सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन क्या है (What is SEO) कितने प्रकार का होता है तथा कैसे किया जाता है?

इक्कीसवीं सदी में हम धीरे-धीरे डिजिटल दुनियाँ की ओर अग्रसर हैं। शिक्षा, चिकित्सा, बैंकिंग समेत लगभग सभी सुविधाएं आज ऑनलाइन माध्यम से हम तक पहुँच रही हैं। ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा के इस दौर में उपयोगकर्ताओं को चाहिए कि, उपयुक्त सेवाएं उन तक पहुँचे, और इस कार्य में डिजिटल मार्केटिंग एक अहम भूमिका अदा करती है। उदाहरण के तौर पर यदि आप कोई वेबसाइट, ऑनलाइन व्यवसाय अथवा YouTube चैनल चला रहे हैं तो आप चाहेंगे कि, आपका कॉन्टेंट, सेवाएं एवं उत्पाद अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके।

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नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में जहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था तथा यात्रा एवं पर्यटन जैसे अनेक क्षेत्रों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं। आज के लेख में हम जानेंगे डिजिटल मार्केटिंग की दुनियाँ के एक महत्वपूर्ण विषय SEO या सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बारे में समझेंगे SEO क्या होता है (What is SEO) यह क्यों आवश्यक है तथा किस प्रकार किया जाता है।

क्या है सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन या SEO?

प्रतिदिन इंटरनेट पर लगभग 5 मिलियन ब्लॉग पोस्ट किये जाते हैं, किन्तु जब आप किसी सर्च इंजन जैसे गूगल में किसी विषय को खोजते हैं तो आपके सामने कुछ चुनिंदा वेबसाइट परिणामों के रूप में निकलकर आती हैं, जिन्हें हम SERPs या सर्च इंजन रिजल्ट पेज कहते हैं। कोई सर्च इंजन एक ही विषय से सम्बंधित हज़ारों अलग-अलग वेबपेज होने के बावजूद यह कैसे तय करता है कि, कौन सी वेबसाइट पहले नम्बर पर अथवा किन वेबसाइट्स को पहले पेज पर दिखाया जाए?

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यह तय करने के लिए सर्च इंजन कई अलग-अलग मानकों का प्रयोग करता है तथा हमारे सामने उसके अनुसार जो सर्वाधिक उर्पयुक्त परिणाम होते हैं उन्हें प्रदर्शित करता है। जिन मापदंडों को ध्यान में रखते हुए कोई सर्च इंजन आपके सामने परिणामों को लेकर आता है उन्हीं मापदंडों के अनुरूप अपने डिजिटल कॉन्टेंट को तैयार करना सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (Search Engine Optimization) कहलाता है।

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दूसरे शब्दों में सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा आप ऑर्गेनिक ट्रैफिक अपनी वेबसाइट तक लेकर आते हैं। ट्रैफिक से आशय यूजर्स से है, जो आपकी वेबसाइट पर विजिट करते हैं। आप सामान्यतः दो तरीकों से अपनी वेबसाइट में ट्रैफिक ला सकते हैं पहला पेड ट्रैफिक, जिसमें आप अपनी वेबसाइट का प्रचार Facebook, Twitter, Google AdWords आदि माध्यमों से कुछ भुगतान करके करते हैं, जबकि दूसरा तरीका है ऑर्गेनिक ट्रैफिक, इसमें गूगल उन मापदंडों का प्रयोग कर परिणाम दिखाता है, जिनकी चर्चा हम आगे करेंगे।

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) के प्रकार

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन मुख्यतः तीन प्रकार से किया जा सकता है।

  1. व्हाइट हैट SEO
  2. ब्लैक हैट SEO
  3. ग्रे हैट SEO

White Hat SEO

चूँकि आप वेबसाइट के माध्यम से लोगों तक अपने उत्पाद पहुँचाना चाहते हैं, अतः आप यह चाहेंगे कि, अधिक से अधिक लोग उस वेबसाइट को देखें, ताकि आपके उत्पाद या आपका कॉन्टेंट अधिक लोगों तक पहुँचे। जैसा कि, नाम से स्प्ष्ट है व्हाइट हैट SEO वैध तरीके से अपनी वेबसाइट को सर्च परिणामों में लेकर आने अथवा वेबसाइट की रैंक सुधारने को संदर्भित करता है। व्हाइट हैट सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन दो चरणों में कार्य करता है।

  • ऑन पेज
  • ऑफ पेज

ऑन पेज SEO

ऑन पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) में हम मुख्यतः वेबसाइट के आंतरिक कारकों पर केंद्रित होते हैं, जैसे वेबसाइट का स्ट्रक्चर, वेबसाइट का कॉन्टेन्ट, उसकी स्पीड, यूजर एक्सपीरियंस इत्यादि। इसके कई अलग-अलग प्रकार हैं, जिन्हें वेबसाइट में लागू कर उसकी रैंक को सुधारा जा सकता है।

