Act, 2002 कहा जाता है। यह कानून 1 जुलाई 2005 से लागू हुआ जिसमें समय समय (2009, 2012, 2019) पर कई संशोधन भी किए गए हैं। इस कानून के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जाँच एजेंसी का कार्य सौंपा गया है।

कानून में दंड का प्रावधान

मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति अथवा संस्था पर निम्नलिखित कार्यवाही की जा सकती हैं।

(A) धारा 5 के अंतर्गत संपत्ति की कुर्की, धारा 17 या 18 के तहत संपत्ति का जब्तीकरण / रोक लगाना तथा रिकार्ड हासिल करना। PML, 2002 के अनुसार संपत्ति में, किसी भी प्रकार के अनुसूचित अपराध में इस्तेमाल की गई संपत्ति शामिल है।

(B) धन शोधन के आरोप में दोषी पाए गए व्यक्तियों को कम से कम तीन वर्ष के सश्रम कारावास का प्रावधान है, जो अपराध की गंभीरता देखते हुए 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त धारा 4 के तहत जुर्माना अथवा आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।

(C) यदि अनुसूचित अपराध स्वापक औषधि और मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (Narcotic Drugs & Psychotropic Substances Act 1985) के अंतर्गत आता है, तो इस स्थिति में न्यूनतम तीन वर्षों से अधिकतम 10 वर्षों तक के कठोर कारावास की सजा का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त अपराधी जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।

यह भी पढे : जानें क्या है प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अथवा FDI?

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