क्रेडिट स्कोर क्या है (Credit Score in Hindi) तथा इसे कैसे बढ़ा सकते हैं?

किसी भी व्यक्ति, व्यवसाय अथवा अर्थव्यवस्था में आर्थिक गतिविधियों को संचालित करने हेतु मुद्रा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, किंतु कई परिस्थितियों में किसी व्यक्ति या कंपनी के पास आवश्यक मुद्रा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होती, इस स्थिति में ऋण या क्रेडिट आवश्यक आर्थिक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने में महत्वपूर्ण योगदान अदा करता है। बड़े-बड़े व्यवसायों से लेकर एक निजी व्यक्ति तक सभी को किसी न किसी कार्य के लिए ऋण अथवा क्रेडिट की आवश्यकता होती है।

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में, यहाँ हम अर्थव्यवस्था, प्रोद्योगिकी, विज्ञान जैसे अनेक विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी आप तक साझा करते हैं। आज इस लेख में हम चर्चा करेंगे क्रेडिट एवं इसकी आवश्यकता की साथ ही बात करेंगे अक्सर सुनाई देने वाले शब्द क्रेडिट स्कोर (Credit Score in Hindi) की, जानेंगे इसे कौन जारी करता है तथा किसी व्यक्ति के आर्थिक जीवन में इसकी क्या भूमिका है।

क्रेडिट एवं इसकी आवश्यकता

क्रेडिट किसी भी अर्थव्यवस्था में ईंधन का कार्य करता है। क्रेडिट की सहायता से ही नए उद्योग अथवा कंपनियाँ स्थापित हो पाती हैं। व्यवसायों के बढ़ने से रोजगार की दर में वृद्धि होती है और अंततः किसी स्थान विशेष की अर्थव्यवस्था फलती फूलती है। इसके अतिरिक्त क्रेडिट की सहायता से कोई कंपनी उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के लिए नए प्रयोग सुनिश्चित कर पाती है अथवा आवश्यक प्रोद्योगिकी, उपकरण इत्यादि खरीद पाती हैं। वहीं व्यक्तिगत स्तर पर भी क्रेडिट किसी उपभोक्ता को किसी वस्तु या सेवा को खरीदने में मदद करता है।

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यदि ऐसा कहा जाए कि सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था ही क्रेडिट पर टिकी हुई है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आपातकालीन स्थिति में क्रेडिट का उपलब्ध होना किसी भी व्यक्ति अथवा व्यवसाय को आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए मददगार साबित हो सकता है। क्रेडिट हमारे आर्थिक जीवन के लिए बेहद आवश्यक है। चूँकि किसी भी व्यक्ति को जीवन के किसी मोड़ पर साख की आवश्यकता हो सकती है अतः इसमें कोई दो राय नहीं है कि, किसी भी व्यक्ति के जीवन में एक अच्छा वित्तीय प्रबंधन का होना बेहद आवश्यक हो जाता है।

क्या है क्रेडिट स्कोर? (Credit Score in Hindi)

एक दौर था जब ऋण के नाम पर किसी व्यक्ति के पास साहूकार अथवा महाजन आदि का ही विकल्प उपलब्ध था, किन्तु समय के साथ वित्तीय संस्थानों की लोगों तक बढ़ती पहुँच ने आज लोगों के लिए क्रेडिट की उपलब्धता को कहीं आसान बना दिया है। विभिन्न बैंक तथा वित्तीय कंपनियाँ केवल एक स्मार्टफोन एप की मदद से साख उपलब्ध करवा रही हैं।

सामान्यतः बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों को किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति एवं उसके वित्तीय प्रबंधन के बारे में जानकारी नहीं होती, ऐसे में इनके लिए किसी व्यक्ति को किस सीमा तक ऋण या क्रेडिट मुहैया करवाया जाना चाहिए इसका निर्णय लेने में कठिनाई होती है। इस स्थिति में आवश्यकता होती है एक पैमाने की, जिसमें किसी व्यक्ति को उसके अच्छे या खराब आर्थिक व्यवहार के आधार पर मापा जा सके ताकि किसी भी वित्तीय संस्थान के लिए ऐसे व्यक्ति को किस सीमा तक ऋण मुहैया करवाया जाए इसका निर्णय लेने में आसानी हो। क्रेडिट स्कोर ऐसा ही एक पैमाना है।

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क्रेडिट स्कोर किसी व्यक्ति के आर्थिक व्यवहार का एक लेखा-जोखा या रिकॉर्ड है, जो बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों को उस व्यक्ति की क्रेडिट हिस्ट्री जानने में मदद करता है। इस रिकॉर्ड से किसी व्यक्ति द्वारा पूर्व में लिए गए ऋण अथवा उसके वित्तीय प्रबंधन के बारे में जानकारी मिलती है। इसे नंबरों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जो सामान्यतः 300 से 900 के मध्य होता है। जहाँ 900 स्कोर दर्शाता है, कि कोई व्यक्ति समय से अपने ऋण का भुगतान करता है वहीं 300 स्कोर ऐसे व्यक्तियों को दर्शाता है, जिनकी पूर्व में क्रेडिट हिस्ट्री अथवा वित्तीय प्रबंधन अच्छा नहीं रहा है।

कौन जारी करता है क्रेडिट स्कोर?

