निवेश करनें के कुछ बेहतर विकल्प (Best Investment Schemes in Hindi)

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में जहाँ हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन कमाई तथा यात्रा एवं पर्यटन जैसे विषयों से महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक लेकर आते हैं। आज इस लेख में हम बात करेंगे निवेश करने के कुछ बेहतर विकल्पों के बारे में तथा देखेंगे किस प्रकार कुछ विशेष योजनाओं में निवेश करने से आप अच्छे रिटर्न (Best Investment Schemes in Hindi) के साथ सालाना 1.5 लाख तक की आय पर लगने वाले कर को भी बचा सकते हैं।

निवेश (Investment)

भविष्य के खर्चों की पूर्ति अथवा आर्थिक रूप से सुरक्षित एवं समृद्ध भविष्य के लिए हम सभी अपनी आय का कुछ भाग किसी न किसी रूप में निवेश करते हैं। बाज़ार में कई तरह की योजनाएं हैं जहाँ निवेश किया जा सकता है। इनमें कुछ विकल्प अत्यधिक जोखिम भरे हैं तथा उनमें मिलने वाला रिटर्न भी अधिक होता है वहीं कुछ तरीके सुरक्षित हैं किंतु उनमें रिटर्न कम प्राप्त होता है। इस लेख में हमनें निवेश करने के विभिन्न विकल्पों को निम्नलिखित दो श्रेणियों में विभाजित किया है।

  1. साधारण निवेश
  2. आयकर में छूट युक्त निवेश

साधारण निवेश

इसके अंतर्गत निवेश के ऐसे विकल्प शामिल हैं जिनमें निवेश की गई राशि आयकर से मुक्त नहीं है। जैसे शेयर बाज़ार, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरेंट डिपॉजिट आदि।

शेयर बाजार (Stock Market)

साधारण निवेश की श्रेणी में पहला विकल्प शेयर बाजार है। शेयर बाज़ार में आप किसी कंपनी के शेयर खरीद कर उस कंपनी में हिस्सेदार बनते हैं। भविष्य में कंपनी के अच्छे प्रदर्शन के फलस्वरूप यदि उसके शेयर की कीमतों में वृद्धि होती है तो उससे आपकी निवेश की गई पूँजी में भी वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त कई कंपनियाँ उनको होने वाले लाभ को भी अपने निवेशकों के साथ साझा करती है जिसे लाभांश या डिविडेन्ड कहा जाता है।

गौरतलब है की शेयर बाज़ार में लाभ के साथ जोखिम की भी संभावना बनी रहती है। यहाँ जोखिम तथा लाभ दोनों निवेश के अन्य तरीकों की तुलना में अधिक हैं। शेयर बाज़ार में निवेश करने के लिए डीमैट खाता खोलना अनिवार्य है। इसकी सुविधा वर्तमान में लगभग सभी बैंक तथा कुछ अन्य कंपनियाँ देती हैं।

यह भी पढ़ें –

  1. शेयर बाज़ार एवं इसकी कार्यप्रणाली 
  2.  शेयर बाज़ार में निवेश करने से पूर्व किन बातों का रखें ध्यान
  3. कैसे एवं कहाँ खोलें डीमैट खाता

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund)

जहाँ शेयर बाजार में आप स्वयं किसी कंपनी में निवेश करते हैं वहीं म्यूचुअल फंड कंपनियाँ निवेशकों से फंड इकट्ठा कर उसे शेयर बाजार तथा अन्य वित्तीय उपकरणों में निवेश करती हैं। अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अनुभव रखने वाले लोग ऐसे फंड का प्रबंधन करते हैं अतः सीधे शेयर बाजार में निवेश करने की तुलना में यहाँ जोखिम कुछ हद तक कम होता है। किसी कंपनी के शेयर की भाँति म्यूचुअल फंड भी युनिट में खरीदे जाते हैं। किन्तु किसी कंपनी के शेयर के विपरीत म्यूचुअल फंड में किसी युनिट को आंशिक रूप से भी खरीदा जा सकता है।

म्यूचुअल फंड में एकमुश्त अथवा किश्तों में निवेश करने का विकल्प उपलब्ध है। किसी म्यूचुअल फंड के प्रत्येक यूनिट की कीमत का उसके Net Asset Value या NAV से पता लगाया जा सकता है। म्यूचुअल फंड द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए निवेश के प्रदर्शन के अनुसार उसकी NAV अथवा प्रति युनिट की कीमत में वृद्धि या कमी होती है जिससे निवेशकों को क्रमशः लाभ अथवा हानि होती है।

यह भी पढ़ें – म्यूचुअल फंड एवं इसके विभिन्न प्रकार

सरकारी प्रतिभूतियाँ (Government Securities)

