Equity Market Vs Commodity Market: जानें बाजार के ये दो प्रकार कैसे हैं एक दूसरे से अलग तथा आपको कहाँ करना चाहिए निवेश

एक दौर था जब वित्तीय बाजारों खासकर शेयर बाजार में निवेश करना आम इंसान के लिए संभव नहीं था, लेकिन समय के साथ बढ़ती इंटरनेट की पहुँच ने वर्तमान में हमें ऐसा करने की सुविधा दी है। आज हम अपने स्मार्टफोन से देश तथा दुनियाँ के बाजारों (फाइनेंशियल मार्केट्स) में आसानी से निवेश कर सकते हैं।

निवेश को ध्यान में रखते हुए हम आज चर्चा करने जा रहे हैं, वित्तीय बाजारों में निवेश करने के दो महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म्स इक्विटी मार्केट तथा कमोडिटी मार्केट (Equity Market Vs Commodity Market) की, यहाँ विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे ये दोनों एक दूसरे से कैसे अलग हैं तथा इनमें से आपको किस मार्केट में निवेश करना चाहिए।

Equity Market क्या है?

आमतौर पर हम, जिसे शेयर बाजार के रूप में संदर्भित करते हैं वह Equity Market ही है, इस बाजार सभी प्रकार की कंपनियों के शेयरों दूसरे शब्दों में कंपनियों की हिस्सेदारी को खरीदा या बेचा जाता है। किसी कंपनी के शेयर खरीदने पर निवेशक, खरीदे गए शेयरों की मात्रा के अनुसार उस कंपनी में मालिकाना अधिकार प्राप्त कर लेता है।

इक्विटी मार्केट में निवेशक छोटी अवधि के दौरान आने वाले उतार-चड़ाव के उलट एक लंबी अवधि के लिए निवेश करने पर केंद्रित रहता है। कोई इक्विटी धारक, निवेश की गई कंपनी के मालिक की तरह होता है, जिसके पास वोटिंग अधिकार, कंपनी के मुनाफे में हिस्सेदारी जैसे प्रिविलेज होते हैं।

Commodity Market क्या है?

जैसा कि, इसके नाम से पता चलता है Commodity Market ऐसा फाइनेंशियल मार्केट है, जहाँ विभिन्न प्रकार के उत्पादों, जिन्हें कमोडिटीज़ कहा जाता है की खरीद-बिक्री की जाती है। कमोडिटीज सामान्यतः कच्चा माल अथवा प्राथमिक उत्पाद जैसे गेहूँ, कॉफी, सोना, चाँदी, क्रूड ऑइल आदि होती हैं, जिनका दुनियाँ भर के बाजारों में कारोबार किया जा सकता है।

कमोडिटी मार्केट में अधिकांशतः वस्तुओं के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड किये जाते हैं, उदाहरण के लिए यदि आप एक फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं, तो आप निर्धारित कीमत पर कुछ ऐसा खरीदने के लिए सहमत हो रहे हैं, जो एक विक्रेता ने अभी तक उत्पादित नहीं किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट एक किसान तथा किसी कंपनी के मध्य हो सकता है, जिसमें एक निर्धारित कीमत पर किसान की फसल को फ्यूचर में खरीदने की शर्त हो।

हालाँकि कॉन्ट्रैक्ट में उल्लिखित शर्तों के अनुसार यह ट्रेड दो अलग-अलग तरीके का हो सकता है, जिनमें कैश सेटलमेंट तथा फिजिकल डिलीवरी शामिल हैं। कैश सेटलमेंट अर्थात किसी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति में उत्पाद की वर्तमान कीमत तथा पूर्व-निर्धारित कीमत के बीच के अंतर का आदान-प्रदान हो जाता है, वहीं फिजिकल डिलीवरी में इसके नाम के अनुरूप उत्पाद की वास्तविक डिलीवरी होती है।

