की-बोर्ड (Keyboard in Hindi) क्या है एवं इसके कितने प्रकार हैं?

मानव के विकास की यात्रा में कम्युनिकेशन ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कम्युनिकेशन के कारण ही आदिमानव समूहों में कार्य कर सके तथा आग, पहिये जैसे आविष्कारों को अंजाम दे पाए। कम्युनिकेशन के मुख्यतः दो तरीके, जिनमें बोलना अथवा लिखना शामिल हैं मौजूद हैं। दोनों के लिए किसी लिपि अथवा संकेतों की आवश्यकता होती है। दुनियाँ में सर्वप्रथम लेखन (Keyboard in Hindi) के शुरुआत को देखें तो यह तकरीबन 3200 ईसा पूर्व ईरान में हुई।

दुनियाँ की सबसे पुरानी मानी जाने वाली लिपि Cuneiform, मेसोपोटामिया (वर्तमान इराक) में बनाई गई। नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका जानकारी जोन में, आज के इस लेख के माध्यम से हम चर्चा करने जा रहे हैं आधुनिक लेखन के ही एक महत्वपूर्ण उपकरण की-बोर्ड या कुंजीपटल की तथा इसके साथ ही नज़र डालेंगे इसके आधुनिक की-बोर्ड में बदलने की एतिहासिक यात्रा पर।

की-बोर्ड क्या है?

कीबोर्ड एक उपकरण है, जिसकी सहायता से लेखन या लिखने का कार्य किया जा सकता है, दूसरे शब्दों में यह एक युक्ति है, जो इससे सम्बद्ध किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को सूचना या डेटा इनपुट करने का कार्य करती है। जिस प्रकार सामान्य लेखन की क्रिया में कलम तथा किसी कागज की आवश्यकता होती है, वहीं डिजिटल रूप में लेखन के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की आवश्यकता होती है, जिसे की-बोर्ड या कुंजीपटल कहा जाता है।

कुंजीपटल किसी बोर्ड या पटल पर विभिन्न कुंजियों का एक समूह है। इन कुंजियों में अक्षरों, नंबरों, संकेतों आदि को दर्शाया जाता है। हालाँकि आज हम जिस आधुनिक की-बोर्ड (Keyboard in Hindi) का इस्तेमाल करते हैं यह इसका शुरुआती रूप नहीं था, इसके आविष्कार तथा विकास की यात्रा को हम लेख में आगे समझेंगे।

टाइपराइटर : की-बोर्ड का पूर्ववर्ती रूप

आधुनिक की-बोर्ड के वंशानुक्रम को देखें तो टाइपराइटर इसका शुरुआती रूप समझा जा सकता है। हालाँकि यह आधुनिक की-बोर्ड की भाँति कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं था, अतः यह केवल सामान्य लेखन के लिए ही इस्तेमाल होता था। टाइपराइटर के आविष्कार पर पूर्ण रूप से सहमति नहीं है। कुछ के अनुसार सन 1575 में प्रिंटिंग प्रेस में कार्य करने वाले एक इतालवी व्यक्ति Francesco Rampazetto द्वारा एक मशीन का निर्माण किया गया जो कागज पर अक्षरों को छाप सकती थी।

एक अन्य मत के अनुसार इसका आविष्कार 18वीं सदी के शुरुआती दौर लगभग 1714 में हुआ, जब एक अंग्रेज हेनरी मिल ने अक्षरों को लिखने वाली एक कृत्रिम मशीन के लिए पेटेंट दायर किया। साल 1802 में इटली के एक शख्स एगोस्टिनो फैंटोनी ने अपनी अंधी बहन के लिए एक खास टाइपराइटर डिजाइन किया। एक अन्य इतालवी व्यक्ति पेलेग्रिनो तुरी ने कार्बन पेपर का आविष्कार किया और वर्ष 1808 में अपने स्वयं के डिज़ाइन किए गए टाइपराइटर में इसका इस्तेमाल किया।

