Lumpy Virus: लम्पी वायरस से हुई 60,000 से अधिक पशुओं की मौत जानें इसके लक्षण, कारण एवं इससे बचाव के तरीके

देशभर में लम्पी वायरस का कहर जारी है गुजरात, राजस्थान, हरियाणा समेत देश के लगभग 12 से अधिक राज्यों में कई मवेशी गाँठदार त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease) से संक्रमित हुए हैं। भारत देश समेत कई देशों में यह बीमारी अभी तक अनेक दुधारू जानवरों मुख्य रूप से गायों की जान ले चुकी है। यह जानवरों में पायी जाने वाली एक जानलेवा बीमारी है। ‘गाँठदार त्वचा रोग (LSD), लम्पी स्किन डिज़ीज़ वायरस (LSDV) के संक्रमण के कारण होता है।

गाँठदार त्वचा रोग’ को पहली बार वर्ष 1929 में जाम्बिया में एक महामारी के रूप में देखा गया था। प्रारंभ में इसे कीड़े के काटने से होने वाला रोग माना जाता था। यह एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित पशु के संपर्क में आने से अन्य स्वस्थ पशु को भी हो जाता है।

‘गाँठदार त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease- LSD) को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन ने अधिसूचित बीमारी घोषित की है। वर्तमान में इस गंभीर बीमारी का कोई इलाज संभव नहीं है, किन्तु लक्षणों के आधार पर ही जानवरों का उपचार किया जा रहा है।

गाँठदार त्वचा रोग मुख्य रूप से मच्छरों और मक्खियों के काटने, कीड़ों (वैक्टर) के काटने से जानवरों में फैलता है। जैसा की पहले बताया गया है की यह एक संक्रामक बीमारी है इसी कारण यह संक्रामित पशुओं के सीधे संपर्क में आने से भी फ़ैल सकती है जैसे दूषित खाने और पानी के सेवन करने इत्यादि से।

इन राज्यों में हुआ सबसे अधिक संक्रमण

भारत में LSD के शुरुआती मामले सितंबर 2020 में देखे गए, जब महाराष्ट्र में इस वायरस का एक स्ट्रेन खोजा गया था। इसके बाद से ये रोग धीरे-धीरे कई राज्यों के पशुओं को अपनी चपेट में ले चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस रोग द्वारा सबसे अधिक प्रभावित होने वाले राज्यों में राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर आदि शामिल हैं। राजस्थान में इससे तकरीबन 14,000 जबकि, गुजरात में 2800 पशुओं की मौत हो चुकी है।

‘गाँठदार त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease- LSD) से संक्रमित पशुओं के लक्षण

Lumpy Skin Disease से बचाव

गाँठदार त्वचा रोग के उपचार के लिये कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। उपलब्ध एकमात्र उपचार मवेशियों की सहायक देखभाल ही है। इसमें घाव देखभाल, स्प्रे का उपयोग करके त्वचा के घावों का उपचार और द्वितीयक त्वचा संक्रमण को रोकने के लिये एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग शामिल हो सकता है। इसके अलावा बचाव के तौर पर निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं।

क्या इंसानों को भी है खतरा?

World Organization for Animal Health (WOAH) के अनुसार, गाँठदार त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease) रोग जूनोटिक (Zoonotic) नहीं है, अतः यह वायरस जानवरों से मनुष्यों में नहीं फैलता है और मनुष्य इस वायरल संक्रमण की चपेट में आने से सुरक्षित हैं। गौरतलब है कि, जूनोटिक रोग ऐसे संक्रामक रोग होते हैं, जो जानवरों से इंसानों में तथा इंसानों से जानवरों में फैल सकते हैं।

विभिन्न सरकारों  द्वारा उठाये गए कदम

उत्तर प्रदेश सरकार ने पीलीभीत से इटावा तक लगभग 300 किलोमीटर लंबी इम्यून बेल्ट के जरिए लंपी वायरस को रोकने का प्लान तैयार किया है। पशुपालन विभाग द्वारा इसके लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, टास्क फोर्स लंपी वायरस से संक्रमित पशुओं की ट्रैकिंग और ट्रीटमेंट की जिम्मेदारी संभालेगी। संक्रमित पशुओं की कड़ी निगरानी रखने के साथ ही इन्हें इम्यून बेल्ट के भीतर ही रोकने की व्यवस्था होगी।

दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय के अनुसार, दिल्ली सरकार की तरफ से संक्रमित पशुओं के इलाज के लिए दो मोबाइल वैटरनिटी क्लीनिक मंगाए गए हैं साथ ही 11 रेपिड रिस्पॉन्स टीम भी इस समस्या से निपटने के लिए तैयार की गई हैं, इसके अतिरिक्त केजरीवाल सरकार 60,000 गोटपॉक्स टीका खरीदने की तैयारी में भी है। इसके लिए सरकार ने कंट्रोल रूम (8287848586) भी तैयार किया है।

पंजाब सरकार ने लंपी वायरस के बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। पंजाब की भगवंत मान सरकार ने लंपी वायरस के कारण बाहरी राज्यों से आने वाले पशुओं पर रोक लगा दी है, पंजाब सरकार के मंत्री भुल्लर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, राज्य में 50,000 से अधिक मवेशियों को गोटपॉक्स का टीका नि:शुल्क दिया जा चुका है।

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