Tax Haven Countries in Hindi | क्या हैं टैक्स हेवन देश ?

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नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में जहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन कमाई तथा यात्रा एवं पर्यटन जैसे क्षेत्रों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं। आज इस लेख में हम बात करेंगे टैक्स हेवन के बारे में और जानेंगे कैसे इनकी मदद से कई कंपनियाँ टैक्स की चोरी को अंजाम देती हैं। (Tax haven Countries in Hindi)

कर (Tax)

कर (Tax) किसी देश की सरकार द्वारा वहाँ के लोगों पर लगाया जाने वाला एक शुल्क है जिससे सरकार अपने सभी खर्चों की पूर्ति करती है। लोगों पर लगाए जाने वाले कर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं जिनमें प्रत्याशित कर एवं अप्रत्याशित कर सम्मिलित हैं। प्रत्याशित कर के अंतर्गत किसी व्यक्ति की आय पर लगने वाला कर, पूँजी लाभ कर (Capital Gain Tax), निगम कर (Corporate Tax) आदि शामिल है जबकि अप्रत्याशित कर में वस्तुओं एवं सेवाओं पर लगने वाले कर, अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर लगने वाला कर (Stamp Duty) आदि आते हैं। 

क्या है टैक्स हेवन ?

जैसा कि नाम से स्पष्ट है टैक्स हेवन या कर मुक्त क्षेत्र कुछ ऐसे देश हैं जहाँ प्रत्याशित करों की दरें शून्य या बहुत कम होती हैं। इसी कारण अधिकांश कंपनियाँ अपनी आय पर देय कर बचाने के लिए ऐसे देशों का इस्तेमाल करती हैं। ये देश टैक्स में किसी प्रकार की पारदर्शिता नहीं रखते और न ही किसी प्रकार की वित्तीय जानकारी को साझा करते हैं। टैक्स चोरी करने वाले लोगों के लिए ये देश स्वर्ग के समान हैं।

 

शैल कंपनियाँ

आइये अब जानते हैं किस प्रकार कोई कंपनी टैक्स हेवन कहे जाने वाले इन देशों का इस्तेमाल टैक्स बचाने में करती है। यह कार्य मुख्यतः शैल कंपनियों के माध्यम से किया जाता है। ये ऐसी कम्पनियाँ हैं जो वास्तविकता में अस्तित्व में नहीं होती बल्कि केवल कागजों में दर्ज होती हैं। टैक्स चोरी के लिए कई कम्पनियाँ टैक्स हेवन देशों में शैल कम्पनियाँ स्थापित करती हैं। ऐसे देशों में शैल कंपनियाँ स्थापित करने की कानूनी प्रक्रिया बहुत आसान होती है। 

शैल कंपनियों की कार्यप्रणाली

शैल कंपनियों के माध्यम से होने वाली टैक्स की चोरी को एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं। माना भारत स्थित कोई कंपनी abc स्मार्टफोन का उत्पादन करती है जिसे भारत में 15 फीसदी कॉर्पोरेट टैक्स देना पड़ता है। सामान्य स्थिति में कंपनी सालाना 1 करोड़ डॉलर का लाभ अर्जित करती है अतः कंपनी को 15 लाख डॉलर का कॉर्पोरेट टैक्स चुकाना पड़ता है। 

टैक्स चोरी करने के लिए abc अपनी एक सहायक कंपनी ऐसे किसी देश में स्थापित करती है जहाँ कॉर्पोरेट टैक्स बहुत कम माना 2 फीसदी है। अब abc अपनी सहायक कंपनी को सस्ते दामों में स्मार्टफोन की सप्लाई करती है जिससे उसका कुल लाभ 1 करोड़ डॉलर से घटकर 70 लाख डॉलर रह जाता है। इसके अतिरिक्त abc द्वारा विदेश स्थित अपनी सहायक कंपनी को मामूली सेवाओं के नाम पर 50 लाख डॉलर का अतिरिक्त भुगतान भी किया जाता है। अंततः abc के पास लाभ के रूप में केवल 20 लाख डॉलर शेष बचते हैं जिस पर कंपनी 15 फीसदी के अनुसार 3 लाख डॉलर का टैक्स जमा करती है। 