पहला व्यावसायिक टाइपराइटर हैनसेन राइटिंग बॉल था। Rasmus Malling-Hansen ने इसे 1865 में डिजाइन किया। यह पहली लेखन मशीन थी जिसमें तेजी से टाइप करने के लिए अक्षरों की व्यवस्था का प्रयोग किया गया था। वहीं व्यावसायिक रूप से पहले सफल टाइपराइटर की बात करें तो यह 1873 में क्रिस्टोफर लैथम शोल्स, फ्रैंक हेवन हॉल, कार्लोस ग्लिडेन और सैमुअल डब्ल्यू. सोल द्वारा डिजाइन किया गया। इसमें सर्वप्रथम QWERTY की-बोर्ड लेआउट का उपयोग किया गया था, जिसे हम आज भी देखते हैं।

टाइपराइटर / Keyboard in Hindi

टाइपराइटर की कार्यप्रणाली

टाइपराइटर एक ऐसी युक्ति है, जिसमें स्टील के बने बटनों के माध्यम से विभिन्न वर्णों अथवा अक्षरों को दर्शाया जाता है। मशीन में लगे एक रिबन जो स्याही से युक्त होता है, के नीचे लिखने हेतु कागज रखा जाता है तथा रिबन के ऊपर मौजूद बटन दबाए जाने के उपरांत रिबन से टकराकर कागज पर अपनी छाप छोड़ता है और वह वर्ण कागज पर छप जाता है। 20वीं शताब्दी में ये टाइपराइटर दफ्तरों, न्यायालयों, विश्वविद्यालयों आदि में इस्तेमाल किए जाते थे। हालाँकि कुछ स्तर पर इनका इस्तेमाल आज भी देखा जाता है किन्तु जैसे-जैसे दुनियाँ डिजिटलीकरण की ओर अग्रसर है इनका स्थान डिजिटल कंप्यूटर की-बोर्ड अथवा आधुनिक की-बोर्ड (Keyboard in Hindi) ने ले लिया है।

आधुनिक की-बोर्ड का इतिहास

कंप्यूटर की-बोर्ड के विकास को समझने के लिए, कंप्यूटर के विकास पर एक नज़र डालना आवश्यक है। 1946 में पहला कंप्यूटर ENIAC बनाया गया, जिसमें इनपुट के रूप में सूचना प्रदान करने के लिए Teletype मशीन का उपयोग किया जाता था। आज के कंप्यूटर की-बोर्ड से बहुत अलग, Teletype मशीन द्वारा किसी पंच कार्ड में छेद कर उसे कार्ड-रीडर में फीड किया जाता था।

पंच कार्ड एक पेपर कार्ड के समान था, जिसे कंप्यूटर डेटा अथवा निर्देशों को दर्शाने के लिए किसी मशीन द्वारा एक निश्चित पैटर्न में छिद्रित किया जाता था। इन कार्डों को कंप्यूटर से जुड़े कार्ड रीडर, जो इन कार्डों को पढ़ने में सक्षम थे, में फीड किया जाता था। इसके पश्चात कंप्यूटर कार्ड में किए गए छिद्रों के क्रम को डिजिटल डेटा में परिवर्तित कर पाता था।

साल 1954 में MIT में, शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर में सीधे की-बोर्ड (What is Keyboard in Hindi) इनपुट करने पर प्रयोग शुरू किया। 1964 में Bel Labs और MIT ने MULTICS कंप्यूटर विकसित किया, जो एक मल्टी-यूजर तथा वीडियो डिस्प्ले टर्मिनल (VDT) की सुविधा से लैस था। VDT की सहायता से सूचना टाइप करते ही स्क्रीन पर तुरंत दिखाई देती थी। इसनें डेटा इनपुट की पिछली Teletype विधि की तुलना में कंप्यूटरों पर कमांड, प्रोग्राम और नियंत्रण को और अधिक कुशल बना दिया।

