क्या हैं बौद्धिक सम्पदा अधिकार?(Intellectual Property Rights in Hindi)

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बौद्धिक संपदा (Intellectual Property)

किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह की कोई कृति, जो समाज के लिए उपयोगी हो तथा सृजनकर्ता (Creator) के लिए भी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो बौद्धिक सम्पदा(Intellectual Property) कहलाती है एवं किसी भी सृजनकर्ता को इस सम्पदा की सुरक्षा के लिए दिए जाने वाले अधिकार बौद्धिक सम्पदा अधिकार (Intellectual Property Rights) कहलाते हैं। ये अधिकार किसी देश के भीतर वैधानिक प्रक्रिया द्वारा निश्चित समयावधि एवं शर्तों के साथ प्रदान किये जाते हैं।

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अधिकारों के प्रकार

बौद्धिक संपदा अधिकार मुख्यतः 6 प्रकार के होते हैं।

  1. कॉपी राइट (Copyright)
  2. ट्रेड मार्क (Trademarks)
  3. ट्रेड सीक्रेट (Trade Secret)
  4. इंडस्ट्रियल डिज़ाइन (Industrial Design)
  5. पेटेंट (Patents)
  6. भौगोलिक संकेतक टैग (Geographical Indication Tag)

कॉपी राइट ©

किसी सृजनकर्ता द्वारा साहित्य, कला एवं शिक्षा के क्षेत्र में सृजित कृतियों के लिए कॉपीराइट अधिकार दिया जाता है, उदाहरणार्थ कोई किताब, फ़िल्म, संगीत, चित्र इत्यादि। विभिन्न देशों में इस अधिकार के संबंध में अलग-अलग प्रावधान हो सकते हैं।

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भारत की बात करें तो यहाँ इस अधिकार की अवधि सृजनकर्ता के सम्पूर्ण जीवनकाल तथा उसकी मृत्यु के बाद 60 वर्षों तक होती है। इस अवधि के दौरान सृजनकर्ता की अनुमति के बिना उसकी कृति का उपयोग नहीं किया जा सकता। किन्तु उक्त अवधि के पश्चात यह अधिकार सार्वजनिक हो जाते हैं दूसरे शब्दों में ऐसी संपत्ति सार्वजनिक हो जाती है।

ट्रेड मार्क

किसी सेवा, संस्था अथवा उत्पाद का नाम तथा नाम के साथ जुड़ी कला, जैसे लोगो या कोई स्लोगन आदि ट्रेडमार्क कहलाते हैं तथा ट्रेडमार्क अधिकार द्वारा संरक्षित होते हैं, ताकि उनका प्रयोग एक ही संस्था द्वारा किया जा सके और उस संस्था की एक विशिष्ट पहचान बनी रहे। उदाहरणार्थ कोका कोला कंपनी का नाम एवं उसकी लिखावट ट्रेडमार्क अधिकार के तहत संरक्षित है। फलस्वरूप किसी अन्य व्यक्ति या कंपनी द्वारा इनका प्रयोग नहीं किया जा सकता।

ट्रेड सीक्रेट

जब किसी उत्पाद के उत्पादन की प्रक्रिया में किसी पदार्थ के मिश्रण से उस उत्पाद में कुछ विशिष्ट गुण उत्पन्न हो जाते हैं एवं उस गुण से उत्पाद का महत्व बढ़ जाता है, तो यह विशेष पदार्थ एवं उत्पादन की प्रक्रिया ट्रेड सीक्रेट कहलाती है।

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उस विशेष पदार्थ और उत्पादन की प्रक्रिया को गोपनीय रखा जाता है एवं यह गोपनीयता ट्रेड सीक्रेट अधिकार के तहत सुरक्षित होती है। उदाहरणों की बात करें तो आपने कोका-कोला के विशिष्ट स्वाद के बारे में अवश्य सुना होगा उसका यह स्वाद ट्रेड सीक्रेट के तहत ही सुरक्षित है। इसके अतिरिक्त ट्रेड सीक्रेट का एक अन्य उदाहरण KFC चिकन भी है। 

