परमाणु बम क्या है (Nuclear Bomb in Hindi) तथा किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में जहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन कमाई तथा यात्रा एवं पर्यटन जैसे अनेक क्षेत्रों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं। आज के इस लेख में हम चर्चा करेंगे परमाणु ऊर्जा तथा परमाणु बम के बारे में जानेंगे परमाणु बम किस सिद्धांत पर कार्य करते हैं? (How Does a Nuclear Bomb work in Hindi) तथा परमाणु ऊर्जा के क्या-क्या फायदे एवं नुकसान हैं।

परमाणु की संरचना

आपको ज्ञात होगा किसी वस्तु का परमाणु इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है, जहाँ प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन परमाणु के केंद्र, जिसे नाभिक कहा जाता है, में स्थित होते हैं तथा इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर अलग अलग कक्षाओं में नाभिक की परिक्रमा करते रहते हैं। आवेश की बात करें तो इलेक्ट्रॉन में ऋणावेश, प्रोटॉन में धनावेश तथा न्यूट्रॉन में कोई आवेश नहीं होता है।

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विद्युतचुम्बकत्व के अनुसार विपरीत आवेश एक दूसरे को आकर्षित, जबकि समान आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं इसके बावजूद नाभिक में सभी प्रोटॉन धनावेशित होते हुए एक साथ बंधे होते हैं, ये संभव हो पाता है उनमें लगने वाले मजबूत नाभिकिय बल के द्वारा, जो परमाणु के अंदर इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्रोटॉनों पर लगाए गए विधुयतचुम्बकीय बल की तुलना में अधिक होता है इसी कारण इलेक्ट्रॉन प्रोटॉनों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाते और कोई परमाणु स्थिर बना रहता है।

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अपवाद

भारी तत्वों जैसे यूरेनियम आदि में नाभिक का आकार बढ़ने के कारण प्रोटॉनों की संख्या भी अधिक हो जाती है, अतः इस स्थिति में विद्यतचुम्बकीय बल नाभिकीय बलों की तुलना में प्रबल होने लगते हैं अर्थात ये तत्व स्थिर अवस्था में नहीं रह पाते परिणामस्वरूप ऐसे तत्व समय के साथ विकिरण उतपन्न करते रहते हैं, जिसे रेडियोसक्रियता कहा जाता है और स्थिर नाभिक वाले तत्वों में बदल जाते हैं।

परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy)

जब ऐसे किसी भारी तत्व के परमाणु का नाभिक टूटकर दो या दो से अधिक अलग अलग तत्वों में बँट जाता है अथवा किन्हीं दो हल्के तत्वों के परमाणु मिलकर किसी नए तत्व को बनाते हैं तो दोनों ही स्थितियों में अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्सर्जित होती है, यही नाभिकीय या परमाणु ऊर्जा (Atomic Energy) है। इस ऊष्मा का उपयोग अलग-अलग कार्यों में किया जाता है मुख्यतः इस ऊष्मा द्वारा विद्युत का उत्पादन होता है। नाभिकीय ऊर्जा दो अलग अलग अभिक्रियाओं, जिनका हमने ऊपर जिक्र किया है से प्राप्त होती है आइये समझते हैं ये अभिक्रियाएँ किस प्रकार सम्पन्न होती हैं।

  • Nuclear Fusion (नाभिकीय संलयन)
  • Nuclear Fission (नाभिकीय विखंडन)

Nuclear Fission (नाभिकीय संलयन)

इस प्रक्रिया में दो हल्के नाभिक मिलकर एक नए नाभिक का निर्माण करते हैं। इसे हाइड्रोजन परमाणु के उदाहरण से समझते हैं। हाइड्रोजन परमाणु के तीन समस्थानिक होते हैं समस्थानिक अर्थात वे तत्व जिनका परमाणु क्रमांक तो एक ही होता है, किंतु परमाणु भार भिन्न होते हैं। हाइड्रोजन के दो समस्थानिक मिलकर एक हीलियम परमाणु का निर्माण करते हैं चूँकि हाइड्रोजन के दो समस्थानिकों का भार परिणामी हीलियम परमाणु से अधिक होता है अतः बचा हुआ द्रव्यमान ऊर्जा के रूप में परिवर्तित हो जाता है। इसे आइंस्टाइन के सूत्र e=mc2 द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। सूर्य एवं अन्य तारों द्वारा प्राप्त होने वाली ऊर्जा इसी अभिक्रिया का उदाहरण है।