1970 के दशक के अंत तक सभी कंप्यूटरों में VDT और इलेक्ट्रिक की-बोर्ड का उपयोग किया जाने लगा। यह पूर्व के पंच कार्डों की तुलना में कंप्यूटर के साथ बातचीत करने का सबसे उन्नत और सुविधाजनक तरीका था। 1981 में IBM ने अपना पहला PC जारी किया तथा 1986 में यह मॉडल M की-बोर्ड के साथ आना शुरू हुआ। यह कंप्यूटर की-बोर्ड आज के आधुनिक की-बोर्ड से बहुत मेल खाता था। मॉडल M बहुत सफल रहा क्योंकि इसका उपयोग करना पूर्ववर्ती की-बोर्ड की तुलना में बेहद आसान था।

मॉडल M एक मकैनिकल की-बोर्ड था तथा तीव्र प्रतिक्रिया एवं आराम की संतुष्टि के साथ, उच्चतम गुणवत्ता प्रदान करता था। इसके बाद समय के साथ की-बोर्ड एवं कंप्यूटर विकसित होने लगे तथा इनका वर्तमान रूप हमारे सामने है, जिनमें वायरलैस की-बोर्ड, वर्चुअल कीबोर्ड जैसे उदाहरण शामिल हैं।

Model M Keyboard in Hindi
IBM का मॉडल M कीबोर्ड / Keyboard in Hindi

की-बोर्ड का लेआउट के आधार पर वर्गीकरण

की-बोर्ड के अलग-अलग लेआउट अर्थात की-बोर्ड में अक्षरों की स्थिति, लेखन के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण होती है। चूँकि प्रत्येक देश की भाषा तथा लेखन अन्य से भिन्न है, अतः की-बोर्ड में किसी देश अथवा भाषा के आधार पर अधिक इस्तेमाल होने वाले अक्षरों को आसानी से उपयोग किए जा सकने वाले स्थान पर रखा जाता है। इसकी बनावट के आधार पर कीबोर्ड (Keyboard in Hindi) को कई प्रकारों में विभाजित किया गया है, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं।

QWERTY

QWERTY लेआउट या डिजाइन से हम सभी वाकिफ हैं, इसकी शुरुआत 19वीं सदी में हुई। लैटिन-आधारित वर्णमाला का उपयोग करने वाले देशों में यह की-बोर्ड मानक कंप्यूटर की-बोर्ड के रूप में इस्तेमाल होता है। इस कीबोर्ड की ऊपरी पंक्ति पर पहले छः अक्षर “Q W E R T Y” होते हैं, जो इसके QWERTY नाम को संदर्भित करते हैं। यह व्यवस्था क्रिस्टोफर लैथम शोल्स द्वारा तैयार की गई थी, जिनका “टाइपराइटर” 1874 में बड़े पैमाने पर उत्पादित किया गया। उस दौर से वर्तमान तक का यह सबसे सर्वव्यापी कीबोर्ड इंटरफ़ेस बना हुआ है।

AZERTY

AZERTY कीबोर्ड फ्रांस तथा बेल्जियम में मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है। चूँकि ये देश गैर-अंग्रेज़ी भाषी हैं, जिस कारण यहाँ अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले वर्ण भिन्न होते हैं। AZERTY कीबोर्ड में भी QWERTY की भाँति ये अक्षर कीपैड के ऊपरी बाएँ कोने पर लगातार क्रम में पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त इसी प्रकार का एक अन्य लेआउट QWERTZ है, जिसे जर्मनी में इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ Z का इस्तेमाल Y की तुलना में अधिक किया जाता है।

Colemak

Colemak को अंग्रेजी में कुशल और Ergonomic टाइपिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस लेआउट को 2006 में शाई कोलमैन द्वारा बनाया था। इसमें होम पंक्ति पर सबसे अधिक बार आने वाले अक्षरों को रखा जाता है। Mac OS, Linux, एंड्रॉइड जैसे कई प्रमुख आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम Colemak लेआउट को सपोर्ट करते हैं।

Dvorak

Dvorak लेआउट सन 1936 में अगस्त ड्वोरक और विलियम डेली द्वारा पेटेंट कराया गया। यह अंग्रेजी के लिए एक कीबोर्ड लेआउट है। ड्वोरक इस्तेमाल करने वाले लोगों का दावा है कि इसके लिए कम गति की आवश्यकता होती है परिणामस्वरूप त्रुटियों की संभावना भी कम रहती है। ड्वोरक लेआउट में होम पंक्ति के दाईं ओर सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले व्यंजन होते हैं, जबकि होम पंक्ति के बाईं ओर स्वर होते हैं।

