शेयर बाज़ार (Share Market in Hindi) क्या है एवं कैसे कार्य करता है?

किसी भी व्यवसाय को शुरू करने, उसे बढ़ाने अथवा उसमें नई तकनीक का इस्तेमाल कर सेवाओं एवं वस्तुओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए मुद्रा की आवश्यकता होती है, आमतौर पर क्रेडिट या ऋण लेने के संबंध में केवल वित्तीय संस्थाओं जैसे बैंक आदि का ही विचार मन में आता है, किन्तु धन जुटाने का एक अन्य विकल्प भी है, जिसका इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है। यहाँ हम धन जुटाने के उन तरीकों (Share Market in Hindi) की बात कर रहे हैं, जिसमें किसी वित्तीय संस्था के बजाए आम जनता से धनराशि जुटाई जाती है।

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में यहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था तथा यात्रा एवं पर्यटन जैसे अनेक क्षेत्रों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं।आज इस लेख के माध्यम से हम बात करेंगे जनता से धनराशि इकट्ठा करने तरीकों में सबसे महत्वपूर्ण शेयर बाज़ार या स्टॉक मार्केट (Share Market in Hindi) के बारे में, जानेंगे यह कैसे काम करता है? और आप कैसे शेयर बाज़ार में निवेश कर पैसे कमा सकते हैं?

शेयर बाज़ार (Share Market) क्या है एवं क्यों आवश्यक है?

आप सभी ने अक्सर समाचारों आदि में शेयर बाजार तथा इसमें आने वाले उतार चढ़ाव के बारे में सुना होगा परंतु सही एवं पूर्ण जानकारी न मिल पाने के कारण कई लोगों को यह गलतफहमी होती है, कि शेयर बाजार एक जुआ अथवा सट्टा है। हालाँकि शेयर बाजार में लाभ एवं जोखिम दोनों शामिल हैं फिर भी शेयर बाजार को जुआ बाजार समझना पूर्णतः गलत एवं एक मिथ्या है। आइए समझते हैं आखिर शेयर बाज़ार क्या है? जब कभी किसी कंपनी को अपने व्यवसाय को बढ़ाने या उसमें निवेश करने के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है तो कंपनी निम्न प्रकार से रकम जुटाती है।

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  • बैंक से लोन लेकर
  • पब्लिक से बॉन्ड या डिबेंचर्स जारी कर
  • कंपनी की कुछ हिस्सेदारी बेच कर

पहले एवं दूसरे विकल्प का नुकसान यह है, कि दोनों विकल्पों में कम्पनी को बैंक अथवा जनता को ब्याज चुकाना पड़ता है। ऐसे में कंपनी तीसरे विकल्प का प्रयोग कर निवेशकों से पैसा लेती है और बदले में उन्हें कंपनी में हिस्सेदार बनाती है। ये निवेशक कोई भी हो सकते है, जैसे आप, मैं, कोई अन्य कंपनी, कोई बैंक इत्यादि।निवेशकों को उनके द्वारा दिये गए धन के बदले उस कंपनी के शेयर या कंपनी में हिस्सेदारी दी जाती है और ऐसे निवेशकों को शेयरधारक कहा जाता है।

जहाँ बैंक से ऋण लेने पर कंपनी को निश्चित दर से ब्याज चुकाना पड़ता है, वहीं शेयरधारकों को कंपनी द्वारा कोई ब्याज नहीं दिया जाता बल्कि शेयरधारक स्वयं उस कंपनी का हिस्सा बन जाते हैं। इस प्रकार शेयर बाज़ार उद्योगों को पूँजी जुटाने में मदद करता है और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बॉन्ड एवं डिबेंचर्स ऐसे वित्तीय उपकरण है, जिनकी सहायता से सरकारें, निजी कंपनियाँ आदि जनता से धनराशि जुटाने का कार्य करते हैं। इन्हें खरीदने पर व्यक्ति को कंपनी में हिस्सेदारी नहीं मिलती बल्कि उसे इन वित्तीय उपकरणों की परिपक्वता अथवा Maturity तक एक निश्चित दर से ब्याज दिया जाता है एवं समयावधि पूर्ण होने पर निवेशक को मूलधन लौटा दिया जाता है।