नाभिकीय विखंडन

जैसा कि, नाम से स्पष्ट है नाभकीय विखंडन अर्थात जब एक भारी नाभिक टूटकर दो नए नाभिकों का निर्माण करता हैं। आइये इसे यूरेनियम के उदाहरण से समझते हैं। किसी भी तत्व को abX के रूप में दर्शाया जाता है, जहाँ X उस तत्व का सांकेतिक नाम, a परमाणु क्रमांक या परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा b परमाणु भार या परमाणु के नाभिक में स्थित प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन की संख्या होती है।

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इस प्रकार यूरेनियम को (23592U) के रूप में दर्शाया जाता है, जिसका परमाणु क्रमांक 92 तथा परमाणु भार 235 होता है। जब यूरेनियम के परमाणु में न्यूट्रॉनों की बौछार की जाती है, तब अतिरिक्त न्यूट्रॉन मिल जाने के कारण 235U, 236U में बदल जाता है, जो पूर्व की तुलना में कम स्थिर होता है। परिणामस्वरूप  236U  Kr (krypton) तथा Ba (barium) में बदल जाता है। इस अभिक्रिया में अत्यधिक ऊष्मा उत्सर्जित होती है। चूँकि Kr तथा Ba के अलावा 3 न्यूट्रॉन भी मुक्त होते हैं जो पुनः अन्य यूरेनियम परमाणुओं से टकराकर उन्हें विखंडित करते हैं और ऊर्जा मुक्त करते हैं इस प्रकार एक श्रंखला का निर्माण हो जाता है।

नाभिकीय विखंडन / सौ. Scienceopedia

परमाणु बम (Nuclear Bomb)

किन्हीं दो देशों के मध्य तनाव की स्थिति में अपने परमाणु हथियारों या परमाणु बम के बारे में अवश्य सुना होगा आइये समझते हैं ये कैसे कार्य करते हैं (How does a Nuclear bomb work), कोई भी परमाणु बम सामान्यतः नाभिकीय विखंडन के सिद्धांत पर कार्य करते हैं, जिसे हम ऊपर विस्तारपूर्वक समझा चुके हैं। नाभिकीय विखंडन द्वारा अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्सर्जित होती है, जो महाविनाश का कारण बनती है।

विश्व में अभी तक परमाणु हथियारों का प्रयोग केवल एक बार द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका द्वारा जापान के विरुद्ध किया गया था, जिसमें जापान के दो शहर हिरोशिमा तथा नागासाकी पूरी तरह तबाह हो गए, एक शोध के दौरान पाया गया कि, हमले के बाद शहर का तापमान लगभग 4,000 डिग्री सेंटीग्रेड था। अत्यधिक ऊष्मा के अतिरिक्त परमाणु हथियारों से अनेक हानिकारक विकिरण भी उत्सर्जित होती हैं, जिनसे कैंसर तथा अन्य त्वचा संबंधित बीमारियाँ उतपन्न हो सकती हैं। यही कारण है की किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियारों का प्रयोग न करने संबंधित कई संधियाँ राष्ट्र संघ द्वारा की गई हैं।

परमाणु ऊर्जा का अन्य उपयोग

आपने अक्सर नाभिकीय ऊर्जा संयंत्रों के बारे में सुना होगा, इसके द्वारा परमाणु ऊर्जा का प्रयोग कर विद्युत का उत्पादन किया जाता है। इसमें मुख्यतः नाभिकीय विखंडन का इस्तेमाल होता है तथा उत्पन्न ऊष्मा से एक बड़े बॉयलर में रखे पानी को गर्म किया जाता है, इससे उत्पन्न भाप द्वारा टरबाइन घुमाए जाते हैं परिणामस्वरूप बिजली का उत्पादन होता है।

नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र

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