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Fossil Fuel its Formation Uses and Future Explained in Hindi

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में जहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन कमाई तथा यात्रा एवं पर्यटन जैसे क्षेत्रों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं। आज इस लेख में हम बात करेंगे जीवाश्म ईंधन के बारे में जानेंगे इसके निर्माण की प्रक्रिया, उपयोग, नुकसान तथा भविष्य में इसके दूसरे विकल्पों को। (Fossil Fuel its Formation, Uses and Future Explained in Hindi)

ईंधन (Fuel)

हमें अपने दैनिक जीवन में सभी कार्यों को करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। चाहे वह शारीरिक क्रियाओं का संचालन हो, कल कारखानों को चलाना हो, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग हो, यातायात साधनों का उपयोग हो या कोई अन्य कार्य। अतः हम कह सकते हैं हमारे जीवन में ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऊर्जा प्राप्त करने के लिए हम जिन पदार्थों का प्रयोग करते हैं उन्हें ईंधन कहा जाता है।

शारीरिक क्रियाओं के क्रियान्वयन के लिए हम मुख्यतः पेड़ पौधों तथा जंतुओं पर निर्भर रहते हैं जिनसे हमने ऊर्जा मिलती है। किंतु शारीरिक क्रियाओं के अतिरिक्त जीवन के अन्य कार्यों के लिए हमें दूसरे ईंधनों की आवश्यकता होती है। उदाहरण की बात करें तो हम पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, कोयले का प्रयोग ऊर्जा प्राप्त करने के लिए बतौर ईंधन करते हैं , ईंधन के ये सभी प्रकार जीवाश्म ईंधन कहलाते हैं।

जीवाश्म ईंधन

जैसा की नाम से स्पष्ट है जीवाश्म ईंधन जैविक अवशेषों से बने ईंधन हैं। जीवाश्म ईंधन जीवों एवं वनस्पतियों के मृत अवशेषों से निर्मित होते हैं। वनस्पतियों के अवशेषों के अवसादीकरण से कोयले का निर्माण होता है वहीं सूक्ष्म जीवों आदि के मृत अवशेषों के अवसादीकरण द्वारा पेट्रोलियम या कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस का निर्माण होता है।

अवसादीकरण की प्रक्रिया में समय के साथ क्ले, मिट्टी तथा रेत की परतें इन मरे हुए समुद्री जीवों तथा वनस्पतियों के ऊपर जमा होती रहती है तथा करोड़ों साल की इस प्रक्रिया के बाद वनस्पतियों तथा सूक्ष्म जीवों के अवशेष अत्यधिक ताप और दबाव के कारण जीवाश्म ईंधन में परिवर्तित हो जाते हैं। चूँकि कोयले का निर्माण वनस्पतियों द्वारा हुआ है अतः यह भू-पर्पटी में पेट्रोलियम की तुलना में ऊपर ही प्राप्त हो जाता है। गौरतलब है कि जीवाश्म ईंधन के निर्माण की प्रक्रिया में करोड़ो वर्षों का समय लगता है। वर्तमान में पृथ्वी पर मिलने वाले तेल के भंडारों के निर्माण की शुरुआत डायनासोर के उत्पन्न होने से भी पूर्व हो चुकी थी। 

जीवाश्म इंधनों का उपयोग

कोयले की बात करें तो यह औद्योगीकरण की शुरुआत से ही ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। इसका मुख्य उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है। वर्तमान में देश में लगभग 70 फीसदी से अधिक विद्युत उत्पादन कोयले से किया जाता है। कोयले के अन्य उपयोगों में स्टील निर्माण, कल कारखानों में ऊर्जा की आपूर्ति आदि शामिल है। 

इसके अतिरिक्त पेट्रोलियम भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसका उपयोग केवल ऊर्जा की आपूर्ति तक सीमित नहीं है बल्कि इससे बनने वाले अनेकों उत्पादों का हम दैनिक जीवन में अन्य कार्यों में प्रयोग करते हैं। पेट्रोलियम को शुद्ध कर उससे विभिन्न उत्पाद निकाले जाते हैं जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, वैक्स तथा बिटुमिन। पेट्रोल, डीजल तथा केरोसिन का उपयोग आप जानते हैं, वैक्स का उपयोग कॉस्मेटिक्स, मोमबत्ती आदि बनाने में किया जाता है जबकि बिटुमिन सड़क निर्माण तथा पेंट इंडस्ट्री में उपयोग किया जाता है। पेट्रोलियम उत्पादों से ही पेट्रोकैमिकल का निर्माण होता है जिनसे प्लास्टिक, नायलॉन तथा पॉलिस्टर आदि का निर्माण किया जाता है।

petroleum products
कच्चे तेल के शुद्धिकरण से प्राप्त विभिन्न उत्पाद | सौ. टॉपर

जीवाश्म ईंधन के नुकसान एवं भविष्य

कोयला मुख्यतः कार्बन से बना होता है तथा पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन अर्थात हाइड्रोजन एवं कार्बन के यौगिक होते है अतः इन्हें जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन होता है जो एक ग्रीन हाउस गैस है तथा ग्लोबल वार्मिंग के लिए ज़िम्मेदार है। इसके अतिरिक्त अत्यधिक लंबे समयान्तराल में बनने के कारण इनका एक अन्य नुकसान इनकी सीमितता भी है दूसरे शब्दों में, ये ईंधन पृथ्वी पर सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। इन्हीं कारणों के चलते वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सोलर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि की तरफ ज़ोर दिया जा रहा है।

green energy
नवीकरणीय ऊर्जा की ओर कदम

 

उम्मीद है दोस्तो आपको ये लेख (Fossil Fuel its Formation, Uses and Future Explained in Hindi) पसंद आया होगा टिप्पणी कर अपने सुझाव अवश्य दें। अगर आप भविष्य में ऐसे ही रोचक तथ्यों के बारे में पढ़ते रहना चाहते हैं तो हमें सोशियल मीडिया में फॉलो करें तथा हमारा न्यूज़लैटर सब्सक्राइब करें एवं इस लेख को सोशियल मीडिया मंचों पर अपने मित्रों, सम्बन्धियों के साथ साझा करना न भूलें।

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