शेयर बाज़ार का इतिहास

हालाँकि एक विनियमित शेयर बाज़ार की शुरुआत सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआत में हुई, किन्तु जिस प्रणाली पर शेयर बाज़ार कार्य करता है, उसका इस्तेमाल शेयर बाज़ार (Share Market in Hindi) के शुरू होने से भी कई सौ वर्ष पूर्व से चला आ रहा था। उस दौरान यूरोप अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का केंद्र हुआ करता था। व्यापारी लंबी समुद्री यात्रा करके अलग-अलग महाद्वीपों, देशों आदि से व्यापार करते थे। चूँकि इन यात्राओं में अत्यधिक खर्च आता था, जो किसी अकेले व्यापारी के लिए वहन कर पाना संभव नहीं था।

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अतः ऐसे में पूँजीपति लोगों ने यात्रा में आने वाले खर्च या लागत को वहन करने का एक नया तरीका खोजा, कई पूँजीपति लोग मिलकर यात्रा में आने वाले खर्चे को आपस में बाँट लेते थे और व्यापार से होने वाले मुनाफ़े में हिस्सेदार बन जाते थे। धीरे-धीरे यह व्यवस्था विकसित होती गई और घरेलू उद्योगों, कंपनियों में भी पूँजीपति लोगों ने निवेश करना शुरू किया और शेयर बाज़ार की शुरुआत हुई।

आधुनिक शेयर बाज़ार की शुरुआत एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना के साथ वर्ष 1602 में नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम में हुई। डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निवेशकों से धनराशि इकट्ठा की तथा कंपनी को होने वाले मुनाफे का एक हिस्सा लाभांश के रूप में निवेशकों को वितरित किया। यूरोप के अतिरिक्त 1700 की शुरुआत में लगभग 24 व्यापारियों के एक समूह ने बटनवुड ट्री समझौता किया। यहाँ स्टॉक और बॉन्ड खरीदने और बेचने के लिए लोग रोजाना इकट्ठा हुआ करते थे। यही बाद में न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के रूप में जाना गया।

भारत में शेयर बाज़ार की शुरुआत

भारत में शेयर बाज़ार की शुरुआत को देखें तो यहाँ सर्वप्रथम वर्ष 1875 में Native Share and Stock Broker’s Association के नाम से विनियमित स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत की गई, जिसे आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के नाम से जाना जाता है। यह भारत समेत सम्पूर्ण एशिया का पहला स्टॉक एक्सचेंज है। इसके बाद 1894 में टैक्स्टाइल कंपनियों के शेयरों की खरीद बिक्री के लिए अहमदाबाद स्टॉक एक्सचेंज, 1908 में जूट एवं प्लांटेशन कंपनियों के लिए कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत की गई। देश के सबसे बड़े नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को वर्ष 1992 में शुरू किया गया। वर्तमान में देश में कुल 20 से अधिक स्टॉक एक्सचेंज हैं, जिनमें से दो राष्ट्रीय एवं अन्य क्षेत्रीय हैं।

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कैसे बेचे जाते हैं शेयर?

