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Working of Air Conditioner (AC) explained in Hindi

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में जहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन कमाई तथा यात्रा एवं पर्यटन जैसे क्षेत्रों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं। आज इस लेख में हम समझेंगे हमारे घरों, दफ्तरों आदि में इस्तेमाल होने वाले एयर कंडीशनर या AC की कार्यप्रणाली (Working of Air Conditioner (AC) explained in Hindi) के बारे में।

AC के मुख्य भाग

AC की संरचना की बात करें तो इसके दो मुख्य भाग हैं। पहला इनडोर युनिट अर्थात जिसे घर के अंदर लगाया जाता है तथा दूसरा आउट डोर युनिट जिसे घर के बाहर लगाया जाता है। ये दोनों भाग एक पाइप द्वारा आपस में जुड़े होते हैं। आइये अब इन दोनों भागों की आंतरिक संरचना को देखते हैं। बाहर लगे भाग में एक संघनित्र (Condenser), संघनित्र पंखा, संपीडक (Compressor) तथा एक्सपेंशन वाल्ब लगा होता है जबकि आंतरिक भाग में एक इवेपोरेटर और एक ब्लोअर पंखा होता है। इसी इवेपोरेटर के माध्यम से कमरे की ऊष्मा का आदान प्रदान होता है।

air conditioner outdoor and indoor unit
Air Conditioner Outdoor and Indoor Unit

कार्यप्रणाली

ऊष्मा का प्रवाह आधिक्य से कम की ओर अर्थात गर्म से ठंडे की ओर होता है। यही कारण है कि कप में रखी हमारी कॉफी कुछ समय बाद ठंडी हो जाती है। AC में भी इसी कार्यप्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। AC के दोनों भागों को जोड़ने वाले पाइप के भीतर एक गैस भरी होती है जिसे रेफ्रीजरेंट कहा जाता है।

हमारे द्वारा AC ऑन करने पर सर्वप्रथम बाहरी भाग में लगा संपीडक (Compressor) पाइप में भरी गैस को आयतन कम करके संपीडित (Compress) कर देता है। आयतन कम करने से गैस के अणु पास पास आ जाते हैं तथा उनका तापमान बढ़ जाता है यह तापमान वातावरण के तापमान से अधिक होता है। अधिक ताप तथा दाब वाली यह गैस अगले चरण में कंडेंसर (Condenser) कॉइल में जाती है।

यहाँ मौजूद एक पंखा संघनित्र कॉइल के आस पास की गर्म गैस को बाहर फेंकता है तथा कंडेंसर कॉइल के भीतर गर्म गैस ठंडी होकर द्रव में परिवर्तित हो जाती है। द्रव अवस्था में परिवर्तित इस गैस का तापमान अब भी अधिक होता है।

AC के विभिन्न भाग / सौ. Aircon

अतिरिक्त ऊष्मा स्थानांतरित हो जाने के बाद कॉइल से मध्यम ताप तथा उच्च दाब वाला द्रव अगले चरण के लिए एक्सपेंशन वाल्ब में पहुँचता है। यहाँ इस द्रव को एक बहुत पतली ट्यूब से प्रवाहित कर इसका दाब कम किया जाता है जिसके फलस्वरूप द्रव अत्यधिक ठंडा (कमरे के तापमान से बहुत कम) हो जाता है। यह ठंडा द्रव घर के अंदर लगे भाग में मौजूद इवेपोरेटर की ओर बढ़ता है। यहाँ लगे एक ब्लोअर या पंखे की सहायता से इवेपोरेटर के आस पास की ठंडी हवा को बाहर की ओर फेंका जाता है तथा कमरे की गर्म हवा इवेपोरेटर की ओर प्रवाहित होती है परिणामस्वरूप हम ठंडक का अनुभव करते है।

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हमारे कमरे में नमी भी मौजूद होती है जो ठंडी इवेपोरेटर कॉइल के संपर्क में आने से संघनित हो जाती है और पानी में बदल जाती है इसे एक पाइप की सहायता से बाहर निकाल दिया जाता है। कमरे की ऊष्मा प्राप्त करने के बाद इवेपोरेटर कॉइल में उपस्थित ठंडा द्रव गर्म होकर पुनः गैस में बदल जाता है तथा संपीडक की तरफ बढ़ता है वहाँ से पुनः इस गैस को संपीडित कर उच्च ताप तथा दाब वाली गैस में बदल दिया जाता है। यह चक्र चलता रहता है जब तक कि AC कमरे के तापमान को उसे निर्देशित किये गए तापमान के बराबर न कर दे।

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उम्मीद है दोस्तो आपको ये लेख (Working of Air Conditioner (AC) explained in Hindi) पसंद आया होगा टिप्पणी कर अपने सुझाव अवश्य दें। अगर आप भविष्य में ऐसे ही रोचक तथ्यों के बारे में पढ़ते रहना चाहते हैं तो हमें सोशियल मीडिया में फॉलो करें तथा हमारा न्यूज़लैटर सब्सक्राइब करें एवं इस लेख को सोशियल मीडिया मंचों पर अपने मित्रों, सम्बन्धियों के साथ साझा करना न भूलें।

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2 COMMENTS

  1. हिंदी में ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने के लिए धन्यवाद। आशा करता हूँ कि इस मंच पर मुझे बहुत सीखने को मिलेगा।

    • अवश्य सतीश जी। हमारी कोशिश रहेगी कि पाठकों को सरल शब्दों में अधिक से अधिक सूचनाएं उपलब्ध करा सकें।

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