अच्छी गुणवत्ता की सामग्री

सर्च इंजन आपकी वेबसाइट को शुरुआती परिणामों में प्रदर्शित करे इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है वेबसाइट की सामग्री या कॉन्टेन्ट। यदि आपके पास अच्छी सामग्री है, जो लोगों के लिए किसी भी तरीके से उपयोगी हो सकती है तभी सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) जैसे टूल्स आपके लिए आवश्यक हैं। SEO केवल लोगों को किसी वेबसाइट तक पहुँचने में सहायता करता है अंततः वेबसाइट की लोकप्रियता उसके कॉन्टेन्ट पर ही निर्भर करती है।

कीवर्ड्स

जिस विषय पर आप कॉन्टेन्ट लिखना चाहते हैं उससे संबंधित महत्वपूर्ण शब्दों या कीवर्ड्स को इंटरनेट पर खोजें। यह शोध करें कि, आपके कॉन्टेन्ट से संबंधित कौन से शब्द अधिक खोजे जाते हैं तथा कम प्रतिस्पर्धी हैं। ऐसे शब्दों का प्रयोग अपने कॉन्टेन्ट में करें किन्तु यह ध्यान रखें कि, कीवर्ड्स का प्रयोग अनावश्यक न हो।

वेबपेज का शीर्षक

किसी वेबपेज के शीर्षक का भी उसकी अच्छी रैंक में महत्वपूर्ण योगदान है। सर्च इंजन किसी वेबपेज की पहचान उसके शीर्षक से करता है अतः यदि आपने किसी विषय पर बहुत अच्छा लेख लिखा है, किंतु उसका शीर्षक आपके लेख से मेल नहीं खाता ऐसी स्थिति में सर्च परिणामों में आपके वेबपेज के आने की संभवनाएं बहुत कम हो जाती हैं।

वेबपेज का मैटा विवरण

जब आप गूगल में किसी विषय के बारे में खोजते हैं तो आपके सामने कुछ परिणाम निकल कर आते हैं, जिसमें अलग-अलग वेबपेजों का सुझाव दिया जाता है तथा प्रत्येक वेबपेज के बारे में कुछ आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, जिसे पढ़ के पाठक को यह तय करने में मदद मिलती है कि, किस वेबपेज पर क्लिक किया जाए।

कॉन्टेंट का फॉर्मेट

आप जो भी कॉन्टेन्ट लिखते हैं उसका सही फॉर्मेट में होना भी बहुत आवश्यक है। जैसे Title या शीर्षक को हमेशा h1 में लिखें, सब टाइटल या उप-शीर्षक को h2 में तथा मुख्य कंटेंट h3 में लिखें। h1 से h6 html में प्रयोग होने वाली विभिन्न हैडिंग को दर्शाता है।

यूआरएल (Uniform Resource Locator)

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की अगली कड़ी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है वेबपेज का यूआरएल या उस वेबपेज की लिंक, अपने वेबपेज के यूआरएल को हमेशा पोस्ट के अनुसार नाम दें, जिससे सर्च इंजन को आपके पेज को ढूंढने में आसानी हो। आपकी सुविधा के लिए इसे एक उदाहरण से समझते हैं माना आप हेल्थ तथा फिटनेस पर लेख लिख रहे हैं तब-

वेबपेज का यूआरएल कैसा हो – https://www.yourdomain.com/how-to-become-healthy

वेबपेज का यूआरएल कैसा न हो-  https://www.yourdomain.com/pt47dt6 

आंतरिक लिंक

अपनी पोस्ट में आंतरिक लिंक का इस्तेमाल अवश्य करें अर्थात किसी एक पेज से दूसरे पेज को लिंक करना, इससे सर्च इंजन को यह जानने में सहायता मिलती है कि, आपकी वेबसाइट में और भी वेबपेज उपलब्ध हैं इसके अलावा यदि पाठक आपके एक लेख को पढ़ने के बाद सीधे वापस जाने के बजाए किसी अन्य पेज में चला जाता है तो यह आपकी वेबसाइट की रैंक पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

लेख में टिप्पणी

आपकी पोस्ट में की गयी टिप्पणी या Comments भी आपकी वेबसाइट के ट्रैफिक को बढ़ाने अथवा उसकी रैंक को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सर्च इंजन ऐसी टिप्पणीयों को पढ़कर आपके पोस्ट से पाठकों के संतुष्ट होने अथवा न होने का अनुमान लगाता है तथा आपकी वेबसाइट को उसी अनुसार रैंक करता है। अतः अपने पाठकों को टिप्पणी करने के लिए प्रोत्साहित करें तथा प्रत्येक टिप्पणी का उत्तर भी अवश्य दें।