शेयर बाजार दो चरणों मे कार्य करता है, जिन्हें प्राथमिक बाजार एवं द्वितीयक बाजार कहते हैं आइये समझते हैं प्राथमिक एवं द्वितीयक बाजार एवं इनकी कार्यप्रणाली को।

प्राथमिक बाज़ार

जहाँ कोई कंपनी पहली बार अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लेती है, तो उसे प्राथमिक बाजार कहा जाता है, और यह प्रक्रिया IPO या इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग कहलाती है। IPO की अवधि निश्चित होती है इस निश्चित अवधि में ही इच्छुक निवेशकों को कंपनी के शेयरों की खरीद के लिए आवेदन करना होता है। इन आवेदकों में रिटेल निवेशक, कंपनी की कर्मचारी, संस्थाएं आदि शामिल होती हैं।

जारी किये जाने वाले शेयरों में प्रत्येक प्रकार के निवेशकों के लिए एक हिस्सा निर्धारित किया जाता है। आईपीओ की अवधि के दौरान कंपनी द्वारा निर्धारित प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर निवेशकों द्वारा बोली लगाई जाती है। आईपीओ के दौरान कंपनी द्वारा शेयरों का एक लॉट अथवा एक संख्या निश्चित की जाती है, निवेशक केवल लॉट या उसके पूर्ण गुणजों में हि शेयर खरीदने के लिए आवेदन कर सकता है। प्राथमिक बाजार का अर्थव्यवस्था में बेहद अहम योगदान है, यह अर्थव्यवस्था में पूँजी निर्माण का कार्य करता है।

द्वितीयक बाज़ार

IPO या इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग के समाप्त हो जाने पर कंपनी प्राप्त बोलियों के अनुसार निवेशकों को शेयरों का आवंटन करती हैं तथा इसके बाद कंपनी विभिन्न स्टॉक एक्सचेंज जैसे NSE अथवा BSE में सूचीबद्ध हो जाती है। अब प्राथमिक बाज़ार में बेचे गए शेयर द्वितीयक बाज़ार में सभी के लिए खरीद अथवा बिक्री हेतु उपलब्ध होते हैं। प्राथमिक बाज़ार के विपरीत यहाँ न ही शेयर खरीदने की कोई निश्चित अवधि होती है तथा न ही शेयरों को एक निश्चित लॉट में खरीदने की बाध्यता, निवेशक न्यूनतम 1 शेयर भी खरीद सकता है।

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द्वितीयक बाजार में कंपनी की कोई भूमिका नहीं होती, जहाँ प्राथमिक बाजार से अर्थव्यवस्था में पूँजी का निर्माण होता है वहीं द्वितीयक या स्टॉक मार्केट (Share Market in Hindi) में केवल शेयरों की खरीद-बिक्री या ट्रेडिंग होती है यहाँ से अर्थव्यवस्था में पूँजी का निर्माण नहीं किया जाता।

जारी किये जाने वाले शेयरों के प्रकार (Equity vs Preference Shares)

किसी कंपनी द्वारा जारी किये जाने वाले शेयर दो प्रकार के होते हैं, इनमें पहला है इक्विटी शेयर ये कंपनी के साधारण शेयर होते हैं। इक्विटी शेयरधारक के पास शेयरों की मात्रा के अनुसार वोटिंग अधिकार एवं कंपनी का मालिकाना हक होता है। वहीं दूसरे स्थान पर हैं प्रेफरेंस शेयर अपने नाम के अनुरूप इनके धारकों को इक्विटी शेयरधारकों की तुलना में कई तरह से वरीयता प्रदान की जाती है।

उदाहरण के तौर पर कंपनी लाभांश वितरित करने में प्रेफरेंस शेयरधारकों को वरीयता देती है तथा प्रत्येक परिस्थिति में लाभांश प्रदान करती है, जबकि इक्विटी शेयरधारकों की स्थिति में ऐसा नहीं किया जाता, कंपनी द्वारा अपने समस्त ऑपरेशन बंद करने की स्थिति में भी प्रेफरेंस शेयरधारकों को इक्विटी शेयरधारकों की तुलना में पहले भुगतान किया जाता है।

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प्रेफरेंस शेयरधारक कंपनी में वोटिंग का अधिकार नहीं रखते अतः इन्हें कंपनी का असल मालिक नहीं समझा जा सकता। हालाँकि ये शेयरधारक कभी भी अपने शेयरों को इक्विटी शेयरों में बदल सकते हैं, जबकि इक्विटी शेयरधारकों के पास अपने शेयरों के प्रकार को बदलने का विकल्प नहीं होता। प्रेफरेंस शेयर कंपनी कुछ चुनिंदा संस्थानों को ही जारी करती है, अधिकतर वे संस्थान इन शेयरों में निवेश करते हैं जो बाज़ार के उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं।

आप कैसे खरीद सकते हैं शेयर?

