Chandrayaan 3 Live Update: अब बस कुछ घंटों का इंतजार बाकी, चंद्रमा पर लैंडिंग करने को तैयार है चंद्रयान-3

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Chandrayaan 3 Live Update: भारत द्वारा चंद्रमा पर भेजा गया मिशन चंद्रयान-3 (Chandrayaan 3) कई दिनों के सफर के बाद अब बस कुछ ही घंटों में चंद्रमा पर अपनी लैंडिंग करने वाला है, भारत समेत दुनियाँ भर की नजरें भारत के चंद्रयान-3 मिशन पर टिकी हुई हैं और सभी Chandrayaan 3 के चंद्रमा की सतह पर सफलता पूर्वक उतरने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

 बीते 18 अगस्त को चंद्रयान-3 का Lander Module डी-बूस्टिंग के बाद अपनी कक्षा कम करते हुए 113 km x 157 km के ऑर्बिट में आ गया था लेकिन ISRO द्वारा दिए गए Latest Update के अनुसार आज सुबह करीब 1:50 बजे लैंडर मॉड्यूल की डी-बूस्टिंग के दूसरे और अंतिम चरण को सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया है और Lander Module कक्षा को 25 किमी x 134 किमी तक कम कर दिया गया है। इसरो द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार लैंडर मॉड्यूल को अब आंतरिक जांच से गुजरना होगा और लैंडिंग के लिए निर्दिष्ट लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय का इंतजार करना होगा।

Landing में बस इतने घंटों का इंतजार

गौरतलब है कि, भारत का Chandrayaan-3 आने वाली 23 अगस्त को शाम 17:45 बजे चंद्रमा की सतह पर अपनी सॉफ्ट लैंडिंग करने जा रहा है जिसमें अब सिर्फ 80 घंटे 45 मिनट का समय बच गया है, चंद्रमा पर सफल लैंडिंग के बाद भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा इससे पहले केवल अमेरिका, रूस और चीन ही ऐसा करने में सफल रहे हैं।

भारत का यह चंद्र मिशन अन्य देशों द्वारा किये गए मिशनों से बहुत हद तक खास है और यही कारण है कि भारत समेत पूरी दुनियाँ की निगाहें इस मिशन पर हैं। बता दें कि, भारत का चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड होने जा रहा है जहाँ अभी तक किसी भी देश का कोई मिशन नहीं पहुंचा है अतः चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग के बाद भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना कोई यान भेजने वाला पहला देश बन जाएगा।

चंद्रयान ने भेजी पहली की तस्वीर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO चंद्रयान-3 के संबंध में लगातार जानकारी साझा कर रहा है, बीती 17 अगस्त को चंद्रयान-3 के दो अहम हिस्से Lander Module तथा Propulsion Module एक दूसरे से सफलता पूर्वक अलग हो गए थे जिसके बाद लैंडर मॉड्यूल में लगे Lander Imager (LI) Camera-1 कैमरे द्वारा चंद्रयान ने Propulsion Module तथा चंद्रमा की सतह की कुछ तस्वीरें जारी करी।

चंद्रमा की सतह पर उतरकर चंद्रायान करेगा ये काम

चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल में लैंडर विक्रम तथा रोवर प्रज्ञान मौजूद हैं, लैंडर विक्रम का काम जैसा कि, इसके नाम से पता चलता है चंद्रयान को सफलता पूर्वक चंद्रमा की सतह पर लैंड कराना है, चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान की सफल लैंडिंग के बाद लैंडर मॉड्यूल से रोवर प्रज्ञान बाहर निकलेगा और चंद्रमा की सतह पर विभिन्न शोध कार्यों को पूरा करेगा और जरूरी डेटा लैंडर मॉड्यूल तक भेजेगा जिसके बाद मॉड्यूल से ये डेटा ISRO के ग्राउंड स्टेशन तक पहुंचाया जाएगा।

इसके साथ ही चंद्रयान के लैंडर मॉड्यूल में भी कई तरह के सेंसर लगाए गए हैं जो विभिन्न शोध कार्यों को पूरा करेंगे। इसरो के अनुसार चंद्रयान-3 का मुख्य उद्देश्य चंद्रयान को सुरक्षित और सफलता पूर्वक चंद्रमा की सतह पर लैंड करना, रोवर प्रज्ञान के चंद्रमा की सतह पर भ्रमण का प्रदर्शन करना और रोवर की सहायता से विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोगों को संपादित करना शामिल है।

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चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल में विभिन्न वैज्ञानिक शोध कार्यों को करने के लिए कई आधुनिक उपकरणों को जोड़ा गया है जिनमें लेजर और आरएफ आधारित अल्टीमीटर, लेजर डॉपलर वेलोसीमीटर और लैंडर हॉरिजॉन्टल वेलोसिटी कैमरा, 800N थ्रॉटलेबल लिक्विड इंजन, 58N एटिट्यूड थ्रस्टर्स और थ्रॉटलेबल इंजन कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक्स, खतरे का पता लगाने और बचाव करने के लिए कैमरा और प्रसंस्करण एल्गोरिथम, नौवहन प्रणाली आदि शामिल हैं।

केवल एक दिन का होगा मिशन

आपको बता दें कि, चंद्रयान-3 के मिशन का जीवनकाल केवल एक चंद्र दिन अर्थात पृथ्वी के करीब 14 दिनों का होगा, इस अवधि के दौरान ही चंद्रयान-3 विभिन्न वैज्ञानिक शोध कार्यों को पूरा करेगा और चंद्रमा के बारे में हमारी समझ को विकसित करने में मदद करेगा, चंद्रयान की लैंडिंग साइट की बात करें तो यह तकरीबन 4 किमी x 2.4 किमी की होगी।

चंद्रयान-3 द्वारा किये जाने वाले शोध कार्यों की बात करें तो इनमें लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान द्वारा भिन्न-भिन्न शोध कार्यों को पूरा किया जाएगा। लैंडर मॉड्यूल की बात करें तो इसमें लगे सेंसर चंद्रमा की सतह पर प्लाज्मा (आयन और इलेक्ट्रॉन) घनत्व और समय के साथ इसके परिवर्तन को मापने का काम, ध्रुवीय क्षेत्र के निकट चंद्र सतह के तापीय गुणों का मापन, चंद्रयान-3 की लैंडिंग साइट के आसपास भूकंपीयता को मापने और चंद्रमा की क्रस्ट और मेंटल की संरचना को चित्रित करना जैसे वैज्ञानिक कार्य शामिल हैं।

वहीं रोवर प्रज्ञान की बात करें तो यह मुख्य रूप से चंद्रमा की सतह पर गुणात्मक और मात्रात्मक तात्विक विश्लेषण, चंद्रमा की सतह की रासायनिक और खनिज संरचना की जाँच तथा मौलिक संरचना का निर्धारण जैसे अहम शोध कार्यों को पूरा करेगा।

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