ऑफ पेज SEO

व्हाइट हैट SEO के दूसरे चरण में आता है ऑफ पेज SEO, जहाँ ऑन पेज SEO में हम अपनी वेबसाइट के अंदरूनी कारकों पर कार्य करते हैं वहीँ ऑफ पेज SEO में बाहरी कारकों पर कार्य किया जाता है। सरल शब्दों में ऑफ पेज SEO सर्च इंजन को यह बताता है कि, इंटरनेट पर अन्य वेबसाइट या सोशियल मीडिया प्लेटफॉर्म आपकी वेबसाइट के बारे में क्या सोचते हैं। आइये अब समझते हैं इसके कुछ प्रकारों को

एक्सटर्नल लिंक या बैकलिंक्स

ऑफ पेज SEO का मुख्य अंग है बाहरी लिंक या एक्सटर्नल लिंक, जिसमें कोई अन्य वेबसाइट अपने किसी लेख में आपकी वेबसाइट को लिंक करती है। आसान भाषा में समझें तो कोई अन्य वेबसाइट अपनी पोस्ट में आपकी वेबसाइट का सुझाव देती है। एक्सटर्नल लिंक का उपयोग निम्न तरीकों से किया जाता है।

सोशियल नेटवर्किंग

ऑफ पेज सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) में अगला कारक है सोशियल नेटवर्किंग, सर्च इंजन सोशियल मीडिया में आपकी वेबसाइट शेयर और लाइक्स की गिनती से भी आपकी वेबसाइट के अच्छे या खराब कॉन्टेन्ट का अनुमान लगाकर आपकी वेबसाइट को रैंक करता है।

बाउंस रेट

आपकी वेबसाइट की अच्छी रैंकिंग में बाउंस रेट की भी अहम भूमिका है। जैसा कि, नाम से स्प्ष्ट है, जब कोई विजिटर आपकी वेबसाइट को खोलता है तथा उसके कॉन्टेन्ट से असंतुष्ट होकर तुरंत आपकी वेबसाइट से बाहर आ जाता है तो उसे बाउंस बैक कहते हैं। कोई भी वेबसाइट विभिन्न पेजों से मिलकर बनी होती है अतः किसी वेबसाइट में कोई यूजर कितने पेजों को खोलता है इस आधार पर बाउंस रेट की गणना की जाती है।

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उदाहरण के लिए यदि कोई यूजर किसी वेबसाइट के केवल एक पेज पर विजिट करता है एवं इसके पश्चात वेबसाइट बंद कर देता है तो इस स्थिति में बाउंस रेट 100% होगा। बाउंस रेट के बढ़ने पर सर्च इंजन को यह लगने लगता है कि, लोग आपकी वेबसाइट में उपलब्ध सामग्री से संतुष्ट नहीं हैं तथा गूगल द्वारा आपकी वेबसाइट को दी गयी रैंक ठीक नहीं है।फलस्वरूप आपके वेबसाइट की रैंक गिरने लगती हैं, अतः आपको चाहिए कि अपनी वेबसाइट में ऐसा कॉन्टेन्ट डालें, जो लोगों को पसंद आए तथा आपकी वेबसाइट का बाउंस रेट कम हो सके।

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गौरतलब है कि, बाउंस रेट सभी प्रकार की वेबसाइट्स की रैंकिंग के लिए एक महत्वपूर्ण कारक नहीं है। गूगल के अनुसार यदि आपकी वेबसाइट की सफलता एक से अधिक पृष्ठ देखने वाले उपयोगकर्ताओं पर निर्भर करती है तो ऐसे में आपके लिए उच्च बाउंस रेट का होना नुकसानदायक है जैसे, समाचार लेख, शॉपिंग वेबसाइट आदि। दूसरी ओर यदि आपके पास ब्लॉग जैसी एकल-पृष्ठ साइट या अन्य प्रकार की सामग्री है, जिसके लिए एकल-पृष्ठ पर विजिट की ही अपेक्षा की जाती है, तो ऐसी स्थिति में उच्च बाउंस रेट बिल्कुल सामान्य है।

सुरक्षित वेबसाइट

लोगों के डेटा की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सर्च इंजन आपकी वेबसाइट लोगों के लिए सुरक्षित है या नहीं इस आधार पर भी वेबसाइट को रैंक करता है। सुरक्षा की दृष्टि से आपकी वेबसाइट का SSL सर्टिफाइड होना आवश्यक है। कोई SSL सर्टिफाइड है या नहीं इसकी पुष्टि https:// या उस वेबसाइट के बगल में बने ताले के निशान से हो जाएगी।