वहीं सहायक कंपनी स्मार्टफोन की डिलीवरी मिलने के बाद स्मार्टफोन को बाजार कीमतों में बेच देती है तथा 30 लाख डॉलर का मुनाफा प्राप्त करती है। सहायक कंपनी 30 लाख के लाभ तथा abc को बेची गई सेवा से प्राप्त 50 लाख पर 2 फीसदी के अनुसार 1.6 लाख डॉलर का टैक्स अदा करती है। इस प्रकार abc 10.4 लाख डॉलर का टैक्स बचाने में कामयाब हो जाती है। इसके बाद सहायक कंपनी अपने कुल लाभ 78.4 लाख डॉलर को abc में निवेश (FDI) के माध्यम से हस्तांतरित कर देती है। यही कारण है कि भारत में आने वाला अधिकांश विदेशी निवेश मॉरीशस, सिंगापुर, केमन आइलेंड जैसे देशों से प्राप्त होता है। 

कर चोरी रोकने के लिए सरकारों द्वारा किये गए प्रयास

करों की चोरी रोकने के लिए राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कानून बनाए गए हैं। OECD द्वारा कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS) विकसित किया गया है जिससे वर्तमान में तकरीबन 100 से अधिक देश जुड़े हैं। यह प्लेटफॉर्म किसी देश को उसके नागरिकों की विदेश में हुई आर्थिक गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराता है। इसके अतिरिक्त भारत ने भी Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA) कानून में संशोधन किए हैं।

कुछ प्रमुख टैक्स हैवन देश

प्रमुख टैक्स हेवन देशों में निम्नलिखित शामिल हैं।

बरमूडा

बरमूडा अमेरिका के पूर्व में उत्तरी अटलांटिक में स्थित एक द्वीपीय देश है। यह एक ब्रिटिश ओवरसीज क्षेत्र है अर्थात इस देश के विदेशी तथा रक्षा मामले ब्रिटिश सरकार के अधीन होते हैं। यहाँ कॉर्पोरेट तथा आय दोनों पर लगने वाला टैक्स शून्य है। सरकार द्वारा अपने खर्चों को अप्रत्याशित करों द्वारा पूरा किया जाता है।

केमन द्वीप

यह पश्चिमी कैरिबियन सागर में स्थित छोटा सा द्वीपीय देश है। यह भी एक ब्रिटिश ओवरसीज क्षेत्र है। यहाँ आय तथा कॉर्पोरेट टैक्स दोनों शून्य है जबकि अप्रत्याशित करों जैसे वस्तुओं तथा सेवाओं पर लगने वाले कर की दरें उच्च हैं।

ब्रिटिश वर्जिन द्वीप

यह एक अन्य ब्रिटिश ओवरसीज क्षेत्र है जो कैरिबियन सागर में स्थित है। करों की बात करें तो यहाँ कॉर्पोरेट टैक्स शून्य हैं हालाँकि कंपनियों को 2 से 6 फीसदी का मामूली पेरॉल टैक्स चुकाना पड़ता है। यहाँ पंजीकृत कंपनियों का रिकॉर्ड गोपनीय रखा जाता है अतः किसी कंपनी के मालिक की जानकारी सार्वजनिक नहीं होती। कंपनी के पंजीकरण की ये नीतियां दुनियाँ भर के भृष्टाचारियों को छिपने की सुविधा मुहैया कराती हैं।

बहामास

बहामास एक कैरिबियन देश है जो 1973 तक ब्रिटेन के अधीन था। बैंकिंग गतिविधियों का केंद्र माने जाने वाले इस देश में आयकर, कॉर्पोरेट टैक्स तथा कैपिटल गेन टैक्स शून्य है। जबकि देश की मुख्य आय अप्रत्याशित करों से होती है। ब्रिटिश वर्जिन द्वीप की भाँति बहामास भी कम्पनियों को उनकी पहचान छिपाए रखने की सुविधा देता है।

आयरलैंड

आयरलैंड में कॉर्पोरेट टैक्स की दरें अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में बहुत कम केवल 12.5% हैं। कम टैक्स रेट होने के चलते कई कंपनियां अपने मुख्यालय इस देश में खोलती हैं।

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य टैक्स हेवन कहे जाने वाले देशों में निम्नलिखित शामिल हैं।

  1. हाँग काँग
  2. मोनेको
  3. मॉरीशस
  4. पनामा
  5. जर्सी द्वीप
  6. सिंगापुर

 

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