अब तक आपने जाना शेयर बाजार या स्टॉक मार्केट क्या है (What is Share Market in Hindi) तथा कैसे काम करता है? आइये अब समझते हैं कोई व्यक्ति कैसे किसी कंपनी के शेयर खरीद सकता है। जिस प्रकार हमें मुद्रा का लेन-देन करने के लिए बैंक खाते की आवश्यकता होती है उसी प्रकार किसी कंपनी के शेयर खरीदने अथवा उन्हें बेचने के लिए भी एक खाते की आवश्यकता होती है, जिसे डीमैट खाता कहते हैं। डीमैट खाते में आपके द्वारा खरीदे गए शेयर जमा किये जाते हैं, जिन्हें आप अपनी इच्छानुसार जब चाहें बेच सकते हैं।

कैसे खोले डीमेट खाता?

यहाँ यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है, कि डीमैट खाता कहाँ और किस प्रकार खोला जा सकता है? हालिया समय में सभी सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से मात्र एक स्मार्टफोन के द्वारा हम तक पहुँच रही हैं, जितना आसान इंटरनेट पर एक ई-मेल खाता बनाना है लगभग उतना ही आसान डीमैट खाता खोलना भी है। वर्तमान में सभी बड़े बैंक डीमैट खाते की सुविधा दे रहे हैं, इसके साथ ही कुछ अन्य कंपनियाँ भी यह सुविधा उपलब्ध करवा रहीं हैं।

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भारत में डीमैट खातों की सेवा देने वाली कंपनियों में पहले नम्बर की बात करें तो ज़ेरोधा सिक्योरिटीज का नाम आता है, क्योंकि इसके सालाना प्रबंधन शुल्क एवं अन्य शुल्क और कंपनियों की तुलना में बहुत कम हैं। यहाँ मात्र 300 रुपए में आप डीमैट खाता खोल सकते हैं। हमनें एक अन्य लेख में डीमैट खाता खोलने से सम्बंधित सभी चरणों एवं आवश्यक दस्तावेजों के बारे में विस्तार से समझाया है पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। डीमैट खाता खोलने के पश्चात आपको एक login Id और Passwords आपके सेवा प्रदाता द्वारा प्रदान किया जाएगा। अब आप अपने ब्रोकर की वेबसाइट या App में लॉगिन करके मनचाही कंपनी में निवेश कर सकते हैं।

शेयर बाज़ार से कैसे होता है मुनाफ़ा?

यहाँ तक आप शेयर बाजार तथा इसकी आवश्यकता को समझ चुके हैं, आप डीमैट खाते तथा शेयर खरीदने के बारे में भी जान चुके हैं। अब बात करते हैं इस लेख के महत्वपूर्ण भाग अर्थात शेयर बाज़ार से होने वाले मुनाफे की। शेयर बाज़ार से से आप दो तरीकों से पैसा कमा सकते हैं।

(क) पहले तरीके को एक उदाहरण से समझते हैं, मान लीजिये आपने किसी कंपनी ABC के 1,000 शेयर 50 रुपये प्रति शेयर के भाव से 50,000 रुपये में खरीदे, कुछ समय बाद कंपनी के अच्छे प्रदर्शन के चलते कंपनी के एक शेयर की कीमत 80 रुपये हो गयी अब आप अपने शेयर बेचने का निर्णय लेते हैं, तो आपके 1000 शेयरों की वर्तमान कीमत हुई 80,000 रुपये यहाँ आपको 30,000 रुपये का मुनाफा हुआ। आपके लिए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि, आपके द्वारा खरीदे गए शेयरों की कीमत कम भी हो सकती है, जिस स्थिति में आपको हानि हो सकती है। लाभ या हानि मुख्यतः इस बात पर निर्भर करता है, कि आपने कितनी बारीकी से उस कंपनी का अध्ययन किया है।

