Various Types of Bank and their Working in Hindi

बैंकों की कार्यप्रणाली तथा इसके प्रकार

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में जहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन कमाई तथा यात्रा एवं पर्यटन जैसे अनेक क्षेत्रों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं। पिछले लेख में हमने चर्चा की थी बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास के बारे में इस लेख के माध्यम से हम समझेंगे बैंकों की कार्यप्रणाली तथा उनके विभिन्न प्रकार। (Various Types of Bank and their Working in Hindi)

बैंक

कोई भी संस्था जो जनता से जमा स्वीकार करती है तथा जनता के उपभोग के लिए ऋण उपलब्ध कराती है बैंक तथा यह प्रक्रिया बैंकिंग कहलाती है। हाँलकी वर्तमान में बैंक कई अन्य सुविधाएं भी ग्राहकों को उपलब्ध कर रहे हैं जिनकी चर्चा हम नीचे करेंगे।

बैंकों के प्रकार

बैंकों के निम्नलिखित प्रकार हैं

  • वाणिज्यिक बैंक
  • केंद्रीय बैंक
  • ग्रामीण बैंक
  • सहकारी बैंक
  • अन्य प्रकार

वाणिज्यिक बैंक

ये बैंक जमा स्वीकारने तथा ऋण देने के साथ साख सृजन का कार्य भी करते है। अर्थात जमाकर्ता को दिया जाने वाला ब्याज ऋण दिए गए व्यक्ति से लिये गए ब्याज से कम होता है तथा ब्याज के इसी अंतर से बैंक कमाई या साख सृजन करते हैं। इन बैंकों को मुख्य उद्देश्य लाभ अर्जित करना होता है तथा ये बैंक केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में कार्य करते हैं। ऐसे सभी बैंक जिनका इस्तेमाल हम बैंकिंग सेवाओं के लिए करते हैं इसी के उदाहरण हैं। वाणिज्यिक बैंकों का पुनः वर्गीकरण नीचे दिया गया है।

Various Types of Bank
Various Types of Bank and their Working in Hindi

वाणिज्यिक बैंकों के कार्य

  • माँग जमा स्वीकार करना अर्थात ऐसा जमा जिसे ग्राहक द्वारा कभी भी वापस माँगा जा सकता है। इसके अंतर्गत बचत खाते तथा चालू खाते शामिल हैं।
  • समय जमा स्वीकार करना अर्थात ऐसा जमा स्वीकार करना जो एक निश्चित अवधि के लिए जमा किया जाता है। इन्हें ग्राहक निश्चित समयावधि पूर्ण होने के पश्चात ही माँग सकता है। इसके अंतर्गत RD तथा FD शामिल हैं।
  • ग्राहकों को ऋण प्रदान करना जिसमें अल्प कालिक (सामान्यतः एक साल से कम के लिए), ओवर ड्राफ्ट (चालू खाता खाताधारकों की वित्तीय संपत्तियों के आधार पर उन्हें खाते में उपलब्ध धनराशि से अधिक धनराशि का चेक जारी करने की अनुमति होती है जिसे ओवरड्राफ्ट कहते हैं।) तथा दीर्घावधि ऋण सुविधाएं शामिल हैं।
  • इसके अतिरिक्त वर्तमान में वाणिज्यिक बैंक अन्य कार्य जैसे डिमैट खतों की सुविधा उपलब्ध कराना, बिल, बीमा आदि का भुगतान, लॉकर सुविधा, विदेशी मुद्रा का क्रय विक्रय आदि सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं।

केंद्रीय बैंक

भारत का केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक या RBI है। इसके बारे में हमने एक अन्य लेख में विस्तार से समझाया है पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। यहाँ हम आपको RBI के मुख्य कार्यों को संक्षेप में बता रहे हैं। रिजर्व बैंक मुख्यतः निम्न कार्य करता है।

  • सभी बैंकों के नियामक की तरह कार्य
  • मौद्रिक नीति का क्रियान्वयन
  • मुद्रा जारी करना

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs)

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की शुरुआत सितंबर 1975 में पारित एक अध्यादेश के तहत अक्टूबर 1975 में की गयी ततपश्चात इस कानून को 1976 में संसद द्वारा पारित किया गया। शुरुआत में ग्रामीण बैंकों की संख्या पाँच थी, इनकी शुरुआत के पीछे मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सेवा को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाना था जिससे ग्रामीण स्तर पर कृषि तथा अन्य उद्योगों जैसे मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन आदि को ऋण के तौर पर साख या धन उपलब्ध कराया जा सके।

बैंकिंग को ग्रामीण तथा दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँचाने के अतिरिक्त किसानों तथा छोटे उद्योगपतियों को सस्ती दरों में ऋण उपलब्ध कराना भी ग्रामीण बैंक का एक लक्ष्य था। चूँकि वाणिज्यिक बैंकों का मुख्य उद्देश्य लाभ अर्जित करना होता है अतः वह दिए जाने वाले कर्ज़ में अधिक ब्याज वसूलते हैं।

ग्रामीण बैंकों की संरचना

ग्रामीण बैंकों की स्थापना में मुख्यतः तीन संस्थाओं की भूमिका होती है। जिनमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा प्रायोजक बैंक शामिल हैं। किसी भी ग्रामीण बैंक में इनकी हिस्सेदारी क्रमशः 50%, 15% तथा 35% होती है।