Workman

Workman लेआउट को प्रोग्रामिंग के लिहाज से कोलमैक तथा ड्वोरक की तुलना में अधिक सुविधाजनक माना जाता है। यह क्षैतिज उंगली के खिंचाव को 63% तक कम करता है। इसमें सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली कुंजियाँ उंगलियों की गति की सीमा के अंदर समान और सुखद रूप से वितरित की जाती हैं।

तकनीक के आधार पर वर्गीकरण

तकनीक के आधार पर भी कीबोर्ड को दो प्रकारों तार युक्त अथवा तार रहित में बाँटा जा सकता है। वर्तमान समय में कार्य कुशलता तथा सुविधा को देखते हुए अधिकांश उपकरण वायरलैस सुविधा युक्त बनाए जा रहें हैं। ये उपकरण ब्लूटूथ, वाई-फ़ाई, आदि की सहायता से मुख्य उपकरण से जुड़े रहते हैं। जहाँ वायर्ड कीबोर्ड किसी कंप्यूटर से एक USB केबल के माध्यम से जुड़ा होता है, वहीं वायरलैस कीबोर्ड (Wireless Keyboard in Hindi) में कोई वायर मौजूद नहीं होती इसमें एक ट्रांसमिटर को कंप्यूटर में लगाया जाता है, जो किसी पेनड्राइव के आकार का होता है। इससे निकलने वाले सिग्नलों को प्राप्त कर कीबोर्ड कार्य करता है।

बनावट के आधार पर वर्गीकरण

कीबोर्ड को बनावट के आधार पर मुख्यतः दो भागों यथा मकैनिकल तथा मेम्ब्रेन कीबोर्ड में विभाजित किया जाता है।

Membrane Keyboard in Hindi

मेम्ब्रेन कीबोर्ड सामान्यतः इस्तेमाल किए जाने वाले कीबोर्ड हैं। लैपटॉप, मोबाइल, टेलीफोन, कैल्क्यूलेटर आदि में इसी कीबोर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार के कीबोर्ड में कुंजियाँ एक दूसरे से स्वतंत्र नहीं होती हैं, बल्कि ये इनके नीचे मौजूद एक पारदर्शी, मुलायम रबर मेम्ब्रेन द्वारा ढकी रहती हैं, जिस कारण इनमें बहुत कम गति होती है।

मेम्ब्रेन कीबोर्ड में 3 विभिन्न परतों का प्रयोग किया जाता है, जो बहुत लचीली होती हैं। पहली परत को शीर्ष झिल्ली या टॉप मेम्ब्रेन परत कहा जाता है। आखिरी परत के रूप में एक Conductive Trace होता है, जबकि पहली एवं तीसरी परत के मध्य में छिद्र होते हैं। जब किसी कुंजी को दबाया जाता है, तो यह रबर मेम्ब्रेन परत को नीचे धकेलती है, जो नीचे मौजूद परिपथ या सर्किट के साथ संपर्क बनाता है तथा कंप्यूटर को आवश्यक इनपुट प्राप्त होता है।

हालाँकि ये कीबोर्ड मकैनिकल कीबोर्ड की तुलना में कम कार्यकुशल हैं। इनका इस्तेमाल त्वरित अथवा पेशेवर टाइपिंग के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि इनमें त्रुटियों की संभावनाएं अधिक होती हैं। इसके बावजूद इन कीबोर्ड के कुछ फायदे भी हैं। ये लचीले तथा पोर्टेबल बनाए जा सकने में सक्षम होते हैं।

