आयकर रिटर्न (Income Tax Return) क्या है तथा ऑनलाइन आयकर रिटर्न कैसे भरें?

हमारा संविधान नागरिकों को कई तरह के अधिकार प्रदान करता है, ताकि नागरिक देश के भीतर एक गरिमामयी जीवन जी सकें, किन्तु अधिकारों के विपरीत नागरिकों के देश के प्रति कुछ कर्तव्य भी हैं, जिनमें समय पर आयकर (Income Tax) का भुगतान करना एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

आयकर से हम सभी वाकिफ़ हैं, यह केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाने वाला एक प्रत्यक्ष कर है, जो नागरिकों की आय पर आय के अनुसार अलग-अलग दरों से आरोपित किया जाता है। आज इस लेख के माध्यम से चर्चा करेंगे आयकर से संबंधित एक महत्वपूर्ण विषय आयकर रिटर्न की, समझेंगे आयकर रिटर्न (Income Tax Return in Hindi) क्या है, किसे एवं क्यों भरना चाहिए तथा इसे कैसे भरा जा सकता है।

क्या है आयकर रिटर्न (Income Tax Return)?

आयकर रिटर्न किसी व्यक्ति का एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के दौरान सम्पूर्ण वित्तीय लेखा-जोखा होता है, जिसे आयकर विभाग में दाखिल करना होता है। इसके अंतर्गत उस वित्तीय वर्ष के दौरान व्यक्ति द्वारा समस्त स्रोतों से अर्जित आय, खर्च, निवेश, कुल भुगतान किया गया कर, समस्त देनदारियाँ आदि शामिल होती हैं। इस दस्तावेज के माध्यम से कोई व्यक्ति एक वर्ष की समस्त आर्थिक लेन-देन की जानकारी सरकार को देता है।

किसे भरना होता है?

जैसा कि, हमनें ऊपर बताया आयकर रिटर्न किसी व्यक्ति का एक वित्त वर्ष के दौरान सम्पूर्ण आर्थिक लेखा-जोखा है अतः इसे किसी भी व्यक्ति द्वारा भरा जा सकता है, चाहे उसकी वार्षिक आय कर के अधीन आती हो अथवा नहीं। हालाँकि ऐसे व्यक्ति, जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख से कम है उनके लिए आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य नहीं है ऐसे व्यक्ति जीरो आईटीआर भर सकते हैं।

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गौरतलब है कि, आयकर रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल करना आयकर (Income Tax) भरना नहीं है यह मात्र किसी व्यक्ति का आर्थिक ब्यौरा है। ऐसे सभी व्यक्ति, जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपयों से अधिक हो उनके लिए आयकर रिटर्न भरना आवश्यक है। इसके अलावा भारत में पंजीकृत किसी भी फर्म अथवा कंपनी के लिए आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है, इस स्थिति में उनकी आय मायने नहीं रखती।

आयकर रिटर्न के विभिन्न फार्म

आयकर विभाग द्वारा आयकर रिटर्न (Income Tax Return in Hindi) भरने के लिए 7 अलग-अलग फॉर्म जारी किये जाते हैं, प्रत्येक व्यक्ति को उसकी आय अथवा आय के स्रोतों के आधार पर किसी एक फॉर्म को भर के जमा करना होता है। आइए जानते हैं आयकर विभाग द्वारा जारी किये जाने वाले प्रत्येक फॉर्म तथा इन्हें भरने के लिए आवश्यक शर्तों को-

ITR-1 (सहज) : यह निवासी व्यक्तियों (Resident Individuals) द्वारा दाखिल किया जाता है, जिनकी अधोलिखित स्रोतों यथा वेतन, एक घर की संपत्ति, अन्य स्रोत (लॉटरी तथा घुड़दौड़ की जीत से प्राप्त आय तथा कैपिटल गेन को छोड़कर), कृषि (₹ 5,000 तक की आय) से कुल वार्षिक आय 50 लाख तक हो। इसके अतिरिक्त कोई व्यक्ति, जो किसी कंपनी में निदेशक (Director) के पद पर है, किसी गैर-सूचित कंपनी (Unlisted) में शेयरधारक है, भारत के बाहर कोई परिसंपत्ति रखता है, ITR-1 को भरने के लिए योग्य नहीं होगा।

