Origin of Life on Earth – in Hindi | पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति

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धरती का निर्माण

हमनें अपने पुराने लेख में ब्रह्मांड तथा हमारे सौर मंडल के निर्माण के बारे में बताया है जिसे आप नीचे दी गयी लिंक के माध्यम से पढ़ सकते हैं। यहाँ धरती के निर्माण को संक्षिप्त में समझते हैं। तकरीबन 13.7 अरब वर्ष पहले हुए एक महाविस्फोट के परिणामस्वरूप ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। और तकरीबन 4.5 अरब वर्ष पूर्व धूल तथा गैसों से बने बादल जिसे नेब्यूला कहा गया से हमारे सौर मंडल का निर्माण हुआ। ये बादल करोड़ों वर्षों तक ब्रह्मांड में एक डिस्क के आकार में घूमते रहे तथा गुरुत्वाकर्षण के कारण पास आते गए फलस्वरूप सूर्य, पृथ्वी तथा अन्य ग्रहों का निर्माण हुआ। 

बिग बैंग थ्योरी एवं ब्रह्मांड की उत्पत्ति 

पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत (Origin of Life on Earth – in Hindi)

पृथ्वी अपने निर्माण के समय आज सी नहीं थी बल्कि यह किसी आग के गोले के समान गर्म थी, इसमें न ही पानी था और न ही ऑक्सीजन। पृथ्वी विकास के एक लंबे दौर से गुजरी है जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया है। समय के साथ कई प्राकृतिक घटनाएं घटी जिन्होंने पृथ्वी पर जीवन को मुमकिन बनाया। ऐसी ही कुछ घटनाओं की चर्चा हम यहाँ करेंगे।

सौर मण्डल में पृथ्वी का स्थान

पृथ्वी पर जीवन संभव हो इसके लिए पहली घटना थी सौरमंडल में पृथ्वी का स्थान सौरमंडल में पृथ्वी जिस क्षेत्र में स्थित है उसे गोल्डीलॉक ज़ोन कहा जाता है। शुक्र तथा मंगल के मध्य में स्थित यह क्षेत्र पूरे सौरमंडल में एक मात्र क्षेत्र है जहां सूर्य की उर्ज़ा संतुलित मात्रा में पहुँचती है। दूसरे शब्दों में पृथ्वी न ही शुक्र जितनी गर्म है और न ही मंगल जितनी ठंडी। इस क्षेत्र में होने के कारण ही पृथ्वी पर जल द्रव अवस्था में बना रहता है।

goldilocks zone
गोल्डिलॉक ज़ोन : सौर मंडल में पृथ्वी का स्थान

पृथ्वी की स्थिरता

हम जानते हैं कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती हुई सूर्य की परिक्रमा करती है जिसके चलते दिन रात एवं मौसमों में बदलाव होते हैं। किंतु पृथ्वी का अपनी धुरी पर बने रहना संभव नहीं था और ऐसी स्थिति में पृथ्वी पर जीवन भी संभव न हो पाता। किंतु यह संभव हो पाया मंगल जितने बड़े एक ग्रह के पृथ्वी से टकराने के कारण। पृथ्वी के निर्माण के कुछ समय बाद एक ग्रह पृथ्वी से टकरा गया जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी की सतह से धूल, मिट्टी, धातुएं तथा अन्य हल्के पदार्थ अंतरिक्ष में पृथ्वी के चारों ओर एक छल्ले के रूप में चक्कर लगाने लगे और इनके इकट्ठा होने से चंद्रमा का निर्माण हुआ। चंद्रमा के होने से पृथ्वी को स्थिरता मिली। चंद्रमा द्वारा पृथ्वी पर लगाया जाने वाला गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी को अपने स्थान पर रोके रखता है।

Formation of moon
पृथ्वी से टकराता ग्रह जिसके परिणामस्वरूप चंद्रमा का निर्माण हुआ

पृथ्वी पर पानी

स्थिरता मिलने के बाद आवश्यकता थी पानी की जो अभी तक धरती में मौजूद नहीं था। धरती की बनावट के करीब 50 करोड़ वर्ष बाद पृथ्वी पर अंतरिक्ष से उल्कापिंडों की बौछार होने लगी। ये उल्कापिंड अपने साथ बर्फ के रूप में पानी लाते रहे। करोड़ों वर्षों तक चलने वाली इस बौछार के कारण पृथ्वी पर उर्पयुक्त मात्रा में पानी जमा हो गया और महासागरों का निर्माण हुआ। 

asteroid coming towards earth
पृथ्वी पर गिरते उल्कापिंड जो अपने साथ बर्फ के रूप में पानी तथा कुछ अन्य महत्वपूर्ण तत्व लेकर आए।

जीवन की शुरुआत

हाँलाकि धरती के वायुमंडल में अभी भी ऑक्सीजन उपस्थित नहीं थी किन्तु समुद्र के अंदर जीवन की शुरुआत के लिए परिस्थितियाँ बहुत हद तक अनुकूल थी। जीवन के लिए आवश्यक सभी तत्व जैसे अमोनिया, नाइट्रोजन, कार्बन आदि समुद्र के भीतर बनी जलतापीय चिमनियों (Hydrothermal Vents) के माध्यम से पहुँच रहे थे। लिहाज़ा एक कोशकीय जीवों के रूप में जीवन की शुरुआत हुई। महत्वपूर्ण तत्वों के अतिरिक्त समुद्र में बनी इन्हीं जलतापीय चिमनियों (Hydrothermal Vents) से निकलने वाला गर्म लावा जीवन पनपने के लिए उचित तापमान भी उपलब्ध करा रहा था।