Keyboard in Hindi
Various Types of Keyboards in Hindi

Mechanical Keyboard in Hindi

किसी मेम्ब्रेन के विपरीत मकैनिकल कीबोर्ड टाइपिंग सिग्नल भेजने के लिए स्विच का उपयोग करते हैं। इनमें प्रत्येक बटन के नीचे स्प्रिंग मौजूद होती है। प्रत्येक कुंजी का अपना अलग स्विच होता है, जो एक आधार तथा स्प्रिंग के साथ आता है। चूँकि इसमें प्रत्येक कुंजी स्वतंत्र रूप से मौजूद होती है, अतः मकैनिकल कीबोर्ड उपयोगकर्ताओं को अपने कीबोर्ड को कस्टमाइज़ करने की सहूलियत देते हैं। मेम्ब्रेन कीबोर्ड की तुलना में ये अधिक मजबूत होते हैं, जो नियमित इस्तेमाल के बाद भी कई वर्षों तक चल सकते हैं। अधिक उन्नत होने के चलते ये मेम्ब्रेन कीबोर्ड से कई गुना तक महँगे भी होते हैं।

Ergonomic Keyboard in Hindi

हालाँकि ये कीबोर्ड ऊपर बताए गए किन्हीं दो प्रकारों में से ही एक होते हैं किन्तु इन्हें इस प्रकार से डिजाइन किया जाता है, कि इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर भी उपयोगकर्ता को असुविधा न हो। लगातार टाइपिंग, कोडिंग आदि करने वाले लोगों के लिए ये कीबोर्ड बेहतर हो सकता है।

कुंजियों की संख्या के आधार पर वर्गीकरण

कुंजियों की संख्या के आधार पर भी कीबोर्ड अलग अलग प्रकार के हो सकते हैं। किसी सामान्य कीबोर्ड में कुल 104 से 108 तक कुंजियाँ होती है, जो इस कीबोर्ड के आकार को बड़ा बनाती हैं। चूँकि वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को पोर्टेबल तथा कॉम्पैक्ट बनाने पर जोर दिया जा रहा है, अतः कई उपकरणों में फुल साइज़ कीबोर्ड नहीं लगाया जाता। आइए देखते हैं आकार के आधार पर इनके वर्गीकरण को।

Full-size : किसी फुल साइज़ कीबोर्ड में आम तौर पर सभी वर्णमाला कुंजियाँ शामिल होती हैं, जिन्हें QWERTY कॉन्फ़िगरेशन में व्यवस्थित किया जाता है। इसके अतिरिक्त इनमें फ़ंक्शन कुंजियाँ, मोडिफ़ायर कुंजियाँ दिशात्मक कुंजियाँ तथा कुंजियों के दाईं ओर स्थित एक नंबर पैड शामिल होता है।

Compact / 60% : 60% कीबोर्ड का एक सामान्य तथा “कॉम्पैक्ट” लेआउट है। 60 प्रतिशत कीबोर्ड में किसी मानक फुल साइज़ कीबोर्ड की केवल 60 प्रतिशत कुंजियाँ होती हैं। इसमें नंबर पैड, दिशात्मक कुंजियाँ तथा फ़ंक्शन कुंजियाँ नहीं होती। इसमें फ़ंक्शन कुंजियों को Fn कुंजी के साथ संबंधित नंबर कुंजी (जैसे Fn 1 = F1) दबाकर इस्तेमाल किया जा सकता है।

Tenkeyless : यह एक पूर्ण आकार का ही कीबोर्ड होता है, जिसमें केवल नंबर पैड मौजूद नहीं होता। हालांकि इनके अतिरिक्त भी कीबोर्ड को उनके आकारों अथवा मौजूद कुंजियों के अनुसार कई अन्य भागों जैसे 40% आदि में विभाजित किया जाता है।

Keyboard in Hindi
Various Size Keyboards in Hindi

कुछ मुख्य कुंजियों के उपयोग

यहाँ तक हमनें कीबोर्ड के इतिहास तथा विभिन्न प्रकारों को समझा। आइए अब एक नज़र डालते हैं आधुनिक कंप्यूटर कीबोर्ड में। इसमें सूचनाओं या डेटा को इनपुट करने के लिए विभिन्न प्रकार के बटन मौजूद होते हैं, जिन्हें अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। इन कीबोर्ड में सामान्य लेखन के अतिरिक्त अन्य बटन भी होते हैं, जिनका इस्तेमाल कंप्यूटर को तरह तरह के निर्देश देने में किया जाता है।