Equity Market Vs Commodity Market

Equity Market Vs Commodity Market

आइए अब इन दोनों प्रकार के बाजारों के मध्य कुछ महत्वपूर्ण अंतरों को समझते हैं

ParameterEquity MarketCommodity Market
ट्रेड की जाने वाली वस्तु की प्रकृतिकिसी कंपनी की हिस्सेदारी, जो उस कंपनी में मालिकाना हक देती हैविभिन्न प्रकार की वस्तुओं, जिनका इस्तेमाल उपभोग करने या द्वितीयक उत्पाद बनाने में किया जाता है, के कॉन्ट्रैक्ट
निवेशकइक्विटी मार्केट में निवेशक को शेयरधारक कहा जाता हैकमोडिटी मार्केट में निवेशक को ऑप्शन होल्डर कहा जाता है
निवेश का मुख्य उद्देश्यकिसी शेयर में निवेश करके मुनाफ़ा कमाना इक्विटी मार्केट निवेशक का मुख्य उद्देश्य होता हैकमोडिटी मार्केट में निवेश का प्राथमिक उद्देश्य भविष्य में किसी वस्तु की कीमतों में आने वाले उतार-चड़ाव से बचना होता है
ट्रेड होने वाली वस्तुओं का वर्गीकरणइक्विटी मार्केट में ट्रेड होने वाले शेयर कंपनी की मार्केट कैप के अनुसार स्मॉल, मिड तथा लार्ज में विभाजित किये जाते हैंकमोडिटी मार्केट में कमोडिटीज को मुख्यतः बहुमूल्य, एनर्जी, धातुएं तथा कृषि उत्पादों में बाँटा जाता है
ट्रेडिंग वॉल्यूमइक्विटी मार्केट में किसी कंपनी के शेयरों को मनचाही मात्रा में खरीदा जा सकता हैकिसी कमोडिटी को केवल निर्धारित लॉट में ही खरीदा जा सकता है
ट्रेडिंग एक्सचेंजइक्विटी ट्रेडिंग NSE, BSE में की जाती हैकमोडिटी ट्रेडिंग MCX, ACE, NCDEX जैसे एक्सचेंज में की जाती है
ट्रेडिंग का समय सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 बजे तकसुबह 9:30 से शाम 6:30 बजे तक
बाज़ार पर वैश्विक प्रभावचूँकि कोई शेयर किसी कंपनी के प्रदर्शन पर अधिक निर्भर करता है अतः इक्विटी मार्केट में वैश्विक मुद्दों का प्रभाव कमोडिटी की तुलना में कम पड़ता हैकमोडिटी वस्तुएं हैं, जिन पर अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव बहुत अधिक पड़ता है जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आदि
निवेश में जोखिमइक्विटी मार्केट के निवेश में कम जोखिम होता हैकमोडिटी में निवेश करना इक्विटी की तुलना में अधिक जोखिम भरा होता है
वैधता इक्विटी मार्केट में कंपनी के शेयर खरीदे जाते हैं, जिनकी कोई एक्सपायरी नहीं होती हैकमोडिटी मार्केट में सामान्यतः कमोडिटीज़ के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरीदे जाते हैं, जिनकी एक निश्चित एक्सपायरी होती है
तरलता/लिक्विडिटीइक्विटी मार्केट में तरलता अधिक होती है अर्थात किसी कंपनी के शेयरों को कभी भी कैश में बदला जा सकता हैकमोडिटी मार्केट में निवेशक के पास केवल कॉन्ट्रैक्ट होता है, इसकी तरलता इक्विटी मार्केट की तुलना में कम होती है

आप कहाँ करें निवेश?

फाइनेंशियल मार्केट के दोनों रूपों तथा इनके मध्य मुख्य अंतरों को हमनें विस्तार से ऊपर समझा, ऐसे में आपको कहाँ निवेश करना चाहिए इसके लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि, निवेश के पीछे आपका उद्देश्य क्या है। चूँकि निवेश को लेकर हम में से अधिकांश का उद्देश्य कम जोखिम में अच्छा लाभ अर्जित करना होता है अतः इसके लिए इक्विटी मार्केट एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

इसके अतिरिक्त यदि आप किसी कमोडिटी जैसे गेहूँ, चावल, सोना आदि की आने वाले दिनों में क्या कीमतें रह सकती हैं यह अनुमान लगाने की क्षमता रखते हैं और आप इसमें पैसा लगाना चाहते हैं तो कमोडिटी ट्रेडिंग में भी अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। निवेश करने के लिए आपको एक डीमैट खाते की आवश्यकता होगी, जिसे आप जीरोधा के साथ बेहद कम शुल्क के साथ खोल सकते हैं।

डिसक्लेमर: किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें

Recent Articles

ADVERTISEMENT

Also Read This

error: Content is protected !!