क्रेडिट स्कोर जारी करने का कार्य विभिन्न संस्थाएं, जिन्हें क्रेडिट ब्यूरो कहा जाता है करती हैं। कोई बैंक या वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों की ऋण से संबंधित सभी आर्थिक गतिविधियों जैसे ऋण, क्रेडिट कार्ड लेन-देन, ओवरड्राफ्ट सुविधा का इस्तेमाल आदि की जानकारी इन्हें मुहैया करवाती हैं। प्राप्त डेटा के आधार पर ये संस्थाएं किसी व्यक्ति विशेष या कंपनियों का स्कोर तय करती हैं।

भारत में क्रेडिट ब्यूरो

भारत में मुख्यतः चार क्रेडिट ब्यूरो संस्थाएं हैं, जो व्यक्तियों तथा व्यवसायों को क्रेडिट स्कोर (Credit Score in Hindi) प्रदान करती हैं। आइए इन एजेंसियों तथा क्रेडिट स्कोर प्रदान करने की इनकी प्रणाली को संक्षेप में समझते हैं।

TransUnion CIBIL : आपने कई परिस्थितियों में क्रेडिट स्कोर के स्थान पर सिबिल स्कोर का नाम सुना होगा। यह एक क्रेडिट ब्यूरो संस्था है तथा इसके द्वारा दिए जाने वाले क्रेडिट स्कोर को ही सिबिल स्कोर कहा जाता है। अन्य एजेंसियों की तुलना में इसके क्रेडिट स्कोर का अधिक इस्तेमाल किया जाता है। एजेंसी के अनुसार इनके प्रमुख बैंक, वित्तीय संस्थान, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों सहित 5,000 से अधिक सदस्य हैं तथा 1,000 मिलियन से अधिक व्यक्तियों और व्यवसायों के क्रेडिट रिकॉर्ड संस्था द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं। यह 300 से 900 के मध्य क्रेडिट स्कोर प्रदान करती है जिसमें 750 या उससे अधिक के स्कोर को उत्कृष्ट की श्रेणी में रखा गया है।

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Experian : Experian आयरलैंड आधारित विश्व की बड़ी क्रेडिट ब्यूरो संस्थाओं में शामिल है, जो दुनियाँ के तकरीबन 30 से अधिक देशों में कार्यरत है। भारत में 2006 में इसकी शुरुआत हुई तथा साल 2010 में इसे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा काम करने के लिए एक कार्यात्मक लाइसेंस प्रदान किया गया। यह भी 300 से 900 के मध्य क्रेडिट स्कोर प्रदान करती है।

Equifax : TransUnion तथा Experian समेत दुनियाँ की बड़ी क्रेडिट ब्यूरो संस्थाओं में Equifax भी शामिल है। 1899 में शुरू हुई यह कंपनी क्रेडिट स्कोर प्रदान करने का कार्य करती है, जिसे 2010 में भारत में क्रेडिट स्कोर देने का लाइसेंस दिया गया है। CIBIL के समान यह भी 300 से 900 तक क्रेडिट स्कोर प्रदान करती है। Equifax भारत समेत दुनियाँ के 20 से अधिक देशों में कार्यरत है। एजेंसी मुख्यतः क्रेडिट स्कोर, रिस्क स्कोर, कंपनियों और व्यवसायों के लिए क्रेडिट धोखाधड़ी रिपोर्ट, जोखिम प्रबंधन रिपोर्ट एवं अन्य रिपोर्ट जारी करती है।

CRIF High Mark Credit Information Services : High Mark Credit Information Services मुंबई आधारित यह एजेंसी 300 से 900 के मध्य क्रेडिट स्कोर प्रदान करती है, जिसमें 750 या इससे अधिक स्कोर को उत्कृष्ठ एवं 640 एवं इससे कम स्कोर को खराब क्रेडिट स्कोर की श्रेणी में रखा गया है। साल 2014 में इटली स्थित एक फर्म CRIF (क्रिफ़) ने कंपनी में 50 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी हासिल कर ली और इसका नाम बदलकर CRIF High Mark कर दिया गया। वर्तमान में यह दुनियाँ के लगभग 26 देशों में कार्यरत है।

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ऊपर बताए गए किसी भी क्रेडिट ब्यूरो से आप निर्धारित शुल्क का भुगतान करके अपना क्रेडिट स्कोर अथवा क्रेडिट रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। CIBIL द्वारा क्रेडिट रिपोर्ट तथा क्रेडिट स्कोर प्राप्त करने की कीमत 550 रुपये है, इसके अतिरिक्त Equifax में यह शुल्क 400 रुपये, Experian में 399 एवं CRIF Highmark में 399 रुपये है।