ITR-2 : यह ऐसे व्यक्तियों अथवा हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) द्वारा भरा जाता है, जिनकी व्यवसाय तथा पेशे (Business and Profession) के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से आय होती है। गौरतलब है कि, ITR-1 के विपरीत यहाँ अन्य किसी प्रकार के प्रतिबंध शामिल नहीं हैं, उदाहरण के तौर पर ITR-1 में केवल एक घर की संपत्ति से होने वाली आय की स्थिति में ही भरा जा सकता था, जबकि यहाँ ऐसी कोई शर्त नहीं है।

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ITR-3 : यह ITR-2 का और अधिक विस्तृत रूप है, यह फॉर्म भी निवासी व्यक्तियों तथा हिन्दू अविभाजित परिवारों के लिए है, ITR-2 के विपरीत इसे किसी व्यवसाय तथा पेशे (Business and Profession) से प्राप्त आय की स्थिति में भरा जा सकता है।

ITR-4 (सुगम) : यह फॉर्म निवासी व्यक्तियों, HUFs तथा फर्मों (LLP के अतिरिक्त) के लिए है, जिनकी एक घर की संपत्ति, कृषि (₹ 5,000 तक की आय) एवं आयकर अधिनियम की धारा 44AD, 44ADA तथा 44AE के तहत व्यवसाय एवं पेशे से प्राप्त कुल आय 50 लाख तक हो। ITR-1 की तरह यदि कोई व्यक्ति, जो किसी कंपनी में निदेशक (Director) के पद पर है, किसी गैर-सूचित कंपनी (Unlisted) में शेयरधारक है, भारत के बाहर कोई परिसंपत्ति रखता है, ITR-4 कोई भरने के लिए योग्य नहीं होगा।

ITR-5 : यह फॉर्म किसी (i) व्यक्ति, (ii) HUF, (iii) कंपनी तथा (iv) ITR-7 दाखिल करने वाले व्यक्ति को छोड़कर अन्य जैसे Limited Liability Partnership (LLPs), Firms, Association of Persons, Cooperative Societies आदि द्वारा भरा जाता है।

ITR-6 : यह फॉर्म कंपनियों द्वारा भरा जाता है, जो कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत हैं तथा आयकर अधिनियम की धारा 11 के तहत छूट का दावा नहीं करती हैं।

ITR-7 : यह ऐसे व्यवसाय सहित उन सभी लोगों के लिए है, जिन्हें आयकर अधिनियम की धारा 139(4A), धारा 139(4B), धारा 139(4C), धारा 139(4D), धारा 139 (4E) या 139 (4F) के तहत आयकर रिटर्न फाइल करना आवश्यक है। इस श्रेणी में मुख्यतः धार्मिक ट्रस्ट, राजनीतिक दल, अस्पताल, समाचार संस्थाएं, विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक अनुसंधान आदि शामिल हैं।

कैसे भरें आयकर रिटर्न

वर्तमान में ऑनलाइन माध्यम से आयकर रिटर्न भरना बेहद आसान एवं सुविधाजनक है। यहाँ हमनें विभिन्न चरणों में ऑनलाइन आयकर रिटर्न फ़ाइल करने के विषय में समझाया है।

पहला चरण : ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करने के लिए आयकर विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कर लॉग इन करें। ऑनलाइन पोर्टल में लॉग इन करने के बाद, ‘e-File’ टैब पर क्लिक करें और फिर ‘आयकर रिटर्न फाइल करें’ पर क्लिक करें।

दूसरा चरण : अब उस निर्धारण वर्ष (Assessment Year) का चयन करें, जिसके लिए आप अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना चाहते हैं तथा ‘Continue‘ पर क्लिक करें।

तीसरा चरण : इस चरण में आपसे अपना रिटर्न दाखिल करने के माध्यम के विषय में पूछा जाएगा, जिसे आप अपने अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन चुन सकते हैं। चूँकि हम यहाँ ऑनलाइन रिटर्न भरने के विषय में बता रहें हैं अतः आगे के चरण उसी स्थिति में लागू होंगे यदि आप ऑनलाइन विकल्प का चुनाव करते हैं।

चौथा चरण : अब आपसे आपके स्टेटस जैसे Individual, HUF या Others के बारे में पूछा जाएगा इसे अपने अनुसार भरें तथा ‘Continue‘ पर क्लिक कर जो भी लागू होता हो उस ITR फॉर्म का चयन करें।

पाँचवां चरण : इसके बाद आपसे आयकर रिटर्न दाखिल करने के कारण के विषय में पूछा जाएगा अपने अनुसार उपयुक्त विकल्प का चुनाव करें तथा ‘Continue‘ पर क्लिक करें।