जिस प्रकार कोई कंपनी धन की आवश्यकता होने पर अपने शेयर बेचती है तथा रकम इकट्ठा करती है उसी प्रकार जब सरकार को किसी योजना अथवा अपने खर्चों की पूर्ति के लिए धन की आवश्यकता होती है तो वह सरकारी प्रतिभूतियों जिनमें बॉन्ड तथा ट्रेजरी बिल शामिल हैं को बाजार में जारी कर रकम जुटाती है। चूँकि इन्हें सरकार द्वारा जारी किया जाता है अतः यहाँ जोखिम बिल्कुल नहीं होता किन्तु रिटर्न भी शेयर बाज़ार तथा म्यूचुअल फंड में निवेश की तुलना में कम प्राप्त होता है। आइए सरकारी प्रतिभूतियों के प्रकारों पर एक नजर डालते हैं।

ट्रेजरी बिल : ऐसी सरकारी प्रतिभूति जो एक साल से कम अवधि क्रमशः 91, 182 तथा 364 दिनों के लिए जारी की जाती हैं उन्हें ट्रेजरी बिल या T-बिल कहा जाता है। इन्हें सरकार इनकी मूल कीमत से कम में जारी करती है तथा समयावधि पूर्ण होने पर मूल कीमत में खरीद लेती है। 

बॉन्ड एक साल से अधिक समय के लिए जारी की गई सरकारी प्रतिभूतियाँ बॉन्ड कहलाती हैं। बॉन्ड में निवेश करने पर निवेशकों को बॉन्ड की अवधि तक ब्याज दिया जाता है तथा अवधि के पूरा होने पर मूलधन लौटा दिया जाता है।

यह भी पढ़ें : सरकारी प्रतिभूतियाँ एवं विभिन्न प्रकार के सरकारी बॉन्ड

Fixed Deposit (FD)

FD या Fixed Deposit निवेश का एक सुरक्षित तरीका है। इसमें 7 दिन से 10 वर्ष की अवधि तक निवेश किया जा सकता है। हालाँकि निवेश के परिपक्व होने से पहले भी आप कुछ शुल्क देकर अपनी निवेश की गई राशि निकाल सकते हैं। यह शुल्क विभिन्न बैंकों के अनुसार सामान्यतः 0.5 से 1% के मध्य होता है। इसके अतिरिक्त कुछ बैंक एवं वित्तीय संस्थान बिना किसी शुल्क के भी निवेश के परिपक्व होने से पूर्व रकम निकालने की सुविधा देते हैं।

Fixed Deposit में निवेशकों को निवेश के परिपक्व होने की अवधि तक निश्चित ब्याज दिया जाता है जिसकी दरें निवेश की अवधि तथा बैंक के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। उदाहरण के लिए स्टेट बैंक की ब्याज दरें समयावधि के अनुसार नीचे दिखाई गई हैं। FD की सुविधा सभी बैंक, पोस्ट ऑफिस तथा कई अन्य वित्तीय संस्थाएं उपलब्ध कराती हैं।

Best Investment Schemes in Hindi

Recurring Deposit (RD)

Fixed Deposit की ही भाँति RD निवेश का एक अन्य विकल्प है। जहाँ FD में निवेशक को एकमुश्त धनराशि निवेश करनी होती है वहीं RD में मासिक रूप से किश्तों में निवेश (Best Investment Schemes in Hindi) किया जा सकता है। यहाँ निवेश की अवधि 6 माह से अधिकतम 10 वर्ष तक है। RD पर मिलनें वाली ब्याज दरें सामान्यतः 5 से 7% के मध्य हैं जो बैंकों के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। FD की भाँति RD की सुविधा भी सभी बैंक, पोस्ट ऑफिस तथा कई अन्य वित्तीय संस्थाएं देती हैं।

आयकर में छूट युक्त निवेश योजनाएं

इस श्रेणी में हम निवेश के कुछ ऐसे विकल्पों की चर्चा करेंगे जिनमें निवेश करके आप आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत एक वित्तीय वर्ष के दौरान 1.5 लाख तक की आय पर कर बचा सकते हैं। इसके अंतर्गत PPF, NPS, ELSS तथा ULIP जैसी योजनाएं शामिल हैं।

Public Provident Fund (PPF)

पब्लिक प्रोविडेंट फंड भारत सरकार द्वारा संचालित एक स्कीम है। इसमें प्रतिवर्ष 500 से 1.5 लाख तक का निवेश किया जा सकता है तथा आयकर अधिनियम 80C के तहत यहाँ किया गया निवेश तथा PPF खातों में मिलने वाला ब्याज भी आयकर से मुक्त होता है। इसकी परिपक्वता अवधि 15 वर्षों की होती है। हालांकि 5 वर्ष के बाद निवेशक आधी रकम को कुछ विशेष परिस्थितियों में निकाल सकता है। PPF खातों की सुविधा सभी बैंक एवं पोस्ट ऑफिस उपलब्ध करवाते हैं। वर्तमान में PPF खातों पर ब्याज दर 7.10% प्रति वर्ष है।

Tax Saving Fixed Deposit

यह सामान्य FD की तरह ही है। किंतु आयकर से छूट लेने हेतु इस विकल्प के तहत कम से कम 5 वर्षों तक निवेश करना आवश्यक है। इस योजना के तहत प्रतिवर्ष सामान्यतः 100 से 1.5 लाख तक का निवेश किया जा सकता है। PPF खातों के विपरीत यहाँ निवेश पर मिलने वाले ब्याज की दरें बैंकों के अनुसार बदल सकती हैं।