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(ख) दूसरा तरीका है, जिसे लाभांश (Dividend) कहते हैं। जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं (यह इस बात पर निर्भर नहीं करता आपने कितने शेयर खरीदे हैं) तो आप उस कंपनी में हिस्सेदार बन जाते हैं और कंपनी को होने वाले लाभ में भी आपकी हिस्सेदारी होती है। हर साल कंपनी अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा प्रत्येक शेयर धारक को बाँटती है। चूँकि शेयरधारकों को लाभांश देना या ना देना कंपनी के बोर्ड के सदस्यों पर निर्भर करता है, किंतु फिर भी अधिकांश कंपनियाँ अपने शेयरधारकों में मुनाफे का वितरण करती हैं।

किन बातों पर निर्भर करती है शेयरों की कीमत?

शेयर बाजार माँग एवं आपूर्ति के सिद्धांत पर कार्य करता है, सरल शब्दों में बात करें तो जिस कंपनी के शेयरों की माँग जितनी अधिक होगी उसका मूल्य उतना ही अधिक होगा। इसी प्रकार जिस कंपनी के शेयरों की माँग कम होगी उसका मूल्य भी कम होगा। किसी कंपनी के शेयरों की माँग कब बढ़ जाए एवं कब किसी कंपनी के शेयरों की माँग में गिरावट आ जाए यह कई अलग अलग कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कंपनी के अच्छे या खराब परिणाम, कंपनी द्वारा लिया गया कोई सकारात्मक या नकारात्मक निर्णय, कंपनी के बोर्ड के सदस्यों का कंपनी के विकास को लेकर नीति निर्माण, सरकार द्वारा लिए गए कोई फैसले आदि।

शेयर बाज़ार में नियामक की भूमिका

चूँकि शेयर बाज़ार का किसी देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान होता है, यहाँ तक की किसी देश के शेयर बाज़ार (Share Market in Hindi) से उस देश की अर्थव्यवस्था के आकार का अंदाजा लगाया जा सकता है। अतः इस स्थिति में शेयर बाज़ार में किसी संस्था का नियामक की भूमिका में होना अहम हो जाता है। भारत में इस कार्य के उद्देश्य के लिए सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड / The Securities and Exchange Board of India) की स्थापना की गई है। इसकी स्थापना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम 1992 के प्रावधानों के अनुसार 12 अप्रैल 1992 को की गई। इसका कार्य निवेशकों के हितों का ध्यान रखते हुए शेयर बाज़ार की सभी गतिविधियों में नियामक की भूमिका में कार्य करना है।

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शेयर बाज़ार से जुड़ी शब्दावलियाँ

आइए शेयर बाज़ार से जुड़ी कुछ महत्वपपूर्ण शब्दावलियों को समझते हैं, जिनके बिना शेयर बाज़ार के विषय में एक सही समझ बनाना थोड़ा मुश्किल होगा।

स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange)

जिस प्रकार अपना मनपसंद सामान खरीदने के के लिए आप अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील जैसे प्लेटफार्म का उपयोग करते हैं, उसी प्रकार किसी कंपनी के शेयरों की खरीद और बिक्री के लिए प्रयोग होने वाले प्लेटफार्म स्टॉक एक्सचेंज कहलाते हैं। जैसा की हमनें शुरुआत में बताया भारत में राष्ट्रीय स्तर पर दो स्टॉक एक्सचेंज मौजूद हैं, जिनमें बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पूरे एशिया का पहला स्टॉक एक्सचेंज है। वहीं नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) एशिया का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।

सेंसेक्स (SENSEX)

