क्या है दिवालियापन कानून? (Insolvency and Bankruptcy Code in Hindi)

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नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में, जहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन कमाई तथा यात्रा एवं पर्यटन जैसे क्षेत्रों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं। हमनें पूर्व के एक लेख में गैर निष्पादित परिसमपत्ति या NPA के बारे में समझा था तथा उसके कारणों एवं किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए NPA के नुकसान को भी जाना था। आज इस लेख में हम बात करेंगें NPA जैसी समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा बनाए गए एक महत्वपूर्ण कानून IBC (Insolvency and Bankruptcy code in Hindi) के बारे में तथा देखेंगे कानून के विभिन्न प्रावधानों को।

इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC)

IBC एक संहिता अथवा कानून है, जिसके तहत किसी कंपनी या व्यक्ति द्वारा लिए गए ऋण को न चुका पाने दूसरे शब्दों में दिवालिया हो जाने की स्थिति में ऐसे व्यक्तियों या कंपनियों पर कार्यवाही की जा सकेगी। देश मे बढ़ते NPA से निपटने के लिए इस संहिता को लागू किया गया है।

दिवालियापन एवं बैंकरप्सी

जब कोई कंपनी या व्यक्ति अपनी उधारी को पूरा न कर पाए तो इस स्थिति में उसे दिवालिया कहा जाता है तथा दिवालियेपन के बाद होने वाली कानूनी प्रक्रिया, जिसके तहत ऐसी दिवालिया कंपनी या व्यक्ति की संपत्ति को जब्त कर लिए गए ऋण की भरपाई की जाती है बैंकरप्सी कहलाती है। IBC इसी प्रक्रिया के लिए नियम एवं कानूनों का एक दस्तावेज है।

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संहिता की विशेषताएं

यह संहिता कंपनी, साझेदारी फर्म, किसी व्यक्ति तथा केंद्र सरकार द्वारा बताई जाने वाली किसी संस्था पर लागू किया जाएगा तथा इस संहिता के अंतर्गत दिवालियेपन (Insolvency and Bankruptcy Code in Hindi) की प्रक्रिया को सामान्य स्थिति में 180 दिनों के भीतर पूरा करनें का प्रावधान है हालाँकि प्राधिकरण के फैसले को किसी न्यायालय में चुनौती दिए जाने पर न्याय में विलंब हो सकता है।

दिवालियेपन की प्रक्रिया ऋणदाता जैसे बैंकों द्वारा संबंधित प्राधिकरण (DRT या NCLT) में अपील के माध्यम से प्रारंभ की जाएगी। इसके बाद इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल ऋण की वसूली के संबंध में उपयुक्त उपाय सुझाएंगे और इन उपायों के आधार पर प्राधिकरण अपना फैसला देगा।

संहिता के अंग

संहिता के विभिन्न अंग हैं जो अपना अपना कार्य करेंगे।

Insolvency Professional Agencies (IPA)

यह संहिता के अंतर्गत निर्मित एक संस्था है। इसके तहत इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल कार्य करेंगे जो ऋणदाता को उसका कर्ज वसूलने हेतु उपयुक्त उपाय सुझाएंगे।

Information Utilities

यह ढांचा IPA को समस्या का निवारण करने के लिए आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध करवाएगा, ताकि IPA सम्बंधित ऋणदाता को उपयुक्त उपाय सुझा सकें।

Insolvency and Bankruptcy Board (IBB)

यह संहिता के अंतर्गत आने वाले विभिन्न अंगों के नियामक के रूप में कार्य करेगा अर्थात यह विभिन्न अंगों की सम्पूर्ण प्रक्रिया का नियमन करेगा। इस बोर्ड में रिजर्व बैंक तथा सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

प्राधिकरण

जैसा कि हमनें पूर्व में बताया IPA ऋणदाता को समस्या के निपटारे के लिए सिफारिशें देगा एवं IPA द्वारा दी गयी सिफारिशों के आधार पर ही Debt Recovery Tribunals (DRT) एवं National Company Law Tribunal (NCLT) द्वारा मामले का निपटान किया जाएगा। गौरतलब है कि DRT किसी व्यक्ति या सांझेदारी फर्म से संबंधित मामलों की सुनवाई करेगी, जबकि NCLT किसी कंपनी संबंधित मामलों का निपटारा करेगी।

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