फंक्शन कुंजियाँ (Function Keys)

फंक्शन कुंजियाँ अथवा F-कुंजियाँ कीबोर्ड के सबसे ऊपरी भाग में होती हैं, जिन्हें F1 से F12 तक चिन्हित किया जाता है। ये कुंजियाँ ऑपरेटिंग सिस्टम या किसी प्रोग्राम द्वारा परिभाषित एक विशेष फ़ंक्शन वाली कुंजियाँ हैं। ये कंप्यूटर के विभिन्न फंक्शन का इस्तेमाल करने के लिए बनाई जाती हैं। उदाहरण के तौर पर F1 कुंजी किसी वेब ब्राउज़र या अन्य प्रोग्राम में सहायता टेब खोलने के लिए प्रयोग की जाती है, F3 कुंजी का इस्तेमाल सर्च विंडो खोलने के लिए किया जाता है, F5 कुंजी का प्रयोग वेब ब्राउज़र या कंप्यूटर को रिफ्रेश करने में किया जाता है।

कुछ छोटे कीबोर्ड, लैपटॉप आदि में, F-कुंजियों का कुछ अन्य समर्पित कार्य जैसे स्क्रीन या कीपैड की चमक, वॉल्यूम, पेज अप, पेज डाउन आदि नियंत्रित करना भी होता है। इन कीबोर्ड पर, एक Fn कुंजी होती है जिसे F-कुंजी के कार्य को करने के लिए प्रयोग कर सकते हैं।

अल्फाबेट कुंजियाँ (Alphabet Keys)

कीबोर्ड पर A से Z तक सभी 26 अक्षरों से संबंधित कुंजियाँ मौजूद होती हैं। हालाँकि ये कुंजियाँ वर्णानुक्रम (A, B, C, D…) में मौजूद नहीं होती। इन कुंजियों का उपयोग शब्दों, वाक्यों या अनुच्छेदों आदि को टाइप करने के लिए किया जाता है।

नंबर कुंजियाँ (Numeric Keys)

इन कुंजियों का उपयोग संख्याओं को लिखने के लिए किया जाता है। ये कुंजियाँ कीबोर्ड में शीर्ष पंक्ति पर मौजूद होती हैं तथा किसी फुल साइज़ कीबोर्ड के दाईं ओर भी मौजूद होती हैं। कीबोर्ड (Keyboard in Hindi) के शीर्ष में मौजूद नंबर कुंजियों में संख्याओं के अतिरिक्त कुछ चिन्ह (!,@,#,$,%,^…) भी होते हैं जिन्हें Shift Key के साथ इन नंबरों को दबाने पर प्राप्त किया जाता है।

संशोधक कुंजियाँ (Modifier Keys)

Modifier कुंजियाँ वे होती हैं जिन्हें केवल किसी अन्य कुंजी के साथ संयुक्त रूप से इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर कंट्रोल कुंजी, जिसका उपयोग अन्य कुंजियों के संयोजन में कई विशेष कार्यों को करने के लिए किया जाता है। इस कुंजी को आमतौर पर ‘Ctrl’ के रूप में दर्शाया जाता है, जो Control को संक्षिप्त रूप है। Alt कुंजी, जो Alternate का संक्षिप्त रूप है, यह कुंजी स्पेस बटन के दोनों ओर स्थित होती हैं। इसके अतिरिक्त अन्य Modifier कुंजियों में Shift, Command तथा Windows कुंजियाँ शामिल हैं।

दिशा कुंजियाँ (Direction Keys)

ये चार कुंजियों का एक समूह है, जिसमें दाएं, बाएं, ऊपर एवं नीचे की दिशा युक्त कुंजियाँ शामिल हैं। इन बटनों की सहायता से मॉनिटर पर स्थित कर्सर को किसी निश्चित स्थिति पर ले जाया जा सकता है।