क्रेडिट ब्यूरो एवं क्रेडिट रेटिंग एजेंसी में अंतर (Difference Between Credit Bureau & Credit Rating Agency)

कई लोग क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों एवं क्रेडिट ब्यूरो को एक ही संस्था समझते हैं, जबकि ये दोनों एक दूसरे से भिन्न हैं। जहाँ क्रेडिट ब्यूरो किसी व्यक्ति अथवा व्यवसाय को उसके वित्तीय व्यवहार के आधार पर क्रेडिट स्कोर (Credit Score in Hindi) प्रदान करते हैं, वहीं क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां मुख्यतः निवेशकों को ध्यान में रखते हुए काम करती हैं, ये एजेंसियां किसी निवेशक को यह तय करने में मदद करती हैं, कि कोई कंपनी निवेश करने के लिहाज से कितनी सुरक्षित है।

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नंबरों के विपरीत ये एजेंसियां A, B, C, (AAA, BBB, AA) के आधार पर कंपनियों को रेटिंग देती हैं। प्रमुख रेटिंग कंपनियों में Credit Rating Information Services of India Limited (CRISIL), Credit Analysis and Research (CARE) Limited एवं Moody’s आदि शामिल हैं।

अच्छे क्रेडिट स्कोर के फायदे

अच्छे क्रेडिट स्कोर के आर्थिक रूप से कई फायदे हैं, अच्छे क्रेडिट स्कोर की सहायता से किसी व्यक्ति की विश्वशनीयता एवं आर्थिक स्थिरता का आँकलन किया जा सकता है। आइए इसके कुछ प्रमुख फ़ायदों पर नजर डालते हैं।

  • अच्छे क्रेडिट स्कोर होने के चलते इस बात की बहुत अधिक संभावनाएं रहती हैं, कि बैंक या वित्तीय संस्थानों द्वारा किसी व्यक्ति का ऋण बेहद कम समय में मंजूर कर दिया जाए।
  • अच्छा क्रेडिट स्कोर किसी व्यक्ति को सस्ती दरों पर ऋण मुहैया करवाने में भी मदद करता है।
  • अच्छे क्रेडिट स्कोर के चलते बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा किसी व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड जारी करने, पुराने क्रेडिट कार्ड को अपग्रेड करने अथवा उसकी खर्च सीमा में वृद्धि करने की संभावना बनी रहती है।
  • अच्छा क्रेडिट स्कोर ऋण प्राप्त करने में लगने वाला प्रक्रिया शुल्क तथा अन्य शुल्कों में आवेदक को छूट दिलवा सकता है।

इन सब के विपरीत खराब क्रेडिट स्कोर के नुकसनों को देखें तो यह इन सभी लाभों के विपरीत हैं। खराब क्रेडिट स्कोर वाले व्यक्ति के लिए ऋण या अन्य किसी भी प्रकार से क्रेडिट प्राप्त करना मुश्किल होता है।

क्रेडिट स्कोर को खराब करने वाले कारक

आइए अब उन कारणों को जानते हैं, जिनके चलते किसी व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर बिगड़ सकता है।

  • लिए गए ऋण की किसी भी किस्त के भुगतान में देरी क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर डालती है।
  • किसी व्यक्ति को जारी कीये गए क्रेडिट कार्ड में खर्च की एक सीमा निर्धारित होती है, अतः इस सीमा का 60% या उससे अधिक इस्तेमाल भी क्रेडिट स्कोर पर बुरा प्रभाव डालता है, यह किसी व्यक्ति के केवल क्रेडिट पर निर्भर रहने तथा खराब वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।
  • किसी एक समयावधि के दौरान अधिक क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करना भी क्रेडिट स्कोर के लिए नकारात्मक है, यह किसी व्यक्ति के खराब आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।
गौरतलब है कि किसी व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर केवल उसके द्वारा इस्तेमाल किये गए क्रेडिट या ऋण के आधार पर बनता है। डेबिट कार्ड, सामान्य बैंकिंग लेन-देन, इंटरनेट बैंकिंग आदि द्वारा किये गए भुगतान या लेन-देन का क्रेडिट स्कोर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

ऊपर बताए गए सभी कारकों पर ध्यान देकर न केवल क्रेडिट स्कोर (Credit Score in Hindi) को बिगड़ने से रोका जा सकता है, बल्कि एक अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाया भी जा सकता है। चूँकि भारत में बहुत कम लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, जिसके चलते अधिकांश लोगों को क्रेडिट स्कोर प्रदान करना संभव नहीं होता अतः क्रेडिट कार्ड का सही तरीके एवं जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल किसी व्यक्ति का एक अच्छा क्रेडिट स्कोर अथवा क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में मदद कर सकता है।

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