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इंडस्ट्रियल डिज़ाइन

इस अधिकार द्वारा किसी उत्पाद के डिज़ाइन को सुरक्षित रखा जाता है, जिसमें उत्पाद का आकार, रंग, संरचना तथा विमाओं को शामिल किया गया है। उदाहरण के रूप में ऐप्पल कंपनी के स्मार्टफोन आईफोन का होम बटन इसी अधिकार द्वारा संरक्षित है अतः कोई अन्य स्मार्टफोन कंपनी इस डिज़ाइन का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

पेटेंट

पेटेंट औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आविष्कारों पर दिया जाने वाला अधिकार है। पेटेंट किसी देश में निश्चित समय सीमा एवं शर्तों के साथ दिया जाता है। कोई भी व्यक्ति पेटेंट की अवधि तक सृजनकर्ता की अनुमति के बिना उस अविष्कार का उपयोग नहीं कर सकता। सृजनकर्ता चाहे तो अपने पेटेंट का पूर्ण एवं आंशिक भाग बेच भी सकता है। भारत में विभिन्न क्षेत्रों में पेटेंट की अवधि सामान्यतः 20 वर्ष है, इसके पश्चात वह अविष्कार सार्वजनिक हो जाता है। भारत में यह व्यवस्था पेटेंट अधिनियम 1970 से संचालित होती है।

भौगोलिक संकेतक (GI Tags)

कोई प्राकृतिक तथा मानव निर्मित उत्पाद, जिसका महत्व किसी भौगोलिक स्थान विशेष अथवा किसी परंपरागत प्रक्रिया के कारण होता है उस उत्पाद को भौगोलिक संकेतक(Geographical Indicator) कहा जाता है। एसे उत्पादों को भौगोलिक संकेतक टैग या GI Tag प्रदान कर संरक्षित किया जाता है। GI टैग के कारण किसी उत्पाद का आर्थिक महत्व बढ़ जाता है। भारत में यह व्यवस्था भारतीय भौगोलिक संकेतक एवं वस्तु अधिनियम 1999 द्वारा संचालित होती है।

भारत में पहला GI टैग दार्जिलिंग चाय को 2004 में दिया गया। भारत सरकार द्वारा समय-समय पर विशिष्ट प्राकृतिक तथा मानव निर्मित उत्पादों को GI टैग दिया जाता है। वर्तमान में देश के 350 से अधिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक का दर्ज़ा मिल चुका है। इनमें मणिपुर के काले चावल, हिमांचल के चूली तेल तथा काला जीरा, कश्मीरी केसर, कोविलपट्टी (तमिलनाडु) की कदलाई मिठाई आदि को हाल ही में शामिल किया गया है।

बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की एतिहासिक पृष्ठभूमि (History of IPR)

वैश्विक स्तर पर बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights in Hindi) के संबंध में सर्वप्रथम पेरिस में 1883 में एक सम्मेलन आयोजित किया गया। यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता था, जिसके माध्यम से कोई आविष्कारक अपने नवाचारों की रक्षा कर सकता था, भले ही उसका उपयोग अन्य देशों में किया जा रहा हो।

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इसके पश्चात 1886 में स्विट्जरलैंड के बर्न में हुए एक समझौते के तहत साहित्यिक और कलात्मक कार्यों के संरक्षण पर भी बल दिया गया। साल 1891 में स्पेन के मैड्रिड में हुए एक अन्य सम्मेलन के द्वारा ट्रेडमार्क के पंजीकरण और प्रबंधन की व्यवस्था की गई। 1893 में, बौद्धिक संपदा संरक्षण के लिए यूनाइटेड इंटरनेशनल ब्यूरो का गठन किया गया। यह संगठन पेरिस और बर्न दोनों समझौतों को संचालित करने के लिए एक सामान्य मंच था। संगठन को इसके फ्रेंच संक्षिप्त नाम BIPRI के रूप में जाना जाता था।

1970 में BIPRI विश्व बौद्धिक संपदा संगठन में बदल गया, जिसे WIPO कहा जाता है। 1974 में WIPO बौद्धिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने और आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा के लिए एक विशेष एजेंसी के रूप में संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा बन गया। वर्तमान में दुनियाँ भर में WIPO के 193 सदस्य देश हैं।

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