कुछ अन्य कुंजियाँ

इसके अतिरिक्त कीबोर्ड में निम्नलिखित अन्य कुंजियाँ भी पाई जाती हैं, जिन्हें अकेले या किसी अन्य कुंजी के साथ इस्तेमाल करके किसी निश्चित कार्य को पूरा किया जा सकता है।

Backspace

Backspace कुंजी कीबोर्ड के ऊपरी दाएं भाग में मौजूद होती है। यह कर्सर की वर्तमान स्थिति से पहले मौजूद किसी भी वर्ण को मिटा सकती है तथा खोले गए किसी फ़ोल्डर से वापस आने में भी इसका प्रयोग होता है।

Caps Lock

यह कंप्यूटर कीबोर्ड पर बाई ओर स्थित होती है। इसका इस्तेमाल लेखन के दौरान बड़े अक्षरों (Uppercase Letters) का इस्तेमाल करने के उद्देश्य से किया जाता है। यह एक Toggle कुंजी है। Toggle कुंजी वह कुंजी है, जिसका उपयोग किसी फ़ंक्शन को चालू या बंद करने के लिए किया जाता है।

Delete Key

इसका इस्तेमाल किसी शब्द को मिटाने या किसी चयनित फ़ाइल जैसे कोई दस्तावेज, चित्र, संगीत आदि को मिटाने के लिए किया जाता है।

Enter Key

कंप्यूटर कीबोर्ड पर Enter तथा Return के लिए एक ही कुंजी का इस्तेमाल किया जाता है। Return कुंजी का इस्तेमाल लेखन के दौरान कर्सर को नई पंक्ति के शुरुआत में लाने के लिए किया जाता है। वहीं Enter कुंजी का प्रयोग किसी “प्रविष्टि” को समाप्त करने अथवा आवश्यक प्रक्रिया को शुरू करने के लिए होता है। इसे OK बटन के तौर पर समझा जा सकता है।

Escape Key

यह इसके संक्षिप्त रूप Esc के रूप में कीबोर्ड के ऊपरी-बाएँ कोने पर स्थित होती है। Esc कुंजी उपयोगकर्ता को कंप्यूटर पर चल रहे किसी ऑपरेशन को रोकने, प्रोग्राम को बंद करने आदि की सुविधा देती है। उदाहरण के लिए किसी वेब पेज को लोड होने से रोकना, किसी फुल स्क्रीन विंडो को बंद करना, पॉप-अप विंडो या किसी मैन्यू को बंद करना आदि।

Num Lock

यह कुंजी किसी फुल साइज़ कीबोर्ड में पाई जाती है, जिसमें नंबरपैड मौजूद होता है। जैसा की इसके नाम से स्पष्ट है इसका प्रयोग नंबर पैड को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से किया जाता है। जब Number Lock सक्रिय होता है, तो नंबर कुंजियों को दबाने से उन कुंजियों के वैकल्पिक कार्य सक्रिय हो जाते हैं। Caps Lock की भाँति यह भी एक Toggle कुंजी है।

Space Bar

यह किसी कीबोर्ड (Keyboard in Hindi) में सबसे लंबी कुंजी होती है, जो एक संकरी पट्टी के रूप में कीबोर्ड के निचले हिस्से में स्थित होती है। इसका प्रयोग लेखन के दौरान शब्दों के मध्य जगह या स्पेस बनाने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसका इस्तेमाल मीडिया प्लेयर में प्ले एवं पॉस बटन के रूप में भी होता है।

Tab Keys

Tab या Tabulator key टाइपराइटर के दिनों से ही कीबोर्ड का हिस्सा रही है। यह लैटिन शब्द “Tabulate” से बना है, जिसका अर्थ है तालिका में डेटा को व्यवस्थित करना। Tab कुंजी को उसमें प्रदर्शित दो विपरीत तीरों के माध्यम से पहचाना जा सकता है। इसके कार्यों की बात करें तो यह इस बात पर निर्भर करता है, की कौन सा प्रोग्राम खुला है अथवा कर्सर किस स्थान पर मौजूद है। उदाहरणतः Microsoft Word जैसे प्रोग्रामों में, टैब कुंजी दबाने से कर्सर एक निश्चित दूरी तक दाईं ओर खिसक जाता है। किसी वेबसाइट में टैब कुंजी द्वारा किसी यूआरएल का चयन करने उसे एक्सेस किया जा सकता है।

