कौन से हैं प्रकृति के मूलभूत कण (Fundamental Particles in Hindi)

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पदार्थ की संरचना

ब्रह्मांड का कोई भी पदार्थ कुछ मौलिक कणों (Fundamental Particles) से मिलकर बना है। प्रत्येक तत्व में इन्हीं मौलिक कणों की विशेष संरचना या व्यवस्था होती है, जिस कारण अलग-अलग तत्व अलग-अलग व्यवहार या गुण प्रदर्शित करते हैं। हम अक्सर किताबों में पढ़ते हैं कि, पदार्थ तीन मूलभूत कणों इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है।

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हालाँकि ये बहुत हद तक सही है, किंतु ये तीनों भी पदार्थ के मूलभूत कण नहीं है। तो कौन से हैं वो मूलभूत कण जो किसी पदार्थ का निर्माण करते हैं? इन कणों को समझने से पहले सामान्य तौर पर किसी पदार्थ के मूलभूत कण बोले जाने वाले इलेक्ट्रॉन,प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन के बारे में समझते हैं।

इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन

प्रत्येक तत्व जैसे कार्बन, नाइट्रोजन, कैल्शियम, लोहा, सोना आदि छोटे-छोटे परमाणुओं से मिलकर बना होता है। ये परमाणु पुनः उक्त तीन कणों (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन) से मिलकर बनते हैं। परमाणु की संरचना की बात करें तो इसके केंद्र में इसका नाभिक होता है, जो प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है वहीं इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर विभिन्न कक्षाओं में नाभिक की परिक्रमा करते रहते हैं।

नाभिक में स्थित प्रोटॉन धनावेशित होता है, जबकि न्यूट्रॉन में कोई आवेश नहीं होता वहीं नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित होते हैं। चूँकि दो विपरीत आवेश एक दूसरे को अपनी ओर आकर्षित करते हैं अतः नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते इलेक्ट्रॉन नाभिक में मौजूद प्रोटॉन द्वारा लगाए गए आकर्षण बल के कारण नाभिक से बंधे रहते हैं और कोई परमाणु स्थिर बना रहता है।

पदार्थ के मूलभूत कण (Fundamental Particles)

प्राचीन समय में वैज्ञानिकों ने बताया कि, किसी भी पदार्थ की इकाई परमाणु है अर्थात किसी पदार्थ के परमाणु को और विभाजित नहीं किया जा सकता। किन्तु समय के साथ इस विषय पर शोध हुई और वैज्ञानिकों ने बताया कि परमाणु भी पदार्थ की इकाई नहीं है इसे तीन मौलिक कणों, जिनका हमनें ऊपर जिक्र किया है में विभाजित किया जा सकता है अतः इन तीन कणों को किसी पदार्थ की इकाई समझा गया।

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1940 से 60 के मध्य इन कणों को अत्यधिक तापमान में त्वरित किया गया तो ये कण पुनः अन्य अलग अलग कणों में विभाजित हो गए, जिन्हें वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न श्रेणियों में रखा गया। इन कणों को ही पदार्थ की इकाई कहा गया। ब्रह्मांड में मौजूद इन कणों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिनमें पहली श्रेणी है फर्मिऑन तथा दूसरी श्रेणी बोसॉन है। ब्रह्मांड का समस्त द्रव्यमान फर्मिऑन श्रेणी में आने वाले कणों द्वारा बना है वहीं बोसॉन श्रेणी में आने वाले कण ब्रह्मांड में लगने वाले बलों के लिए ज़िम्मेदार हैं। आइये देखते हैं ये कण कौन से हैं।

पदार्थ के मूलभूत कण

फर्मिऑन

जैसा कि, हमनें बताया फर्मिऑन के अंतर्गत आने वाले कण ब्रह्मांड का समस्त द्रव्यमान का निर्माण करते हैं। इस श्रेणी में निम्नलिखित कण शामिल हैं।

  • क्वार्क
  • लेप्टॉन 

क्वार्क 6 प्रकार के होते हैं, जिनमें Up, Down, Charm, Strange, Top तथा Bottom शामिल हैं। ये क्वार्क आपस में मिलकर नए कणों का निर्माण करते हैं। जैसे परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉन दो अप तथा एक डाउन क्वार्क से मिलकर बना होता है, वहीं नाभिक में मौजूद न्यूट्रॉन एक अप तथा दो डाउन क्वार्क से मिलकर बना होता है। वहीं लेप्टॉन की बात करें तो इसके अंतर्गत भी 6 कण आते हैं जिनमें इलेक्ट्रॉन, म्यूऑन, टाऊ, तथा इलेक्ट्रॉन न्यूट्रिनो, म्यूऑन न्यूट्रिनो और टाऊ न्यूट्रिनो शामिल हैं।

बोसॉन

आप जानते हैं किसी चुंबक के दो ध्रुव होते हैं उत्तर एवं दक्षिण। किन्हीं दो चुम्बकों के समान ध्रुव एक दूसरे पर प्रतिकर्षण का बल लगाते हैं, जबकि विपरीत ध्रुव आकर्षण का बल। दो चुम्बकों के समान ध्रुवों को पास लाने पर वे एक दूसरे से दूर जाते हैं हालाँकि दोनों चुम्बक एक दूसरे के संपर्क में नहीं हैं अर्थात उनके मध्य हवा है फिर भी दोनों द्वारा लगाया गया प्रतिकर्षण बल आप महसूस कर सकते हैं। अब सवाल उठता है किस प्रकार किसी चुम्बक को यह पता चल पाता है कि, उसके किसी ध्रुव विशेष के पास समान ध्रुव लाया जा रहा है?

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यह होता है बोसॉन कणों के द्वारा, जिस प्रकार फर्मिऑन कण ब्रह्मांड के समस्त द्रव्यमान के लिए ज़िम्मेदार हैं उसी प्रकार बोसॉन कण समस्त ब्रह्मांड में लगने वाले चार मौलिक बलों के लिए उत्तरदायी हैं। ये कण ही एक चुम्बक से दूसरे में सूचना का आदान-प्रदान करते हैं और आवश्यक बल आरोपित होता है। यही स्थिति दो आवेशित कणों के मध्य भी होती है। अलग-अलग बल के लिए अलग अलग बोसॉन कण उत्तरदायी होते हैं, जिन्हें नीचे बताया गया है।

  1. फोटॉन : विद्युतचुम्बकीय बालों के लिए
  2. ग्लुओंन : प्रबल नाभिकीय बलों के लिए
  3. W तथा Z बोसॉन : कमज़ोर नाभिकीय बलों के लिए

ग्रेवीटॉन

चूँकि अन्य तीन बल किसी कण द्वारा नियंत्रित किये जाते हैं उसी प्रकार गुरुत्वाकर्षण बल के लिए भी कोई कण अवश्य होना चाहिए। इसी अवधारणा के चलते एक कण ग्रेवीटॉन की कल्पना की गई है, जो गुरुत्वाकर्षण बाल के लिए जिम्मेदार हो। हालाँकि ऐसा कोई कण अभी तक ज्ञात नहीं है।

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