सहकारी समितियाँ

सहकारी बैंकों की स्थापना राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत की गई। ऐसे बैंकों की शुरुआत का मुख्य उद्देश्य कृषि तथा ग्रामीण क्षेत्रों का विकास के साथ साथ शहरों में लघु उद्योग, स्वरोजगार आदि को बढ़ावा देना था इस प्रकार ये मुख्यतः दो भागों में विभाजित होते हैं जिनमें ग्रामीण सहकारी बैंक तथा शहरी सहकारी बैंक शामिल हैं। इन बैंकों का संचालन सहकारी समितियों द्वारा किया जाता है तथा ये समितियाँ राज्य सरकार द्वारा बनाये नियमों के आधार पर कार्य करती हैं तथा इनकी शाखाएं मुख्यतः एक ही राज्य तक सीमित होती हैं। सहकारी समितियाँ तीन स्तरों पर कार्य करती हैं

  • राज्य सहकारी समिति
  • जिला सहकारी समिति
  • प्राथमिक या ग्रामीण स्तरीय ऋण समितियाँ

बैंकों के अन्य प्रकार

  • गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं
  • पेमेंट बैंक

गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं

इनके तहत मुख्यतः तीन प्रकार की वित्तीय संस्थाए आती हैं। ये प्रकार विकास बैंक, गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियाँ तथा प्राथमिक डीलर हैं।

विकास बैंक

इन बैंकों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य किसी क्षेत्र विशेष को वित्तीय सेवा उपलब्ध करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करके आर्थिक संवृद्धि दर को बढ़ाना है। प्रत्येक बैंक किसी विशेष क्षेत्र को लक्ष्य बनाकर कार्य करता है। वर्तमान में चार प्रकार के विकास बैंक हैं

  • नाबार्ड (कृषि क्षेत्र के लिए)
  • सिडबी (औद्योगिक विकास के लिए)
  • एक्सिम ( आयात तथा निर्यात हेतु)
  • NHB (आवासीय क्षेत्र)

गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियाँ NBFC

NBFC अर्थात गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियाँ सामान्यतः बैंकिंग कार्य नहीं करती हैं किंतु ग्राहकों को वित्तीय सेवा उपलब्ध कराती हैं जैसे ये जमा स्वीकार करती हैं तथा ऋण भी उपलब्ध कराती हैं किंतु बैंकों के विपरीत NBFC माँग जमा स्वीकार नहीं कर सकती, दूसरे शब्दों में जहाँ  आप किसी बैंक में धन जमा करके उसे कभी भी निकाल सकते हैं उसके विपरीत आप NBFC में राशि जमा करने के बाद उसे पुनः मुद्रा के रूप में प्राप्त नहीं कर सकते अतः इन संस्थाओं को डिमांड ड्राफ्ट या चेक जारी करने का अधिकार नहीं होता। हाँलाकि जमा राशि से ग्राहक अन्य कार्य जैसे बिलों का भुगतान, बीमा, प्रतिभूतियाँ आदि खरीद सकते हैं। NBFC कंपनी अधिनियम 1956 के तहत पंजीकृत होती हैं।

प्राथमिक डीलर

आरबीआई में पंजीकृत ऐसी संस्थाएं जिनके पास रिजर्व बैंक से सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदने तथा उन्हें पुनः बाजार मे बेचने का लाइसेंस होता है प्राथमिक डीलर कहलाते हैं। इनमें कोई भी बैंकिंग या गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी शामिल हो सकती है।

पेमेंट बैंक

प्रत्येक व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने, लघु बचत खाते उपलब्ध कराने आदि के उद्देश्य से रिजर्व बैंक द्वारा पेमेंट बैंक की अवधारणा प्रस्तुत की गई। हाँलाकि इसकी गतिविधियों का दायरा किसी बैंक की तुलना में कम है। यह केवल जमा स्वीकार कर सकते हैं ऋण प्रदान नहीं करते। पेमेंट बैंकों के लिए न्यूनतम 100 करोड़ की पूंजी होना आवश्यक है जिसमें से 75% धनराशि को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने की अनिवार्यता होती है। इसके उदाहरणों में पेटीएम पेमेंट बैंक, एयरटेल पेमेंट बैंक आदि शामिल हैं।

बैंकों की कार्यप्रणाली

अभी तक आप बैंकों के प्रकार के बारे में समझ चुके हैं आइये अब जानते हैं बैंकिंग के बारे में। बैंकिंग से आशय बैंकों की कार्यप्रणाली से है अर्थात बैंक किस प्रकार अपने ग्राहकों को सेवा उपलब्ध कराते हैं। वर्तमान में लगभग सभी बैंक कोर बैंकिंग प्रणाली पर आधरित हैं अर्थात किसी बैंक की सभी शाखाओं को एक कंप्यूटर नेटवर्क से जोड़ दिया जाता है जिसके परिणामस्वरूप ग्राहक किसी भी शाखा से बैंकिंग सेवाओं का लाभ ले सकता है। बैंकिंग के प्रकारों में इसके अतिरिक्त मोबाईल बैंकिंग, ई बैंकिंग आदि शामिल हैं जिनकी मदद से ऑनलाइन भुगतान तथा पैसे का हस्तांतरण संभव हो पाया है।

 

उम्मीद है दोस्तो आपको ये लेख (Various Types of Bank and their Working in Hindi) पसंद आया होगा टिप्पणी कर अपने सुझाव अवश्य दें। अगर आप भविष्य में ऐसे ही रोचक तथ्यों के बारे में पढ़ते रहना चाहते हैं तो हमें सोशियल मीडिया में फॉलो करें तथा हमारा न्यूज़लैटर सब्सक्राइब करें। तथा इस लेख को सोशियल मीडिया मंचों पर अपने मित्रों, सम्बन्धियों के साथ साझा करना न भूलें।

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