वायुमंडल में ऑक्सीजन तथा ओज़ोन परत का निर्माण

समय के साथ ये एककोशिकीय जीव विकसित हुए तथा तकरीबन 2.7 अरब वर्ष बाद सायनोबैक्टीरिया की उत्पत्ति हुई जिसने पेड़ पौधों की भाँति सूर्य के प्रकाश को उर्ज़ा के स्रोत के रूप में प्रयोग करना शुरू किया तथा ऑक्सीजन उत्सर्जित करने लगा। इस प्रक्रिया को हम प्रकाश संश्लेषण के रूप में जानते हैं। ऐसे ही खरबों सूक्ष्मजीवों ने करोड़ों वर्षों के बाद धरती के वायुमंडल को ऑक्सीजन से भर दिया। ऑक्सीजन के होने से पृथ्वी को ओज़ोन परत के रूप में एक सुरक्षा कवच मिला जिसके परिणामस्वरूप सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणे पृथ्वी तक नहीं पहुँच सकती थी। पृथ्वी पर जीवन के विकास के लिए यह एक महत्वपूर्ण घटना थी।

origin of life under sea
एक कोशिकीय जीव के रूप में जीवन की शुरुआत

ओज़ोन परत का निर्माण हो जाने से पृथ्वी पर जीवन महासागरों से बाहर आने लगा। समुद्र में रहने वाले जीव खुद को जमीन पर रहने योग्य बनाने लगे। आवश्यकता के अनुसार इन जीवों में विभिन्न प्रकार के शारिरिक अंगों का निर्माण होने लगा। लगभग 23 करोड़ साल पूर्व कुछ जीव विकसित होकर एक विशालकाय जीव में परिवर्तित हो गए जिन्हें डायनासोर के नाम से जाना जाता है। इनके विशालकाय शरीर के कारण पारिस्थितिक तंत्र पर इनका राज़ स्थापित हो गया। लिहाज़ा कुछ जीवों ने डायनासोर से अपनी रक्षा के लिए खुद को शारिरिक रूप से विकसित किया। ऐसे जीवों में दिमाग विकसित हुआ, उनका शरीर छोटा होने लगा ताकि वे डायनासोर की नज़रों में आसानी से न आ सके, उनमें सूंघने एवं देखने की जबरदस्त काबिलियत विकसित हुई और अंडे देने के बजाए बच्चे पैदा करने का गुण विकसित हुआ। यही से स्तनधारी जीवों की शुरुआत हुई। 

महाप्रलय

लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पूर्व मैक्सिको के निकट एक 10 किलोमीटर लंबा उल्का पिंड धरती से टकराया जिसके कारण धरती पर महाप्रलय जैसे हालत बन गए। धरती का तापमान अत्यधिक बढ़ गया, उच्च तीव्रता की भूकंपीय तरंगे प्रत्येक दिशा में बढ़ने लगी, महासागरों में भयानक सुनामी आने लगी, अनेक स्थानों पर ज्वालामुखी विस्फोट हुए, धूल तथा धुएं से सारा वायुमंडल भर गया जिससे सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुँच सकी। इस महाप्रलय के चलते 15 करोड़ सालों से राज़ कर रहे डायनासोर समेत 75 फीसदी जीवों का अंत हो गया। केवल वही जीव बचे जिनका शरीर छोटा लगभग 25 किलोग्राम का था।

asteroid coming towards earth
अंतरिक्ष से धरती पर गिरता उल्का पिंड

धीरे धीरे धरती पुनः सामान्य अवस्था में आई तथा विनाशकारी घटना में बच गए जीव विकसित हुए। इन जीवों में स्तनधारी भी शामिल थे जिनसे भविष्य में मानव की उत्पत्ति होने वाली थी। समय के साथ इन जीवों ने जिंदा रहने की काबिलियत विकसित की। इन जीवों की अगली पीढ़ियाँ भविष्य में खाने की तलाश में धरती के अलग अलग हिस्सों में निवास करनें लगी तथा भिन्न भौगोलिक दशाओं के चलते ये जीव विकसित होकर नए जीवों में परिवर्तित हो गए।

इंसानों की उत्पत्ति

महाप्रलय में जीवित बचे चूहे के आकार के स्तनधारी प्राणीयों ने खाने की तलाश में पेड़ों पर चड़ने का गुण प्राप्त किया और विकसित होकर किसी वानार का रूप लिया ये पेरोलापिथिकस थे। आगे चलकर जलवायु तथा भौगोलिक स्थिति बदलने के कारण इन्हीं से कुछ चिंपेंजी तथा गुरिल्ला में विकसित हुए जबकि कुछ इंसानों में विकसित होना शुरू हो गए। इन्होनें दो पैरों पर खड़ा होना सीखा, पत्थरों को औज़ार बनाकर शिकार करना सीखा, आग की खोज की तथा विकसित होकर वर्तमान रूप में आए। 

 

Human Evolution
Origin of Life on Earth in Hindi

 

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