आपने अक्सर समाचारों में सेंसेक्स में होने वाले उतार-चढ़ाव के बारे में सुना होगा, सेंसेक्स जिसका पूरा नाम Stock Exchange Sensitive Index है, असल में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का एक इंडेक्स है। यह देश की विभिन्न क्षेत्रों की 30 चुनिंदा कंपनियों का एक समूह है। सेंसेक्स की वैल्यू इन्हीं 30 कंपनियों के बाजार मूल्य का औसत होती है।

निफ्टी (NIFTY)

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की ही भाँति नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का भी खुद का एक इंडेक्स है जिसे निफ्टी कहते हैं। यह National Fifty का संक्षिप्त रूप है। निफ्टी देश की 50 अलग-अलग क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों का एक समूह है, जिसकी वैल्यू इन्हीं 50 शेयरों के बाजार मूल्य का औसत होती है।

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चूँकि किसी भी देश के शेयर बाज़ार के प्रमुख सूचकांकों (Index / Indices) में उस देश के विभिन्न क्षेत्रों की बड़ी कंपनियाँ शामिल होती हैं, अतः इन सूचकांकों से उस देश की अर्थव्यवस्था का आँकलन भी किया जा सकता है। दुनियाँ के कुछ महत्वपूर्ण सूचकांकों में जापान का Nikkei, अमेरिका का NASDAQ, जर्मनी का DAX, चीन का SHANGHAI COMPOSITE आदि हैं।

IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) तथा FPO (फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफरिंग)

हमनें प्राथमिक बाजार की चर्चा करते हुए बताया की, जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर बाज़ार में बेचने का निर्णय लेती है तो इस प्रक्रिया को IPO या इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग कहा जाता है। यहाँ हम समझते हैं FPO या फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफरिंग क्या है? यदि एक बार कुछ हिस्सेदारी बेचने के बाद कम्पनी एक बार फिर रकम जुटाने के लिए अपनी कुछ और हिस्सेदारी बेचने का निर्णय ले तो उसे FPO या फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफरिंग कहा जाता है।

तेजड़िया और मंदड़िया (Bearish & Bullish Market)

शेयर बाज़ार के संबंध में अक्सर बुल या बियर शब्द सुनाई देते हैं। Bullish मार्केट से आशय शेयर मार्केट में तेजी या चढ़ाव से है, वहीं शेयर बाज़ार में यदि मंदी हो तो उसे Bearish मार्केट शब्द से संबोधित किया जाता है। इन दोनों शब्दावलियों का इस्तेमाल समूचे शेयर बाज़ार, किसी सेक्टर विशेष अथवा किसी कंपनी के लिए किया जा सकता है।

ट्रेडिंग एवं निवेश (Trading & Investment)

शेयर बाज़ार (Share Market in Hindi) में निवेश करने वाले लोग मुख्यतः दो तरह की प्रवृत्ति के होते हैं। इनमें पहले वे हैं जो किसी कंपनी में लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं, इनका उद्देश्य किसी कंपनी तथा उसके लाभ में हिस्सेदार बनना होता है। एक निवेशक किसी कंपनी के सभी पहलुओं पर बारीकी से अध्ययन करने के पश्चात ही उसमें निवेश करता है। वहीं दूसरे वे लोग हैं जो कम समय (कुछ सेकेंड्स से लेकर कुछ महिनों तक) में शेयर बाज़ार से मुनाफ़ा कमाने की प्रवृत्ति रखते हैं, इन्हें सामान्यतः ट्रेडर कहा जाता है। ट्रेडिंग में किसी कंपनी की आर्थिक स्थिति, प्रबंधन, उसके प्रदर्शन जैसे पहलुओं पर अध्ययन न करके केवल उस कंपनी के वर्तमान ट्रेंड को देखकर निवेश किया जाता है।

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यह भी पढ़ें : जानें शेयर बाज़ार में निवेश करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है

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