(What is SEO in Hindi)

Black Hat SEO

किसी वेबसाइट में अधिक ट्रैफिक आने का मतलब अच्छी कमाई से भी है अतः केवल अच्छा पैसा कमाने की चाह में कुछ लोग ऐसे तरीकों का उपयोग अपनी वेबसाइट में ट्रैफिक बढ़ाने के लिए करते हैं, जिनकी मंज़ूरी सर्च इंजन नहीं देता। यधपि ऐसी वेबसाइटों की पहचान होने पर उन्हें खोजे गए परिणामों से हटा दिया जाता है या प्रतिबंधित कर दिया जाता है तथापि लोग अवैध तरिकों का प्रयोग करते रहते हैं। जिन तरीकों का प्रयोग व्हाइट हैट SEO में किया जता ही उन्ही तरीकों का गलत प्रयोग ब्लैक हैट SEO में किया जाता है।

हिडन टैक्स्ट

आपने वाइट् हैट SEO में पढ़ा है कि, किसी विषय पर लिखे गए लेख में किन्हीं विशेष शब्दों या कीवर्ड्स का प्रयोग वेबसाइट की अच्छी रैंक के लिए कितना आवश्यक है इसी को ध्यान में रखते हुए लोग अवैध तरीके से ऐसे कीवर्ड्स का अधिक मात्रा में प्रयोग करते हैं ताकि उनकी वेबसाइट सर्च परिणामों में शीर्ष पर दिखाई दे।

यहाँ गौर करने की बात यह है कि, ऐसे लोग अपने वेबपेज को इस प्रकार बनाते हैं कि, अधिक मात्रा में जहाँ-तहाँ लिखे गए ऐसे कीवर्ड्स यूजर्स को नहीं दिखाई देते। जैसे यदि सफेद बैकग्राउंड में सफेद फॉन्ट कलर का इस्तेमाल किया जाए तो आप नहीं पढ़ पाएंगे कि वहाँ क्या लिखा गया हैं किंतु सर्च इंजन उसे आसानी से पढ़ पाते हैं तथा यह अनुमान लगाकर की उस वेबसाइट में अधिक मात्रा में प्रयोग किये कीवर्ड्स से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी है उसे अच्छी रैंक प्रदान करते हैं।

नकली सामग्री

वेबसाइट में ट्रैफिक बढ़ाने के लिए दूसरों का कॉन्टेन्ट चोरी करना एक आम बात है, इससे कुछ समय के लिए ऐसा करने वाले लोहोन की वेबसाइट्स में अच्छा कॉन्टेन्ट होने के चलते अधिक मात्रा में ट्रैफिक आता है तथा ऐसे लोग वेबसाइट में आने वाले ट्रैफिक का फायदा उठाकर विज्ञापनों के जरिये अच्छा पैसा कमा लेते हैं।

बॉट द्वारा टिप्पणी

आपकी वेबसाइट में लिखे गए ब्लॉग पर आपके पाठकों द्वारा की जाने वाली टिप्पणियों या कमैंट्स का महत्व हम ऊपर समझ चुके हैं। ब्लैक हैट SEO करने वाले लोग लोग किसी सॉफ्टवेयर की मदद से अपनी पोस्ट में सकारात्मक टिप्पणी करते हैं, जो सैकड़ों की संख्या में होती हैं इससे उनकी वेबसाइट की रैंक सुधारने में मदद मिलती है इसी के साथ ऐसे लोग अपने प्रतिस्पर्धियों की वेबसाइट में जाकर उनके वेबपेज पर नकारात्मक टिप्पणियाँ कर उनकी रैंक नीचे करने की कोशिश भी करते हैं।

लिंक मैन्युपुलेशन

यह भी ब्लैक हैट एसईओ का महत्वपूर्ण अंग है और शायद आपने कभी न कभी इसका अनुभव अवश्य किया होगा। इसमें गलत जानकारी देकर बार-बार किसी अन्य वेबसाइट पर रिडाइरेक्ट कर दिया जाता है। किसी डाउनलोडिंग वेबसाइट में डाउनलोड बटन पर क्लिक करने के पश्चात फ़ाइल डाउनलोड होने के बजाए किसी अन्य वेबसाइट पर रिडाइरेक्ट कर दिया जाना इस प्रकार के SEO का उदाहरण है।

Gray Hat SEO

जैसा कि, नाम से स्पष्ट है यह व्हाइट तथा ब्लैक हैट SEOs का मिश्रण है यहाँ अधिक मात्रा में व्हाइट हैट अथवा कुछ मात्रा में ब्लैक हैट SEO का उपयोग किया जाता है।

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