IDBI Bank Privatization: प्राइवेट होने जा रहा है देश का ये बड़ा बैंक, सरकार बेचेगी अपनी 30.48% हिस्सेदारी

केंद्र की मोदी सरकार देश के बड़े बैंक IDBI (Industrial Development Bank of India) में अपनी हिस्सेदारी को बेचने की तैयारी में है। सरकार ने इसके लिए शुक्रवार 7 अक्टूबर, 2022 को प्रारंभिक सूचना ज्ञापन (Preliminary Information Memorandum) जारी करके मैनेजमेंट कंट्रोल के ट्रांसफर के साथ आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है।

IDBI बैंक के वर्तमान शेयरहोल्डिंग पैटर्न को देखें तो केंद्र सरकार के पास 488.99 करोड़ शेयरों के साथ आईडीबीआई बैंक की 45.48 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि Life Insurance Corporation of India (LIC) के पास 529.41 करोड़ शेयरों के साथ बैंक की कुल 49.24 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा सार्वजनिक शेयरधारकों की बात करें तो उनके पास IDBI बैंक की कुल 5.2 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

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सरकार और LIC दोनों आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रहे हैं। भारत सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी वहीं भारतीय जीवन बीमा निगम बैंक में अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी को बेचने की तैयारी में है। इन दोनों को जोड़ा जाए तो सरकार तथा LIC कुल मिलाकर बैंक की 60.72% हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं। हिस्सेदारी बिक्री के बाद एलआईसी और सरकार की संयुक्त हिस्सेदारी 94.72 फीसदी से घटकर 34 फीसदी रह जाएगी।

बोली के लिए आवश्यक शर्तें

सरकार ने शुक्रवार को आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के लिए बोलियां आमंत्रित की और बताया कि, वह एलआईसी के साथ मिलकर वित्तीय संस्थान में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। सरकार ने बैंक की हिस्सेदारी खरीदने वाले निवेशकों के लिए कुछ शर्तों का निर्धारण भी किया है। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के अनुसार, बैंक की हिस्सेदारी खरीदने वाले निवेशक के पास कम से कम 22,500 करोड़ रुपये या $2.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कुल संपत्ति होनी चाहिए और साथ ही पिछले पाँच वर्षों में से तीन वर्षों में शुद्ध लाभ अर्जित किया होना चाहिए।

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नीलामी की इस प्रक्रिया में जो कोई निवेशक बैंक की हिस्सेदारी प्राप्त करने में सफल रहेगा उसे अधिग्रहण की तारीख से पांच वर्षों तक इक्विटी पूंजी का कम से कम 40 प्रतिशत अनिवार्य रूप से लॉक-इन करना होगा। बता दें कि, बड़े औद्योगिक अथवा कॉरपोरेट घरानों या संबंधित व्यक्तियों को बोली प्रक्रिया से बाहर किया गया है। IDBI बैंक के निजीकरण की इस नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने या Expressions of Interest (EoI) जमा करने की अंतिम तिथि 16 दिसंबर है।

IDBI बैंक को बेचने की प्रक्रिया

IDBI बैंक के शेयर शुक्रवार को National Stock Exchange (NSE) पर पिछले ट्रेडिंग दिन के मुकाबले 0.83 फीसदी की बढ़त के साथ 42.70 रुपये पर बंद हुए। आईडीबीआई बैंक के वर्तमान शेयर के भाव को देखते हुए सरकार और एलआईसी द्वारा बेची जा रही 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी का कुल मूल्य लगभग 27,800 करोड़ रुपये से अधिक है।

आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के लिए दीपम (DIPAM) द्वारा लाए गए प्रारंभिक सूचना ज्ञापन (Preliminary Information Memorandum) में बताया गया है कि, निजी क्षेत्र के बैंक, विदेशी बैंक, आरबीआई-पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां, सेबी पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs), कोई फंड या इन्वेस्टमेंट व्हीकल जो भारत के बाहर निगमित है इन सभी को निजी या कंसोर्टियम के रूप में बोलियां जमा करने की अनुमति होगी।

आईडीबीआई बैंक का अधिग्रहण एफडीआई (Foreign Direct Investment) के नियमों द्वारा शासित होगा जो अनुमोदन मार्ग के माध्यम से (Approval route) बैंकों में 74 प्रतिशत और स्वचालित मार्ग के माध्यम से (Automatic route) 49 प्रतिशत विदेशी हिस्सेदारी की अनुमति देता है। किसी भी परिस्थिति में, बैंक की कुल पेड-अप कैपिटल का कम से कम 26 प्रतिशत देश के निवासियों के पास होना आवश्यक है।

PIM के अनुसार जिस कीमत पर आईडीबीआई बैंक के इक्विटी शेयरों को भारत से बाहर के किसी व्यक्ति को हस्तांतरित किया जाएगा वह Securities and Exchange Board of India (SEBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार तय की गई कीमत अनुसार ही होगी। सफल बोलीदाता को आईडीबीआई बैंक के सार्वजनिक शेयरधारकों जिनके पास बैंक की कुल 5.2% हिस्सेदारी है के लिए एक ओपन ऑफर भी लाना होगा। बता दें कि, सेबी के नियमानुसार जब कोई व्यक्ति किसी सूचीबद्ध कंपनी में 25% से अधिक हिस्सेदारी अधिग्रहित करता है तो उसे सार्वजनिक शेयरधारकों के लिए एक बाय-आउट ऑफर लाना अनिवार्य होता है।

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आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की घोषणा सबसे पहले 2021-22 के केंद्रीय बजट में करी गई थी, जिसके बाद आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने मई 2021 में रणनीतिक विनिवेश और मैनेजमेंट कंट्रोल के हस्तांतरण हेतु सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा बैंक की कुल पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल का 51 प्रतिशत प्राप्त करने के परिणामस्वरूप, 21 जनवरी, 2019 से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा आईडीबीआई बैंक को निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकृत कर दिया गया।

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