छठा चरण : इस चरण में आपको आपकी विभिन्न जानकारियों जैसे Personal Information, Gross Income, Total Deduction, Tax Paid, Total Tax Liabilities जैसी जानकारियाँ जो कि, पहले से दर्ज (Pre-Filled) होंगी उनका सत्यापन करना होगा। गौरतलब है कि, पहले से दर्ज किसी जानकारी के गलत होने या जानकारी के दर्ज न होने पर स्वयं सही जानकारी दर्ज करें।

सातवां चरण : अब आपकी कंप्यूटर स्क्रीन में आपके द्वारा चयनित ITR फॉर्म खुल जाएगा, जिसमें आपकी समस्त जानकारियाँ दर्ज होंगी। सभी जानकारियों को जाँचें और सुनिश्चित करें कि, उक्त सभी विवरण सही हैं। इसके पश्चात “Proceed to Validation” पर क्लिक करें।

आठवाँ चरण : “Validation” हो जाने के पश्चात “Proceed to Verification” पर क्लिक करें, यहाँ आप कई माध्यमों से सत्यापन करवा सकते हैं, जिनमें सबसे आसान तरीका आधार द्वारा सत्यापन है। एक बार सत्यापन हो जाने के पश्चात आपका आयकर रिटर्न सफलता पूर्वक भरा जाएगा।

आयकर रिटर्न भरने के फायदे

आयकर रिटर्न भरना एक जिम्मेदार नागरिक का प्रमाण तो है ही इसके साथ ही यह रिटर्न दाखिल करने वाले व्यक्ति को कई अन्य लाभ भी देता है, इनमें से कुछ महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं-

आय का प्रमाण : आयकर रिटर्न फाइल करने पर मिलने वाला प्रमाण पत्र, किसी व्यक्ति की आय का प्रामाणिक दस्तावेज होता है, जिससे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। चूँकि यह किसी व्यक्ति की आय का सरकारी प्रमाण है अतः इस प्रमाण पत्र के माध्यम से क्रेडिट कार्ड अथवा लोन के लिए आवेदन करने में सहूलियत होती है।

विदेश यात्रा में सहायक : किसी विदेश यात्रा करने में उस देश का वीजा एक अनिवार्य दस्तावेज है और इस अनिवार्य दस्तावेज को प्राप्त करने में आयकर रिटर्न का प्रमाण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी सहायता से यात्री की आर्थिक स्थिति का आँकलन किया जाता है।

कर में छूट प्राप्त करने हेतु : TDS/TCS एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें किसी इम्प्लॉयर द्वारा व्यक्ति की आय से ही टैक्स काट लिया जाता है, ताकि कर्मचारी को स्वयं टैक्स ना भरना पड़े, किन्तु इस व्यवस्था के चलते कई दफ़ा किसी व्यक्ति की आय से ऐसी स्थिति में भी TDS/TCS काट लिया जाता है, जबकि उसकी कुल वार्षिक आय टैक्स के दायरे से बाहर हो, ऐसे में आयकर रिटर्न दाखिल कर रिफ़ंड प्राप्त किया जा सकता है।

निवेश में हुए नुकसान से भरपाई : हमनें “शेयर बाजार के मुनाफे में लगने वाले टैक्स” वाले लेख में बताया था, कि, बाजार में किये किसी निवेश में हुए नुकसान की अगले कुछ सालों (निवेश की प्रकृति के अनुसार) तक भरपाई की जा सकती है। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए आयकर रिटर्न भरना बेहद आवश्यक है, यही एक दस्तावेज है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि, निवेशक को किसी वित्तीय वर्ष के दौरान निवेश में नुकसान हुआ है।

अधिक बीमा कवर में सहायक : एक करोड़ अथवा उससे अधिक के बीमा कवर या टर्म प्लान के लिए आयकर रिटर्न की आवश्यकता होती है, ताकि बीमा कंपनियाँ बीमाधारक की आर्थिक स्थिति तथा वित्तीय व्ययहार का अंदाज़ा लगा सकें।

कारोबार में सहायक : किसी कारोबार की शुरुआत करने में भी आयकर रिटर्न सकारात्मक भूमिका अदा करता है। समय पर भरा गया आयकर रिटर्न निवेशक को किसी कारोबार में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है, इसके अतिरिक्त किसी सरकारी ठेके इत्यादि के आवेदन हेतु भी यह अनिवार्य दस्तावेज है।

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