Equity Linked Savings Scheme (ELSS)

इस स्कीम के बारे में हमनें म्यूच्यूअल फंड वाले लेख में समझाया है। यह म्यूच्यूअल फंड का एक प्रकार है जहाँ प्रतिवर्ष 1.5 लाख तक का निवेश आयकर से मुक्त है। अन्य योजनाओं की तुलना में यहाँ जोखिम एवं लाभ दोनों अधिक हैं। ELSS के तहत न्यूनतम 3 वर्षों के लिए निवेश करना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी 1 लाख तक आयकर से मुक्त होता है।

National Pension System (NPS)

नेशनल पेंशन सिस्टम भारत सरकार द्वारा संचालित एक पेंशन योजना है, जिसमें 18 से 60 आयु वर्ग का कोई भी व्यक्ति निवेश (Best Investment Schemes in Hindi) कर सकता है। यह योजना सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसमें निवेश की गई राशि को सरकार द्वारा चुने गए फंड मैनेजरों (LIC, SBI पेंशन फंड, UTI, HDFC पेंशन फंड आदि) के माध्यम से अलग अलग क्षेत्रों जैसे शेयर बाज़ार, सरकारी तथा कॉर्पोरेट बॉन्ड आदि में निवेश किया जाता है।

निवेशक के पास अपनी इच्छानुसार फंड मैनेजर को चुनने तथा अपनी राशि को इक्विटी तथा डेट में किस अनुपात में निवेश किया जाए इसका विकल्प मौजूद रहता है। NPS में निवेश से मिलने वाला रिटर्न म्यूचुअल फंड की भाँति बाज़ार कारकों पर निर्भर करता है तथा आयकर से मुक्त होता है।

निवेशक को उसकी सेवानिवृत्ति या 60 वर्ष की आयु के बाद निवेशित राशि का 60 फीसदी एकमुश्त प्राप्त होता है जबकि बाकी राशि को मासिक पेंशन के रूप में दिया जाता है। NPS में निवेश की गई राशि 60 वर्ष की आयु से पूर्व नहीं निकाली जा सकती किन्तु 3 वर्ष के बाद जमा राशि का 25% कुछ विशेष उल्लेखित परिस्थितियों में निकाला जा सकता है। ऐसा आंशिक आहरण NPS की पूरी अवधि के दौरान केवल तीन बार किया जा सकता है तथा प्रत्येक आहरण के मध्य (मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर) 5 वर्ष की अवधि होना अनिवार्य है। NPS खाते मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं।

टियर 1 : ऊपर बताई गई सभी विशेषताएं इसी खाते की हैं। NPS में किया गया 1.5 लाख तक का वार्षिक निवेश आयकर अधिनियम 80C के तहत तथा अतिरिक्त 50,000 तक का निवेश आयकर अधिनियम 80CCD (1B) के तहत आयकर से मुक्त होता है। इस प्रकार NPS के माध्यम से सालाना 2 लाख तक की आय पर कर बचाया जा सकता है। इसके अलावा निवेश की परिपक्वता के बाद मिलने वाला रिटर्न भी आयकर से मुक्त होता है।

टियर 2 : इस खाते को खोलने के लिए व्यक्ति को टियर 1 खाता धारक होना अनिवार्य है। इस खाते में आयकर से किसी प्रकार की छूट नहीं मिलती जबकि निवेश की गई राशि कभी भी निकालने का विकल्प रहता है।

Unit Linked Insurance Plan (ULIP)

ULIP एक अन्य लोकप्रिय (Best Investment Schemes in Hindi) बचत योजना है। जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है यह निवेश तथा बीमा योजना का संयोजन है। आपके द्वारा निवेश की गई राशि का कुछ हिस्सा आपकी बीमा योजना में डाल दिया जाता है जबकि बाकी राशि बाज़ार (शेयर बाज़ार एवं अन्य वित्तीय उपकरण) में निवेश की जाती है। यहाँ आप मासिक, अर्धवार्षिक या वार्षिक रूप से किश्तों में निवेश कर सकते हैं। ULIP में निवेश की गई राशि कम से कम 5 वर्षों की अवधि तक के लिए निवेश की जाती है।

हालाँकि यह म्यूचुअल फंड के समान है किन्तु म्यूचुअल फंड के विपरीत यहाँ आपको अपनी राशि को आवश्यकता अनुसार कभी भी डेट (बॉन्ड एवं अन्य वित्तीय उपकरण) से इक्विटी (शेयर बाज़ार) अथवा इक्विटी से डेट में हस्तांतरित करने का विकल्प मौज़ूद रहता है। अतः कोई व्यक्ति बाज़ार में गिरावट की स्थिति में अपनी निवेशित रकम को बॉन्ड जैसे सुरक्षित वित्तीय उपकरणों में हस्तांतरित कर सकता है तथा नुकसान से बच सकता है। इस प्रकार यह योजना म्यूचुअल फंड से बहुत हद तक सुरक्षित है। ULIP में मिलने वाला रिटर्न भी पूर्णतः आयकर से मुक्त होता है।

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