कुछ प्रमुख शॉर्टकट

कीबोर्ड में मौजूद कुछ कुंजियों को संयुक्त रूप से दबाने पर कंप्यूटर द्वारा किसी विशेष कार्य को सम्पन्न किया जा सकता है। संयुक्त रूप से इन कुंजियों को शॉर्टकट कहा जाता है। हालाँकि ये शॉर्टकट विभिन्न प्रकार के प्रोग्राम्स जैसे माइक्रोसॉफ्ट वर्ड, एक्सेल तथा विंडो आदि के लिए भिन्न हो सकते हैं। आइए देखते हैं कुछ महत्वपूर्ण शॉर्टकट जिनकी सहायता से किसी निश्चित टास्क को पूरा किया जा सकता है।

कंट्रोल कुंजी से संबंधित शॉर्टकट

Ctrl+A किसी पृष्ट में मौजूद सभी टेक्स्ट या अन्य ऑब्जेक्ट का चयन करने हेतु।

Ctrl+B चयन किए गए टेक्स्ट को बोल्ड करने के लिए।

Ctrl+C चयन किए गए टेक्स्ट को कॉपी करने के लिए।

Ctrl+D किसी वेब पेज को बुकमार्क करने हेतु।

Ctrl+E चयनित टेक्स्ट को सेंटर में लाने हेतु।

Ctrl+F सर्च विंडो खोलने हेतु।

Ctrl+I चयनित टेक्स्ट को इटैलिक फॉन्ट में परिवर्तित करने हेतु।

Ctrl+J वेब ब्राउज़र में डाउनलोड देखने हेतु।

Ctrl+N नया पेज अथवा डॉक्युमेंट बनाने हेतु

Ctrl+O किसी फ़ाइल को खोलने हेतु।

Ctrl+P किसी पेज के लिए प्रिन्ट विंडो खोलने हेतु।

Ctrl+R किसी वेब पेज को रिलोड करने के लिए।

Ctrl+S किसी दस्तावेज़ को कंप्यूटर में सेव करने के लिए।

Ctrl+T किसी ब्राउज़र में नया टेब खोलने हेतु।

Ctrl+U चयनित टेक्स्ट को अंडरलाइन करने के लिए।

Ctrl+V किसी कॉपी किए गए टेक्स्ट को पेस्ट करने के लिए।

Ctrl+W ब्राउज़र अथवा माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में किसी टेब को बंद करने हेतु

Ctrl+X किसी चयनित टेक्स्ट या ऑब्जेक्ट को काटने हेतु।

Ctrl+Y अन्डू किए गए किसी कार्य को पुनः करने के लिए।

Ctrl+End कर्सर को किसी दस्तावेज़ के अंत तक ले जाने के लिए।

Ctrl+Z किसी किए गए टास्क को अन्डू करने के लिए।

Ctrl+Esc विंडो स्टार्ट मैन्यू खोलने के लिए।

Ctrl+Tab ब्राउज़र में खोले गए विभिन्न टेब्स को स्विच करने के लिए।

Ctrl+Insert चयनित टेक्स्ट को कॉपी करने के लिए

Ctrl+Delete अगले शब्द को मिटाने के लिए

Ctrl+←Backspace पिछले शब्द को मिटाने के लिए

Ctrl+⇧ Shift+Esc टास्क मेनेजर खोलने के लिए

Ctrl+Alt+Del रीबूट अथवा टास्क मेनेजर खोलने के लिए।

अन्य शॉर्टकट

Shift + delete चयनित फ़ाइल को पूर्ण रूप से डिलीट करने हेतु

Shift + Ins पेस्ट करने के लिये

Alt + Esc Taskbar के Applications को Switch करनें के लिये

Alt + F4 Current Open Program अथवा सिस्टम को Close करनें के लिये

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